विष्णु बैरागी जी : "यदि आपको लगता है कि आप सही हैं तो अपनी उपस्थिति बनाए रखिए। सज्‍जनों की अनुपस्थिति से दुर्जनों को बल मिलता है" यही है बिलोरन ब्लॉगर

सोमवार, 2 फ़रवरी 2009

यह संदेश आपने मेरे ब्लॉग प्रहार में दिया था तो आज किसी मेरे शहर के ब्लॉगर ने आपको यह लिखा है कि आपका यह संदेश ग़लत जगह पर गया है ये वही ब्लॉगर है जो दूसरो को भड़का रहा है अपनी जाति बता raha है . और देख लीजिये वह आपको भड़का रहा है कि विष्णु बैरागी जी आपने अपना संदेश मुझे प्रेषित किया मेरे ब्लॉग प्रहार पर वह बता रहा है कि विष्णु बैरागी जी आपने ग़लत जगह संदेश दिया है याने मेरा ब्लॉग ग़लत है और मै ग़लत हूँ . मेरा ब्लॉग ग़लत जगह है देख लीजिये शर्मनाक उसकी हरकत ?
वो कौन सा सही है वह उसे लोग अच्छी तरह से जानते है और मैंने भी जान लिया है . मैं किसी को भड़का नही रहा हूँ उसके ख़िलाफ़ वह उल्टा मेरे ख़िलाफ़ नाम न लेकर वह ब्लॉग को ग़लत बता रहा है . . . यह एक शर्मनाक उदाहरण है उसकी खुन्नस का ..आज मेरी टिप्पणी से सब उसको आज जरुर तत्काल पहचान लेगे जबकि मैंने कभी उसका नाम या उसके ब्लॉग का नाम नही लिया है .. शर्म की पराकाष्ठा का एक ज्वलंत जीता जागता उदाहरण है .
उसकी पोस्ट ब्लावाणी में आज आई है ..देखे उसने आपको कैसे आज भड़काया है . जिसके दिल में पाप होता है उसका भाडा एक न एक खुल जाता है आज उसका नाम उसकी पोस्ट देखकर समझ जाएगा . यही है दिलजला ......है अभी ब्लॉग का नाम लिया है कल मेरा नाम लेगा यह पक्का है और मै भी नही लिखने से चुकूंगा . उसके मन में पाप है वह आज उसकी पोस्ट में छलक रहा है आज आपको लिखकर अपनी खुन्नस निकाल रहा है . . देखे जो आपने शहर के लोगो का ही सगा नही है तो दूसरो का क्या होगा ?
अरे जो शहर के ब्लागरो का हितेषी नही वह क्या सबका होगा ? यह समय बताएगा.यही है बिलोरन ब्लॉगर दूसरो को भड़का भड़का कर बड़ा लेखक बन रहा है . अभी तो और पता चलेगा कि सरे भारत में उसने कितनी जगह फोन मेरे और मेरे ब्लॉग के विषय में किए होंगे. उसकी गन्दी हरकत निंदनीय है वह पीट ब्लॉगर है यह साबित हो गया है . विष्णु बैरागी जी आभारी हूँ कि आपने कमेंट्स किया तो उसकी कलई सबके सामने उजागर हो gai है . उसकी पोस्ट २.३० बजे ब्लागवाणी में आज प्रकाशित की गई है जरुर गौर फरमाए जी . आज दूध का ढूध और पानी का पानी हो गया है .
एक बात समझ लो बिलोरन तुम्हारे कहने से भड़काने से मुझे की फर्क नही पड़ता है तुम सम्मान के योग्य नही हो . सामने आकर लिखो ईट का जबाब पत्थर से दिया जाएगा . और समझ ले सांच को आंच नही है . धिकार है आज तुमने अपनी कलम से सबके सामने अपनी भावना व्यक्त कर दी . धिक्कार है .


महेंद्र मिश्र
जबलपुर.

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

मिश्रा जी बस यकीन मानिये कि मुखौटाधारियों के मुखौटे नोच कर बदनाम हो जाने के लिये भड़ास ही आपके साथ आ खड़ा होगा बाकि सब तो बस एक दूसरे की सहलाने में लगे रहते हैं। "गुडी-गुडी" के अलावा कुछ अगर लिख दिया तो बुरे लोगों में गिन लिये जाएंगे, कस कर पेलिये तब ऐसे लोग मानते हैं
जय जय भड़ास

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