क़ुतुब मीनार में मौजूद मस्जिद -भारत की प्राचीनतम मस्जिद

बुधवार, 24 फ़रवरी 2010


(तस्वीरों को साफ़ देखने के लिए उन पर क्लिक करे )


जरा ध्यान से देखो अनूप मंडल की भारत की प्राचीनतम मस्जिद जो देल्ही के क़ुतुब मीनार के प्रांगन में स्तिथ है , उस को बनाने के लिए २७ हिंदू और जैन मंदिरों को ध्वस्त कर के खम्बे और दूसरी वस्तुए प्राप्त की गई है ,जो कुछ मै बता रहा हू वो पूर्ण रूप से साक्ष्यों पर आधारित है जिसे कोई भी झुठला नहीं सकता , रही तुम जैसो की बात तो लडवा कर कफ़न की दुकान लगाना सिर्फ तुम जैसे लोग ही कर सकते है , अगर हिम्मत है तो जो बोल रहे हो उस को सिद्ध भी कर के दिखाओ , वर्ना अपना गाल बजाना बंद करो /  ये तस्वीरे कुतुबमीनार के प्रांगन की है , यदि आप में से किसी को भी कोई शक हो तो वो वह जा कर देख सकता है

2 टिप्पणियाँ:

mahadev ने कहा…

बात आपकी ठीक है । लेकिन ऐसा क्यो हुआ । उस समय की हमारी राज्य व्यवस्था एवम धार्मिक व्यवस्था हमलावर आक्रांताओ को मुकाबला करने मे क्यो असक्षम रही थीं । अरब से ले कर पाकिस्तान तक की भुमि पर उनका कब्जा हो गया, लेकिन हम क्यो सुरक्षित रह पाए। हमारी कमजोरी क्या है - हमारी मजबुती क्या है ? क्या हम कमजोरियो से होने वाले नुक्सान को कम रखते हुए मजबुतियो का लाभ लेने की स्थिति मे है। क्या जो हुआ , उस चक्र को हम उल्टा घुमा सकते है ? इन प्रश्नो पर विचार किया जाए............

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

अमित भाई सत्ताइस हिन्दू व जैन मन्दिरों को ध्वस्त करके प्राप्त करी जाने वाली सामग्री के बारे जो उल्लेख करा गया है वह पुरातत्त्व विभाग ने किस आधार पर करा है ये जानना जरूरी है क्योंकि कोई भी सरकारी विभाग इस तरह का उल्लेख नहीं करता ये तो स्पष्टतः विवाद फैलाने का प्रायोजित कार्यक्रम है जो कि बहुत सोच समझ कर करा गया है। भारत की किसी भी मस्जिद,इस्लामी इमारत,दरगाह आदि को बनाने के लिये अरब से मिट्टी नहीं लायी गयी जो है सब भारतीय है शुद्ध हिन्दुस्तानी है वह मिट्टी क्या ध्वस्त करके पायी गयी ये उस दौर की बात है जब हर बात ताकत और तलवार से निर्णय होती थी लिखित संविधान था ही नहीं, आज का उदाहरण सामने है कि एक बाबरी मस्जिद जिसमें कोई नमाज न पढ़ता था तोड़ दी गयी तो कितना विवाद है कितने दंगे हो गये लेकिन आज तक राम मन्दिर न बन पाया और शायद न बन पाएगा क्योंकि कोई बनाना ही नहीं चाहता है। लेकिन ध्यान रहे किसी जैन मंदिर पर कोई आंच नहीं है ये संविधान की ही देन है। सारे ताजमहल,कुतुबमीनारें,मस्जिदें कब्जा करके ही बनाई गई होंगी अब इस बात पर जूतम पैजार करने से क्या फायदा?जो आज है उसपर चर्चा करें तो बेहतर होगा, मंहगाई खत्म हो गयी क्या जो आपको कुतुबमीनार सूझ गयी
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