साम्यवादी(?)रणधीर सिंह सुमन के वकील गुफ़रान सिद्दीकी

शुक्रवार, 18 जून 2010

आज कितने दिनों से लगातार कोशिश कर रहा हुं कि लोकसंघर्ष नाम से रणधीर सिंह सुमन और उनके संगी साथी जो माहौल प्रस्तुत करके खुद को जनता का हितचिंतक बताने की कवायद में लगे थे उसका मैंने भंडाफोड़ करने का बीड़ा उठाया। मैं इस मुद्दे पर हर बार रणधीर सिंह सुमन से सवाल कर रहा हूं कि वे अपनी सोच की स्थिति को स्पष्ट करें। वे भारत की राजनीति की लांगरेस कांग्रेस से परहेज करते हैं साथ ही भाजपा के विरोध में भी माला जपा करते हैं। उनके झंडे का रंग कैसा है वे स्वघोषित साम्यवादी हैं इसपर मैंने ही नहीं भाई अजय मोहन जी ने भी उनकी गोलमोल बातों पर लिखा था कि आपकी विचारधारा क्या है दक्षिणपंथ,वामपंथ या पोंगापंथ तो इसपर वकील साहब ने अपने वकीलाना अंदाज में उत्तर दिया कि वे साम्यवादी हैं जिसपर मैंने उनसे सवाल करा कि वे ये साफ़ बता दें कि वे किस साम्यवाद के रंग में यकीन करते हैं मार्क्स,लेनिन या फिर माओ? अब वकील साहब लोकसंघर्ष पर राजनीति छोड़ कर ब्लागरों को खुश करने के लिये शोध करा कर लेख लिखवा रहे हैं, मेरी बात के उत्तर में सिर्फ़ नाइस लिख कर कन्नी काटने की कुटिलता दिखा रहे हैं और वकील साहब की वकालत में बात की दिशा को मोड़ने के लिये भड़ास के मंच पर उतरे वकील श्री गुफरान सिद्दीकी जी मेरी मानसिकता को जिन्ना के पीछे ठहरा रहे हैं। ये दलील इनकी निजी है कि मेरे जैसे लोगों की सोच जिन्ना के पीछे थी या इसमें भी आपने रणधीर सिंह सुमन से मशविरा करा है?चलिये जिन्ना मुसलमानों पर गांधी-नेहरू द्वारा थोपे गये नेता थे और इस सोच को मेरे जैसे कपटी लोगों ने पुष्ट करा है तो क्या अब आप रणधीर सिंह सुमन के कंधे पर चढ़ कर मुसलमानों(माफ़ कीजिये सारे भारतीयों का नेता मैं आपको स्वीकार ही नहीं सकता यदि आप मुसलमान होने के दायरे से ऊपर नहीं उठते क्योंकि मैं तो आपकी सोच को भी इसी मंच पर जमाने से पढ़ता आ रहा हू आप तो धर्म के विषय में चर्चा तक करने को तैयार नहीं है विमर्श करना तक बुरा मानते हैं तो हुए न कट्टरपंथी मुसलमान फिर सबके नेता कैसे बन सकते हैं आप तो इस्लाम सापेक्ष हैं राजनैतिक धर्मनिरपेक्षता किधर से लाएंगे? कहीं इस्लाम छोड़ने का इरादा तो नहीं है ऐसा करियेगा मत वरना सजाए मौत है आपके लिये ध्यान रखिएगा)।
कौन किसके कंधे पर बंदूक चला रहा है इसमें शिवसेना या मनसे जैसे मौकापरस्त और नीच संगठनों को बीच में लाकर आप क्या सिद्ध करना चाह रहे हैं आपकी मंशा तो मुद्दा भटकाने की प्रतीत हो रही है। आप ही बताएं कि आपके संगठन की विचारधारा या मेनिफ़ेस्टो क्या है क्या आप भी रणधीर सिंह सुमन के लोकसंघर्ष की तरह राजनेता बनने की जमीन तलाशने में संघर्ष कर रहे हैं?गोलमोल उत्तरों की बजाए साफ़ लिखिये रणधीर सिंह की वकालत भी करें तो उनकी तरफ से उत्तर लेकर आप लिख दें ताकि मैं मान लूं कि रणधीर सिंह सुमन का साम्यवाद क्या है?क्या आप भी मुझे कुछ किताबें पढ़ने की सलाह देंगे?स्वागत है यदि आप कुछ नयी किताबें बता सकें। अगला पत्र भड़ास के संचालकों आदरणीय श्री रजनीश के.झा एवं आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव जी के नाम लिखने वाला हुं।
जय भड़ास
संजय कटारनवरे
मुंबई

2 टिप्पणियाँ:

अजय मोहन ने कहा…

मुझे शोले फ़िल्म का ए.के.हंगल याद आ गया,
अरे इतना सन्नाटा क्यों है भाई?
किसके तरफ़ से उत्तर आता है इसने तो गुफ़रान भाई और सुमन जी को एक साथ लपेटा है। चलो भाई अपना अपना मेनिफ़ेस्टो बताओ इन्हें फ़िर ये उसमें से मीनमेख निकालेंगे लेकिन पहले बताइये तो:)
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बहुत संभव है कि इन सबकी विचार धारा भड़ास के दर्शन से सहमत हो अन्यथा ये लोग इस मंच पर नहीं होते। संजय आपने मेरे नाम से जो कुछ भी लिखा हो कम से कम ऐसा तो नहीं होगा कि मुझे मुसलमानों को सपोर्ट करने के लिए अपराधी दाउद इब्राहिम से पैसा आता है:)
चलिये आपकी बंदूक सुमन जी और गुफ़रान भाई से हट कर हमारी तरफ़ तो आयी। आप बेफ़िक्र रहिये ये लोग आपके सवालों पर भले चुप हों लेकिन हम आपकी हर बात का यथासंभव उत्तर देंगें लेकिन उत्तर तर्कसंगत,बौद्धिक होगा इस बात की कोई गारंटी नहीं दी जाएगी।
जय जय भड़ास

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