भड़ास पर प्रतिबंध लगा देने से विचार नहीं मरेंगे ये बात मीडिया क्लब और बाल ठाकरे के कथित समर्थक जान लें

सोमवार, 6 सितंबर 2010

भड़ास पर प्रतिबंध लगा देना कोई नयी बात नहीं है हमें इस तरह के प्रतिबंधों का खासा अनुभव है। हम वो गरीब मजदूर हैं जो कि तुम्हारी फैक्ट्रियों में पसीना बहा रहे हैं, भिवंडी की कपड़ा मिलों में हमारी चमड़ी का रंग गहरा हो चुका है, हम वो किसान हैं जो अपने खेत की मेड़ पर बैठ कर लाखों टन अनाज के सड़ जाने पर आँख में आँसू भर कर कृषि मंत्री को बीड़ी पीते हुए बेहिसाब गालियाँ देते हैं , बौद्धिक लोगों की नजर में ये अपराध है लेकिन सुप्रीम कोर्ट फटकारे तो सही है हम गाली दें तो अपराध है..... ये है तुम्हारा कानून, मनमाना कानून; जरा एक पौधा लगा कर देखो कि उसे कोई कुचल दे तो दिल पर क्या बीतती है? शिक्षा, चिकित्सा, बैंकिंग आदि के क्षेत्र में तुम जैसे मुखौटाधारियों ने कभी जाति कभी धर्म और कभी क्षेत्र के नाम पर कब्जा करा है और हमें रखा वहीं का वहीं हाशिये से भी धकेला हुआ। हमें कभी आतंकवादी कह कर मार दो, कभी उग्रवादी कह कर प्रतिबंधित कर दो सब तुम्हारे हाथ में है।
मीडिया क्लब नाम की साइट पर भड़ासी इस लिये प्रतिबंधित कर दिये गये हैं क्योंकि उन्हें लोकतंत्र की बातें सुहाती ही नहीं है। इनकी सोच यशवंत सिंह जैसी ही है कि जो विरोध में बोले उसे प्रतिबंधित कर दो, हटा दो, मुंह सिल दो ताकि विरोध न सुनाई दे लेकिन क्या इन लोगों के रोकने से भड़ास की वैचारिकता रुकी है जो रुकेगी। हम तुम्हारे पाखंड के खिलाफ़ लिखते और भौंकते रहेंगे।
रही बात मुंबईकर नाम से टिप्पणी करने वाले प्राणी की तो उससे इतना कहना है कि बाल ठाकरे ही क्या किसी का भी अंधभक्त बन कर ही तुम लोगों ने अपने राज्य का सत्यानाश करा है जैसे कि अन्य राज्यों के महामूर्खों ने करा है। बाल ठाकरे पर चर्चा करना है तो खुल कर सामने आओ हम पर प्रतिबंध लगा देने की बात से क्या हमारे विचार को भी प्रतिबंधित कर पाओगे जो कि लाखों लोगों के दिल की आवाज़ बन चुका है। तुम जैसे लोग सोचते हो कि किसी को मारपीट कर उसको सच बोलने से रोक लोगे तो तुम उसे मार सकते हो जान से लेकिन रोक नहीं सकते ये सिद्धाँत भी इसी देश में जन्मा है। भड़ास पर विचार विमर्श के सारे मार्ग खुले हैं आप सामने आकर बात करिये यदि साहस है तो वरना पर्दे के पीछे से दहाड़ने से कुछ नहीं होगा कहीं ऐसा न हो कि जब भड़ासी पर्दा हटा दें तो उसके पीछे से एक मरियल खुजली वाला कुत्ता दुम दबाए मिले जो मेगाफोन लेकर दहाड़ने का नाटक कर रहा था।
जय जय भड़ास

3 टिप्पणियाँ:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

जय गुरुदेव,
किन चूतियम सल्फेट की बदौलत भड़ास चलती है की सुसरे प्रर्तिबंध लगायें ;-)
भड़ास की लौ बदसी से है इन चूतियों के आड़े से नहीं.
इस लौ को कोई कम करदे इतनी औकात और हिम्मत अभी हुई नहीं है.

जय जय भड़ास

Manish maurya ने कहा…

ham band nahi hone dengeeee ....

Manish maurya ने कहा…

ham band nahi hone dengee ,,,
jai jai bhadas ..

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