दुकान छोड़ कर मक्कार बनिया लड़ने आया हमसे...
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2009
कितना मजा आ रहा है ये देख कर कि मक्कार बनिया अपनी फिसलती हुई धोती सम्हालता हुआ लड़ने को आगे आ रहा है लेकिन ये भूल जाता है कि इससे बच्चों की स्कूल की फीस, दारू का खर्च, राशन का खर्च नहीं निकलेगा। कितनी बार समझाया है कि तुम सिर्फ़ उस काम पर ध्यान दो जिससे दाल रोटी चलती है इस पूरे प्रकरण को एक सबक की तरह से लेने की बजाए गलतियों पर गलतियां दोहराए चले जा रहे हो। चलो लड़ाई लड़ाई खेलते हैं अच्छा मनोरंजन होगा समय भी व्यतीत हो जाया करेगा क्योंकि मुझे तो कोई काम है नहीं। तुम्हें मेरे अलावा भी किसी ने समझाया कि अपनी तरक्की और गुणवत्ता पर ध्यान दो लेकिन तुम सुधरते ही नहीं हो। पाखंड,कमीनापन और शराफ़त का मुखौटा लगाए रखना फितरत में है लेकिन जब तक तुम्हें सुधार नहीं देता आयुष का आयुषवेद के साथ ही भड़ास भी चलता ही रहेगा।
तुम इस नये आयुषवेद के पन्ने पर खुद ही सवाल लिख कर उनके ऊटपटांग उत्तर लिखना और इसे दुनिया के सबसे बड़े मुर्दे हो चुके पंखों वाली भड़ास पर प्रचारित कर देना ताकि लोग सही तरीके से भ्रमित हो सकें। ये ठीक उपयोग होगा उस मुर्दे की कब्र का। चलो मुझे ही नहीं सारे भड़ासियों को इंतजार है।

2 टिप्पणियाँ:
भाई डा.साहब मानना पड़ेगा आपको ये कमीना बेनामी कमेंट्स के जरिये आपको इतनी गंदी-गंदी गालियां दे रहा है और आप सहन कर रहे हैं। एक बात और है कि ये वाकई सियार है तभी तो बेनामी कमेंट करता है आपको खुल कर सड़क पर आने की बात करता है और खुद मां-बाप के दिये नाम को छुपा कर बिल में से बेनामी कमेंट करता है पिस्सू कहीं का.....
जय जय भड़ास
डा.साहब ये छुतिहर अभी तक आपको समझ ही न पाया ये इसका दुर्भाग्य और कुबुद्धि ही है जो इस तरह के खेल कर रहा है। आपको सड़क पर आने के लिये कह रहा है तो इससे मै कहता हूं कि अपने घर का पता या उस सड़क या गली या नुक्कड़ का पता और समय बता दे जहां का ये कुत्ता खुद को शेर समझ रहा है, मैं खुद इसकी टांग में रस्सी बांध कर घसीट कर ले आउंगा। चल चिरकुट बेनामी कमेंट से ही सही जरा अपना पता और समय दे ताकि मैं आकर तेरी कस कर रगडम पट्टी कर सकूं।
जय जय भड़ास
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