गैर सरकारी संगठनों के हेतु व उद्देश्य के सवाल पर बवाल

शनिवार, 21 अगस्त 2010

पिछले कुछ दिनों से भड़ास पर बड़ी चुप्पी सी दिख रही थी। सभी लगभग अपनी अपनी व्यस्तताओं में उलझे रहे जबकि शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी गरीबों को अनाज मुफ़्त वितरण से इन्कार करके सुप्रीम कोर्ट को जूता दिखा दिया लेकिन भड़ासी चुप हैं क्यों????? अरे कारण है रोटी, परिवार, बीमारियाँ..... लेकिन जब देखा तो हमारे भाईसाहब डॉ.रूपेश श्रीवास्तव के दूसरी वेबसाइट जो कि अपने को मीडिया क्लब कहती है वहाँ भड़ास-भड़ास खेल रहे हैं। जब कई दिनों तक एक ही समाचार पत्र के कई आर.एन.आई. नंबर वाली बात पर कुछ नहीं हुआ तो भाईसाहब पहुंच गये मीडिया क्लब की साइट पर और उस पर सदस्यता लेकर जो सबकी अम्मा के दूध को ललकारा तो एक गैर सरकारी संगठन चलाने वाला बंदा और एक स्वयंभू पत्रकार इस मसले पर बिना गहराई समझे टिप्पणीकारों की फ़ितरत से मुंह मारने आ गये और जब भाईसाहब ने उन्हें रगेदा है तो पत्रकार महोदय तो राजनैतिक चुप्पी साध गये और एन.जी.ओ. वाला बंदा अभी भी कोशिश कर रहा है कि खुद की औकात को बड़ा सिद्ध कर सके। उसे पता ही नहीं है कि भड़ासी तो घोषित तुच्छ,क्षुद्र,गंवार,जाहिल और चिरकुट हैं उन्हें बड़ा बनने की लालसा कभी रही ही नहीं और न ही अंदर के घिनौने बदबूदार चेहरे पर शराफ़त का इत्र लगा कर शरीफ़ बने मुखौटाधारी पसंद आए हैं तो शरीफ़ कहलाने की सदिच्छा से भी मुक्त हैं हम भड़ासी, हमें हमारा बुरा होना ही सम्मान प्रतीत हुआ है।
ये एन.जी.ओ. चलाने वाला बंदा बाल ठाकरे को भाईसाहब द्वारा "तू" लिखने पर आहत है और किसी भी तरह इस प्रयास में जुटा है कि किसी तरह अपने कामों को पत्रकारों को तेलमालिश करके या पुलिस वालों से गलबहियाँ करके समाचार पत्रों में दिखने लगे और तीन साल पूरे कर सके ताकि सरकार से कटोरा लेकर भीख के लिये पात्रता हासिल कर सके। इस नहीं पता कि जरूरतमंदों की सहायता किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन या पहचान की मोहताज नहीं होती। भिखारी अपनी पहचान बनाने के लिये किसी तरह तीन साल पूरे होने की प्रतीक्षा कर रहा है ताकि सरकारी हरामी जो बार बार खुद को ही रेवड़ी बाँटते हैं उनमें कतार में लग कर रेवडियों में हिस्सेदारी कर सके।
क्यों बनते हैं गैर सरकारी संगठन??? क्यों ये लोग सरकार की मदद करने पर आमादा रहते हैं क्यों नहीं ये सरकारी एजेन्सियों को ही उन्हें काम करने के धंधे पर लगाने की कवायद करते। क्यों बिना रजिस्ट्रेशन ये अनाज और कपड़ा इकट्ठा नहीं कर पाते????? क्योंकि इनका उद्देश्य है लूटतंत्र में भागीदारी करना.......
जय जय भड़ास

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

दीदी ये एन.जी.ओ. चलाने वाले चाहते हैं कि सरकार अपाहिज बनी रहे ताकि उनकी दालरोटी चलती रहे। आपने सही लिखा....
जय जय भड़ास

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