जुडीशियरी के भ्रष्टाचार का सहारा लेकर अपराधी घोषित कर दिया जाए तो आप क्या करेंगे?

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009

आजकल एक विचार को बड़े जोरशोर से मीडिया द्वारा प्रचारित करा जा रहा है कि आप अपना वोट अपराधियों को मत दीजिये। सभी लोग इस बात से सहर्ष सहमत हैं लेकिन अपराधी कौन है ये कैसे निर्धारित करा जाएगा? अब आप सब कहेंगे कि मेरा दिमाग घूम गया है इसलिये ऐसा लिख रहा हूं। अरे भाई ! जिस आरोपी को अदालत ने सुनवाई के बाद दंडविधान के अंतर्गत दोषी पाया वह अपराधी है उसे सजा दी जाती है। आप सब भूल रहे हैं इसी ताकत का सबसे भयानक दुरुपयोग करा जाता है सच्चाई और ईमानदारी की आवाज को दबाने के लिये यानि कि False implication यानि कि झूठे आरोप में फंसा कर साधारण नागरिक के बल ढीले करना। जैसे कि अभी कुछ समय पहले ही हमारे भड़ास परिवार के माडरेटर डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव के साथ हुआ था। हुआ कुछ इस तरह था कि धर्म के ठेकेदारों ने गणपति उत्सव के लिये चंदा वगैरह जमा करा; नाचे-कूदे, खाये-पिए और जो कुछ भी होता है उस पैसे का आप सब जानते हैं। गणपति विसर्जन हो गया, मूर्ति पानी में विसर्जित कर दी गयी, सब कुछ निपटे तीन दिन हो गये लेकिन उत्सव का वो बैनर जिस पर भगवान गणपति का चित्र बना था उतारा नहीं गया और तेज हवा से फट कर वो बैनर सड़क पर जा पड़ा था जिस पर कुत्ते को संडास करते देख कर डाक्टर साहब दुखी हो गये और उन्होने वही करा जो एक सभी धर्मों का समान आदर करने वाले इंसान को करना चाहिये; उन्होंने कुत्ते के मल को पानी से धोया और भगवान गणपति के चित्र वाले उस बैनर को अपने घर पर लाकर रखा। अपनी बिल्डिंग की सोसायटी के नोटिस बोर्ड पर इस घटना को लिखा कि क्या हुआ और एक सवाल भी कर लिया कि क्या मिट्टी की मूर्ति ही भगवान गणेश का प्रतीक थी वो बैनर पर बना चित्र नहीं जो कि कुत्ते के मल के नीचे पड़ा था क्या संयोजक इस लापरवाही के लिये जिम्मेदार नहीं है? आप सब जानते हों शायद कि क्या हुआ था..... भाईसाहब को उनके घर में घुस कर करीब पचास हिंदू धर्म के ठेकेदारों ने बुरी तरह न सिर्फ़ मारापीटा बल्कि सोसायटी में उपद्रव करने की पुलिस में झूठी रिपोर्ट भी करा दी जिस रिपोर्ट के पक्ष में सोसायटी के लगभग सभी लोग थे क्योंकि वो सभी लोग उस लापरवाही के लिये जिम्मेदार थे और जो सवाल भाईसाहब ने करा उससे उनके अहं को ठेस लगी। पुलिस ने न सिर्फ़ भाईसाहब को दो दिन सताया पुलिसिया कहर के बाद उन्हें धारा १४९ का नोटिस भी पकड़ाया गया कि अगर दोबारा ऐसा कुछ हुआ तो तड़ीपार(जिलाबदर) करवा दिया जाएगा। राजनेता उनके, पुलिस उनकी, भीड़ भी उसी तरफ़ तो फिर डाक्टर साहब को अपराधी बनाने में कितनी देर लगती है।
जरा सोचिए कि यदि राजनीति में सही,ईमानदार और सच्चे प्रत्याशियों को इस तरह जुडीशियरी के भ्रष्टाचार का सहारा लेकर अपराधी घोषित कर दिया जाए तो आप क्या करेंगे। किसे वोट देंगे?????
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

अजय मोहन ने कहा…

भाई आपको याद होगा कि अंग्रेज भी इसी ताकत का दुरुपयोग करते थे,किसी को भी वे सीधे फांसी पर नहीं चढ़ा देते थे पहले मुकदमा चलाते थे सुनवाई होती थी और फिर.....। यही हमारे काले अंग्रेज शासकों ने सीख लिया है कि जिसे सता सता कर मारना है उसे दो चार मुकदमों में फंसा दो साला जिंदगी भर रोएगा और दो-पांच साल जमानत न होने दो बस सीधा हो कर हमारे पक्ष में आ जाएगा या हमारे ही भ्रष्ट सिस्टम का हिस्सा बन जाएगा। डा.साहब से मैं उन्हीं दिनो सम्पर्क में आया था वो जैसे थे वैसे ही हैं परेशानियां उन्हें बदल नहीं पाती हैं
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

लोग सब कुछ बड़ी जल्दी भूल जाते हैं, लेकिन हमारी न याददाश्त मिटती है न सोच बदलती है जारी है
जय जय भड़ास

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