सडांध भरी है न जाने कहा कहा

बुधवार, 15 जुलाई 2009

अपने बदन का मैल तो
मैं साफ़ कर लूँगा धो कर
अपने सड़े हुए अंग को भी
अलग कर सकता हूँ
अपने शरीर से
पर मस्तिष्क की सड़ाँध
का क्या करूँ??
न तो धो सकता इसे
और न ही यह
किसी आप्रेशन से
अलग हो सकती है
बस इस सड़ाँध से
मैं कर सकता हूँ
कोरे पन्ने ही
काले-पीले
जिससे तुम्हें
कुछ तो आभास हो
मन की सड़ाँध का !

3 टिप्पणियाँ:

मनोज द्विवेदी ने कहा…

KYA AMIT BHAI AP BHI SADANDH-WADANDH KI BATE KARTE HAIN..ARE MAHARAJ KUCHH SPRAY WAGAIRAH MARIYE. KAM SE KAM DUSRON KO CHAIN KI SANS LENE DIJIYE. WAISE MASTISK KI SADANDH KA ILAZ HAI. MERI RAY MANIYE TO GAU MATA(COW MOTHER) KA GOBAR MALIYE. ISME BADI SHAKTI HOTI HAI. SARI SADHANDH IS GOBAR ME OBJERVE HO JAYEGI.

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

धन्यवाद मनोज भाई , आप ने स्वय परक्षित नुस्खे की जानकारी दी >.............:)

मनोज द्विवेदी ने कहा…

AMIT BHAI..MAINE TO GAU MATA KA MUT BHI SEVAN KIYA HAI AUR KARTA RAHTA HUN..BAHUT FAYADEMAND HAI KAM SE CHOR DOCTRON SE THAGA TO NAHI JATA. AAP YE JAN LIJIYE GAU MATA KA DUDH, MUT, GOBAR AMRIT HAI. MAIN TO BHAIYYA SEVAN KARTA HUN. AP MERE MITRA HAI ISLIYE BATA DIYA. MIRCHI LAGE TO GAU MATA KA MUT LAGA LIJIYE TURANT AARAM HOGA.

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