गाजा पट्टी की समस्या .....

सोमवार, 2 मार्च 2009

फिलिस्तीनी भूमि आजकल फिर चर्चा में है । वैसे वह कब चर्चा में नही रहता यह कहना मुस्किल है । हमेशा वह कुछ न कुछ उथल पुथल मची ही रहती है । अगर लोगों के नारकीय जीवन का दर्शन करना हो तो आप गाजा पट्टी को देखिये । आपको पता चल जायेगा की जिंदगी कितनी कड़वी है ?मै कई वर्षों से फिलिस्तीन की समस्या पर नजर रखे हुआ हूँ । सिविल सेवा की तैयारी की बाध्यता भी कह सकते है । सोचता हूँ फिलिस्तीन समस्या का समाधान हो जाने पर दुनिया को कितनी राहत मिलेगी ... इसका अंदाजा अभी मुस्किल है ...... खैर कोई जादू की छड़ी नही है जिससे यह समाधान निकल आएगा ।आइये कुछ चीजों पर गौर करते है .....* गाजा इजरायल और मिस्र के बिच समुद्री किनारे की छोटी सी संकरी पट्टी है जो लगभग ४० किमी लम्बी तथा १० किमी चौडी है । इस पट्टी में करीब १४ लाख फिलिस्तीनी और ८ हजार इजरायली रहते है । इनमे से अधिकाँश फिलिस्तीनी शरणार्थी है जिनमे से ज्यादातर १९४८ के अरब इजरायल वार से प्रभावित होकर गाजा में बसे थे ।* गाजा पर फिलिस्तिनिओं का हजारों वर्ष पुराना दावा है । जबकि यहूदियों का तर्क है की यह उनकी पुराण कथाओं का पवित्र स्थल है ।* १९६७ के वार में इजरायल ने गाजा पर कब्जा कर लिया तथा वह यहूदी बस्तियां स्थापित करनी शुरू कर दी ।* स्पष्ट है की गज में यहूदी अल्पसंख्यक है । २००५ में तत्कालीन यहूदी प्रधानमन्त्री एरियल शेरोन ने ४८ घंटे में गाजा से यहूदी बस्तियों को हटाने की घोषणा कर दी थी लेकिन बाद में पता चला की यह अमेरिका से दो अरब डॉलर की सहायता लेने की रणनीति थी ।* वास्तविकता यह है की १९६७ से गाजा और पश्चिमी तट पर इजरायल का कब्जा जरुर रहा है लेकिन नियंत्रण कभी नही रहा है । हमेशा होम्वार की स्थिति बनी रही है ।*हमास ने २००७ के चुनाव में महमूद अब्बास की फतह पार्टी को गाजा में पराजित कर दिया तथा सरकार का गठन भी किया लेकिन अन्तार्रस्त्रिय समुदाय का सहयोग प्राप्त नही हुआ । गाजा पर हमास गुट का कब्जा है और वह इजरायल को मान्यता देने से इनकार करता है ।* इजरायल ने मिश्र की रफाह सीमा पर अपनी सेना तैयार कर राखी है । गाजा के अधिकाँश बन्दरगाहों पर इजरायल का ही कब्जा है ।* अभी वहाँ की हालत सबसे ख़राब है । एक रिपोर्ट के अनुसार १९६७ के बाद आज की मानवीय दशा नारकीय है* अन्तार्रस्त्रिय न्यायालय हेग भी मान चुका है की गाजा और पश्चिमी तट पर इजरायल का कब्जा अबैध है । जबकि इजरायल का मानना है की उसका कब्जा पुरी तरह जायज है ।कई लोगो के मत अलग हो सकते है लेकिन यह एक सच्चाई है की इजरायल का गाजा पर कब्जा अबैध है । उसकी वजह से फिलिस्तीनी नारकीय जीवन जीने को मजबूर है । जबतक इसका न्यायोचित हल नही निकालता तब तक वहाँ शान्ति स्थापित होना मुस्किल है ।आप अपने विचारों से अवगत करा सकते है ...... आपका स्वागत है

3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

भाई सर्वप्रथम तो ये निर्धारित करा जाए कि "न्यायोचित" शब्द का परिसीमन कैसे करा जाए... न्याय है क्या... किन नियमों को हम न्याय का आधार बना सकते हैं.... क्या यदि मौजूदा”कोडीफ़ाइड ला” स्वयं का पालन नहीं करवा पा रहा है तो कहीं व्यवस्था दोषपूर्ण है जिसे जाने बगैर न्याय असंगत होगा। विधि है कानून है पर लोग उसे मानते नहीं पालन नहीं करते तो ऐसे कानून का औचित्य कितना है????? न्याय व्यवस्था बनाने वालों के लिए विचार का विषय है...
जय जय भड़ास

MARKANDEY RAI ने कहा…

sahmat hoon. justice ko define time and condition ke according hi karna padega. justic should be favour of common people who is suffering.

गुफरान सिद्दीकी ने कहा…

मार्कंडेय भाई प्रभावित हूँ आपके लेख से ये वाकई बहस का मौजू है और गाजा के हालत पर आपकी नज़र सही है पर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति वास्तव में हम बहोत जगह असफल होते देख सकते हैं हमारे सामने तिब्बत है बोस्निया है सोमालिया है और भी बहोत से देश हैं जिनका इस्तिमाल कुछ शक्तिशाली मुल्क अपने फायदे के लिए कर रहे हैं..
इराक,इरान से अरब को साधा जा रहा है तो अफगानिस्तान पाकिस्तान से एशिया को साधा जा रहा है.और खास बात ये है की हम जानते हुए भी अपना विरोध तक दर्ज नहीं करा पा रहे हैं.
आज पाकिस्तान जैसी समस्या हमारे सामने मुह बाये आतंकवाद के रूप में खड़ी है लेकिन कुछ करने के नाम पर हम अंतर्राष्ट्रीय दबाव बना रहे हैं अमेरिका का मुह ताक रहे हैं.वास्तव में हम उसी दबाव में हैं जिसका ज़िक्र मैंने ऊपर किया है और जब तक हम खुद फैसला करने की स्थिति में नहीं होंगे तब तक हमें भी ऐसी दिक्कतों का सामना करते रहना होगा....
आपके लेख के लिए बधाई .......

आपका हमवतन भाई.....गुफरान...(अवध पीपुल्स फोरम फैजाबाद)

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