लो क सं घ र्ष !: पाकिस्तान पर मेहरबानी अमेरिकी शरारत

सोमवार, 8 मार्च 2010

बच्चों से परीक्षाओं में अन्य प्रश्नों के अतिरिक्त कभी कभी ये दो सवाल भी पूछे जाते हैं एक यह कि किसी देश का राष्ट्रीय खेल कौन सा है, दूसरा यह कि मुख्य व्यवसाय क्या है, यदि अमेरिका के बारे में कोई मुझ से यह प्रश्न करें तो मैं बेधड़क पहले के जवाब में यह कहूंगा कि उसका खेल दूसरें देशों पर प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से आक्रमण करना, खून खराबा करवाना, आतंक फैलाना तथा दादागिरी करते रहना है, मुख्य व्यवसाय से पहले एक देश को लैस करके क्षेत्र में असंतुलन की स्थिति पैदा कर देना, फिर शिकायत करने पर उसके मुकाबले वाले देश को भी सप्लाई दे देना, फिर दोनों को गेम करना, लड़वाना और दोनों के हथियारों को एक दूसरे पर दगवाना और इस प्रकार दोनों पर धौंस गाठना और अपना उल्लू सीधा करना।
इधर अखबारों में एक खबर आई है कि जिसके लिये मुझे इतनी भूमिका की जरूरत पड़ी पाकिस्तान के साथ हथियारों के व्यापार के लिये अमेरिका ने अपनी चालाकी से एक स्थिति बनाई, पहले उसने विदेश सचिव स्तर की वार्ता को जोड़ने के लिये पहली बार बैठे उसी के बाद उसने पाकिस्तान को लेजर गाइडेन्ट बम किट, 12 ड्रोन, 18 एफ-16 लड़ाकू विमान, तथा स्मार्ट बम बनाने के उपकरण देने का फैसला कर लिया तथा उसकी सैन्य मदद 70 करोड़ डालर से बढ़ाकर 120 करोड़ डालकर कर दी। सभी को पता है कि अमेरिका ने कहां कहां दखल अंदाजी अब तक की है ऐसे देशों की एक लम्बी सूची है। भारत जब इसकी शिकायत करेगा तो अमेरिका तुरन्त भारत पर भी मेहरबानी करेगा। गालिब ने सच कहा था

हुए तुम दोस्त जिसके, दुश्मन उसका आसमां क्यो हो।

डॉक्टर एस.एम हैदर

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

डॉ.हैदर की बात से पूरी तरह से सहमति है।
जय जय भड़ास

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