भविष्य में आने वाली नई तकनीके जो जादू से कम नही है ...

रविवार, 1 मार्च 2009

आज टेक्नोलाजी का ज़माना है ...... कुछ ऐसी तकनीक चुकी है जिसको कभी संभव ही नही माना जाता था , लोग शंका भरी नजरों से देखा करते थेआगे भी कुछ ऐसा ही होने वाला है ... जो अभी संभव नही दिखता
* एमआईटी में मटीरिअल्स केमिस्ट्री के प्रोफेसर डोनाल्ड साडोवे ने लिक्विड बैटरी तैयार की है। इस बैटरी में इलेक्ट्रिसिटी की भारी मात्रा स्टोर की जा सकती है जो रात भर सोलर पावर के जरिए कई शहरों की इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत को पूरा कर सके।
* एक टीम एक ऐसा रिएक्टर तैयार करने में लगी है जो डेपलीटेड यूरेनियम यानी पर चलेगी। इससे न्यूक्लियर पावर पर काम करना आसान होगा और अब के मुकाबले काफी सस्ता भी होगा।
* हार्वड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉर्ज वाइटसाइड्स पेपर डायग्नोस्टिक टेस्ट को तैयार करने में लगे हैं। इसके तहत पेपर के जरिए ज्यादा से ज्यादा मेडिकल टेस्ट्स लेना संभव होगा। तब यूरिन या ब्लड संबंधी टेस्ट्स के लिए केवल एक पेपर का यूज किया जाएगा इन सैंप्लस का बाद में मेडिकल टेस्ट हो सकेगा। यह सस्ता भी होगा और जल्दी भी
* केलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर मिशेल माहरबिज़ ने अनोखी बायलॉजिकल मशीन्स तैयार की हैं। यह ऐसे जीवाणुओं की फौज होगी जो निगरानी या खोजबीन में काम आ सकेंगे। इसका प्रयोग अपने आप में जादू से कम नहीं होगा।
* बायोनैनोमेट्रिक्स के फाउंडर हान काओ ने एक नैनो-फ्लूडिक चिप तैयार की है, जिससे जीनोम अनालिसिस का खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा। इस टेक्नॉलॉजी का सही प्रयोग कर डॉक्टर्स किसी पेशेंट के यूनीक जेनेटिक प्रोफाइल को समझकर उसके मुताबिक बीमारियों का ट्रीटमेंट कर सकते हैं। साथ ही इस चिप के सही प्रयोग से नए वायरसस की पहचान भी आसान होगी।
* स्टैंडफोर्ड कंप्यूटर साइंटिस्ट निक मैक्विन ने ओपनफ्लो नाम का सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसके जरिए इंटरनेट यूजर्स को फायदा पहुंचेगा। ओपनफ्लो की हेल्प से रिसर्चर्स नई नेटवर्किंग टेक्नॉलॉजीज को आसानी से और तुरंत जांच सकेंगे। और हां, इस प्रोसेस के दौरान इंटरनेट की नॉर्मल सर्विसेस में कोई खलल नहीं पड़ेगा।
* जॉर्जिया टेक में मटीरिअल साइंटिस्ट झोंग लिन वांग नानो-पायज़ोट्रानिक्स की फील्ड की एक उपलब्धि सामने लाने वाले हैं। वांग पायज़ोइलेक्ट्रिक नैनोवायर बना रहे हैं जो एनवॉयरमेंट की नन्ही वायब्रेशन्स के जरिए बिजली बना लेती हैं। ये उन मेडिकल डिवाइस को चलाएगी, जिन्हें शरीर के भीतर इंप्लांट किया जाता है। यह अपने आप में जादुई उपलब्धि है

ऐसे ही कई करिश्मे इंतजार में हैहम सब वेट कर रहे है

5 टिप्पणियाँ:

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

बड़े ही आश्चर्य की बात है कि सब ब्लागरों और दुनिया भर के डाक्टरों को भी ये पश्चिमी के ही अविष्कार जादू भरे दिखते हैं। अगर किसी में जरा सी भी हिम्मत है सच का सामना करने की तो जरा डा.रूपेश श्रीवास्तव केगुरुदेव डा.देशबंधु बाजपेयी द्वारा अविष्कार करी गई इलैक्ट्रोत्रिदोषग्राफ़ पर लिखे।
आप भी जरा एक नजर मारिये ताकि सचमुच आप दोनो उपलब्धियों की तुलना कर सकें बस E.T.G. हमारे महान देश की सरकारी मशीनरी में उलझा हुआ है और दूसरी मशीन तो गोरों ने बनाई है तो उसकी तकनीक खरीदने में अब हमारे मंत्रालय अरबों रुपए की चांदी काटेंगे इसलिए खुश हैं।
जय जय भड़ास

MARKANDEY RAI ने कहा…

you are right. lekin taknik kahi se bhi aaye hame fayada pahuchati hai.

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रिय भाई तकनीक यदि कहीं से भी आये तो वो हमें फायदा पहुंचाएगी इस बात के बारे में तो मैं निश्चित नहीं कह सकता लेकिन संबंधित मंत्रालय जरूर उस तकनीक को उस दूसरे देश से खरीदने में चांदी काटता है और यही कारण है कि हमारे देश में यदि कोई तकनीकी विकास जैसा कि ई.टी.जी. के साथ हो रहा है होता है तो लालफीताशाही का शिकार हो जाता है क्योंकि उसमें मलाई छानने का मौका नहीं रहता। विदेशी तकनीक ही फायदे की रहती है ये बात नेता और उस तंत्र से जुड़े माफ़िया जनता को समझा देते हैं। आप मेरे निवेदन पर जरा मुनव्वर आपा द्वारा दी गयी लिंक पर नजर मार कर देखिये आप समझ पाएंगे कि मेरा ये आग्रह क्यों है.... जय जय भड़ास

MARKANDEY RAI ने कहा…

rupesh jee , aapke kahane par maine dekha E T G taknik really kaphi achhi hai. hamaare politician apane fayade ke liye to foriegn countries se technologies buy karate hai. isase mai sahmat hoon . par isika to faayada baharwaale uthate hai . agar is dhandhali ko chod diya jaay to technology se mujhe koi shikayat nahi hai.

ज़ैनब शेख ने कहा…

भाईसाहब तकनीक से भला किसे शिकायत होगी....बात तो उससे जुड़े व्यवहार की है। खुड डा.साहब इस क्षेत्र के जानकार है इसलिये उन्होंने अपना मत रखा अन्यथा कोई भी कहां इन बातों पर ध्यान देता है...
जय जय भड़ास

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