भड़ास और उसके संचालक

गुरुवार, 25 जून 2009

आज कुछ दिनों से जब से मैंने भाई मुनेन्द्र के सवाल को चित्र सहित सेमलानी जी से अपनी पूर्ण भडासी विनम्रता के साथ पूछा था की इन दोनों चित्रों के पीछे क्या रहस्य है तो वो बात तो खुली नही हाँ ये जरूर हो गया की भड़ास के मंच पर अनूप मंडल और जैन धर्म के मानने वालों के बीच घमासान छिड़ गया। भड़ास के माडरेटर्स को कोई क्या चूतिया बनाएगा हम दोनों तो रेडीमेड पक्के चूतिया हैं तभी तो भड़ास चला पा रहे हैं। आप सब भाई रजनीश झा की मेरे ऊपर लिखी पोस्ट "चुतिओं का सरदार गुम हुआ'' पिछली पोस्ट में जाकर देख लीजिये , यकीनन हम भडासी अगर चूतिया न हों तो ऐसी बातें क्यों करें जिन बातों पर फुसफुसाहट करने में भी लोगों की फटती है। लेकिन एक बात तो सत्य है कि आप सब इन मुद्दों पर कहीं दूसरी जगह विमर्श नही कर सकते।
अमित भाई ! भड़ास किसी का बंधुआ नही है ये मात्र वो व्यवस्था है जिसके तहत वो लोग भी भड़ास पर पोस्ट कर सकते हैं जो भड़ास के सदस्य नही हैं इसके लिए बस सीधे सबसे ऊपर दिए इ-मेल पते पर अपना लेख भेज देना होता है और वो पूरी लोकतांत्रिक गोपनीयता को समझते हुए भड़ास के नाम से प्रकाशित होता है। इसमे प्रेषक का नाम नही पता चलता यदि कोई अपना नाम गुप्त रखना चाहे तो वो इस का सहर्ष प्रयोग कर सकता है। अभी बस इतना ही आप दोनों जारी रखिये लेकिन भड़ास कि भडासी सीमा के अन्दर रहकर.........
जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

मनोज द्विवेदी ने कहा…

GURUJI EK BAT TO MANNI HI PADEGI KI LOGON KI ASALI BHADAS ISI MANCH PAR AKAR NIKLATI HAI..YAHAN TAK KI LOG (KAHANA TO NAHI CHAHIYE PAR SANKET DE RAHA HUN) H MUT CHHIRIK DE RAHE HAIN....
JAI JAI BHADAS

अजय मोहन ने कहा…

कोई बात नहीं है मनोज भाई भड़ास पैथोलाजी में गू, मूत, उल्टी और थूक की जांच करके डा.रूपेश और भाई रजनीश झा बता देते हैं कि बन्दे को रचनात्मक होने के लिये क्या उपचार लेना होगा। मूत के साथ साथ अगर हग भी दें तो मान लेंगे कि जोर से लगी होगी तो उल्टी के साथ टट्टी भी हो गयी। परेशान न हों भड़ास ने ये उगालदान इस लिये बनाया है ताकि लोग अपने अंदर की विध्वंसात्मक सोच को उगल कर निर्मल हो सकें। लेकिन कोशिश ये रहे कि उगालदान में उल्टी ही करें मूतें या हगें नहीं :)
जय जय भड़ास

ज़ैनब शेख ने कहा…

महावीर सेमलानी जी कोई उत्तर क्यों नही देते बस सवाल पर सवाल दागे जा रहे हैं। रुद्रारम वाली आपकी पोस्ट देखी,काफ़ी दिनों बाद भड़ास पर आना हो पाया। जैन समुदाय के लोगों ने उस कत्लखाने के संचालक का बहिष्कार क्यों नहीं करा या वो अब भी खुद को जैन कह कर उनके मंदिरों में जा रहा है?या ये मात्र एक झूठा आरोप है कि वो संचालक जैन है,इस विषय पर सचमुच महावीर सेमलानी एक शब्द भी नहीं बोले क्या चक्कर है जबकि भाई दीनबंधु उन्हें बार बार कोंचते हैं फिर भी चुप्पी साध कर हर बार अहिंसा के पाठ का एक अध्याय सिखा कर निकल जाते हैं?
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

आपकी बातो का मै तहे दिल से समर्थन करता हु

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