बेटा! तू ये मत सोच कि मैं डर गया तुझसे......

शनिवार, 23 मई 2009

एक पोस्ट क्या लिख दी तुझे जुलाब होने लगे। खाड़ी में बैठा शैतान संडास करने भागने लगा। सारे हिंदुस्तान में फोन लगाने लगा। अरे चिरकुट अभी तो चार लाइने लिखी हैं, मुझे पता है कि तू जब चाहे मुझे गोली मरवा सकता है लेकिन अब मुझे मौत का डर नहीं है। जिस दिन से तू हाजी अली की दरगाह पर आया था तब से अब तक की कहानी अगर लिखना शुरू करा तो तेरे हिमायतियों को भी जुलाब होने लगेंगे। याद रख गंदी नाली के कीड़े! तूने अगर मुझे मरवा भी दिया तो तेरी करतूतों के सारे सबूत मैंने सुरक्षित रखे हैं वो सारे इसी भड़ास पर खुद ब खुद एक एक करके मेरे गुरूभाई डालना शुरू कर देंगे। अगर तू सचमुच एक बाप की पैदाइश है तो चलवा मुझ पर गोली फिर देख कि कलम में कितनी ताकत होती है। पुरानी कहानी में जिसमें किसी का नाम नहीं है तू खुद अपने आप को उसमें फिट कर रहा है क्योंकि तू जानता है कि तू ही है वो मास्टरमाइंड अपराधी ,कोल्ड ब्लडेड क्रिमनल इसी लिये तू खुजली वाले बंदर की तरह उछलने लगा है, नाम पते और फोटोग्राफ़्स के साथ जिस दिन लिखना शुरू कर दिया उस दिन तू खुद को खुदा मानना बंद करके चूहा भी न मान पाएगा। अपने बापों को फोन करना बंद कर वरना तू अपने किसी बाप को फोन करेगा और मैं भड़ास पर तेरी चड्ढी फाड़ूंगा। अबे घोंचू! बड़े मियां तेरा नाश करने से पहले नहीं मरेंगे ये याद रख, तूने कहा था न कि बड़े मियां कब तक रहेंगे, अरे गटर की पैदाइश! मेरी मौत का इंतजार करना बंद कर ।
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

बेनामी ने कहा…

jo aapse le khushki
maiyyo kar do uski :)

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अरे भाई अनाम जरा सामने तो आओ यार....
जय जय भड़ास

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