किसी के प्यार के बिना...

सोमवार, 1 जून 2009


ऐसे बीती जिंदगी किसी के प्यार के बिना।
जैसे नदिया बहती जाए इन्तजार के बिना

कोरे सपने रंग को तरसे
तरुबाई तरसे मधुबन को -
रूप चांदिनी को मन तरसे
सुधि तरसे आलिंगन को-

ऐसे योवन का बसंत है बहार के बिना।
जैसे कोई प्रेम सुहागिनी हो श्रींगार के बिना॥


सारांश यहाँ ......आगे पढ़े

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

सुमन भाई, सारांश तो ये है कि किसी के प्यार बिना सामान्य आदमी पगला जाता है और उस सनक में भड़ास पर आकर उगलने लगता है :)
जय जय भड़ास

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