ब्लॉग संसद के महक! तुम्हारी हरकतों की महक दुर्गंध जैसी लगी.......

शुक्रवार, 10 सितंबर 2010

ब्लॉग संसद नाम के हिंदी पत्रा पर लिखी एक पोस्ट में ब्लॉग संसद के मॉडरेटर महक नामक महाशय ने एक पोस्ट लिखी कि "कमाल है!! ब्लॉग जगत में भी महारथी दुष्टों के द्वारा द्रोपदी के अपमान को चुपचाप देखते रहते हैं"
इस पोस्ट के ऊपर उन बहन ने टिप्पणी में लिखा कि उन्होंने महक को मना करा था ये पोस्ट लिखने के बारे में उसके बाद भी इन महानुभाव ने पोस्ट लिखी और क्योंकि ये पहले से ही उन बहन को पूरी तरह से बुरा मानने का दुराग्रह लिए थे । ये उस बहन को "पाँच पतियों वाली" द्रोपदी लिख रहे हैं; इसे बौद्धिक धूर्तता नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे क्या इस बात को सीधे शब्दों में किसी और तरीके से नहीं लिखा जा सकता था क्या द्रोपदी लिखना इनके कुटिल दुराग्रह को नहीं दिखाता? किसी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जब ढेर सारी टिप्पणियाँ आ गयी तो संसद के इस धूर्त ने अपने चमचों के साथ जुड़ कर अपनी तानाशाही दिखा दी। पहले उस बहन को उकसाया कि वो नाराज और दुःखी होकर कुछ ऐसा लिख दें जो उन पर आरोप लगाने के लिये काफ़ी हो कि वे बहुत बुरी हैं। बहन बेचारी भोली है इन मक्कारों की साजिश समझ न पायी और उनकी चाल में आ गयी। महक ने जो भी करा है वह यशवंत सिंह आदि जैसे लोगों की कतार में खड़े होने की पात्रता रखता है। इसका नाम ही महक रख छोड़ा है लेकिन व्यक्तित्त्व तो दुर्गंध पैदा कर रहा है फिर भी भलमनसाहत के परफ़्यूम से नहा नहा कर उस बदबू को कम करने का नाकामयाब प्रयास कर रहा है।
ब्लॉग संसद से लोग इसकी इस बदबू के चलते खुद ही नाक दबा कर हट रहे हैं जिसमें सबसे पहले श्री दर्शन लाल बवेजा और इसी तरह कई लोग खुद इस दुर्गंध से त्रस्त होकर हट रहे हैं। ये बदबूदार प्राणी अपनी तानाशाही दिखा कर कमेंट्स डिलीट कर सकता है विचार तो नहीं मार सकता। अरे बदबू ! तू ये नहीं जानता क्या कि संसद से बाहर भी दुनिया है जहाँ गलियाँ हैं, सड़कें है, झोपडपट्टियाँ हैं, खेत हैं, मिलें और फ़ैक्ट्रियाँ हैं, पान की दुकानें हैं जिधर हम जैसे बुरे दबे कुचले लेकिन जले भुने भन्नाए हुए भड़ासी मौजूद हैं जो तुम्हारे शराफ़त के मुखौटे पर लगे परफ़्यूम के नीचे से आती दुर्गंध को पहचानते हैं और उसे हटाने के लिये भड़ास दर्शन के प्रति बद्ध हैं क्योंकि ये किसी मजदूर के पसीने की गंध नहीं है ये कमीनेपन की बदबू है जिस पर हम उल्टियाँ कर कर के थोड़ा-थोड़ा कम कर पाएंगे।
जय जय भड़ास

11 टिप्पणियाँ:

अन्तर सोहिल ने कहा…

इनके एक ब्लॉग राष्ट्रवाद की एक पोस्ट पर मैनें इन्हें चेताया था कि ट्रेन के आरक्षित डिब्बे में सफर करना अपराध की श्रेणी में आता है, तो इन्होंनें मेरी वह टिप्पणी भी डिलीट कर दी थी।

प्रणाम स्वीकार करें

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

दीदी ये महक हों या कोई और इस जैसे लोग जो ये सोचते हैं कि ब्लॉग पर लिख कर ये शरीफ़ बन जाएंगे तो इनकी बुद्धि की जड़ता है। आपने जो लिखा है पूरी तरह सत्य है इस आदमी में साहस नहीं है कि आकर विचार विमर्श करे इसे तो ब्लॉगिंग करनी है जिसमें इन जैसे लोगों की अधिकतम टिप्पणियाँ आ सकें ये इसी में खुश रहते हैं। भड़ास की तरफ मुँह करने में भी इनकी पतलून खराब हो सकती है। इन्हें शरीफ़ कहलवाने का लालच है भड़ासियों को नहीं हम बुरे हैं और जिसे प्रेम करते हैं बिना शर्त करते हैं उसमें बुराई और अच्छाई नहीं देखते, प्रेम के इस रंग को ये सिर्फ़ भूरा रंग देखने वाले क्या समझेंगे
जय जय भड़ास

شمس शम्स Shams ने कहा…

दीदी ये आदमी एक नंबर का चिरकुट निकला हम इससे क्यों ये उम्मीद करें कि ये भड़ासियों की तरह दमदार होगा जो खुलेआम गालियाँ लिखी टिप्पणियों को प्रकाशित कर देते है।
@अंतर सोहिल जी आपकी टिप्पणी हटा कर इस बदबूदार प्राणी ने बता दिया कि ये स्वयं आपराधिक प्रवृत्ति का समर्थक है और खुद भी अपराधी है भले ही कानूनन हम इसे अपराधी न सिद्ध कर पाएं लेकिन नैतिक तौर पर ऐसे ही लोग अपराधों का पोषण करते हैं और समाज में सफ़ेदपोश बने बैठे रहते हैं।
जय जय भड़ास

ZEAL ने कहा…

..
मनीषा दीदी,
नमस्ते ।

आपने बहुत सही लिखा है। यह बदबू ही है। इसने खुद को लोकप्रिय बनाने के लिए मेरा नाम इस्तेमाल किया और और अपनी पोस्ट पर आये कमेंट्स की केवल संख्या देखी। मुझे मिलने वाली बदनामी से इसे कोई सरोकार नहीं था। इसकी धूर्तता देखकर , मैंने इससे पूछा , moderation क्यूँ नहीं लगाया, महफूज़ जैसे आवारा गली के कुत्ते भूंक रहे हैं और आपको कोई फरक नहीं पड़ता ? तो फिर भी इसने नहीं सुना। साफ़ कह दिया की मोडरेशन नहीं लगेगा। क्यूंकि इसकी पोस्ट पर गन्दी टिप्पणियों की बारिश जो बंद हो जाती।

फिर मैंने सोचा इस लातों के गधे को ठीक कैसे किया जाए ?...तो इसे " बास्टर्ड " कहा। तब जाकर इस खुशबूदार बदबू को समझ आया की मोडरेशन न होने से कितनी गालियाँ मिलती हैं। उसके बाद इस बेचारे ने टिप्पणियां डिलीट करनी शुरू कर दीं। इसने -

डॉ अमर ,
डॉ रुपेश ,
आशीष,
अर्थ देसाई
और मेरी टिप्पणियां डिलीट कर दी,

इसने ये पोस्ट अरविन्द मिश्र [ जिन्होंने इसे गधा कहा था ] से खुंदक निकालने के लिए , मेरे मना करने के बावजूद जबरदस्ती लगाई थी।

महक कभी किसी का भाई नहीं हो सकता, ये तो सरे-आम बहेन की इज्ज़त नीलाम करता है।

मनीषा दीदी , मेरा प्रणाम स्वीकार कीजिये।

आपकी दिव्या।
..

ZEAL ने कहा…

मनीषा दीदी,
नमस्ते ।

आपने बहुत सही लिखा है। यह बदबू ही है। इसने खुद को लोकप्रिय बनाने के लिए मेरा नाम इस्तेमाल किया और और अपनी पोस्ट पर आये कमेंट्स की केवल संख्या देखी। मुझे मिलने वाली बदनामी से इसे कोई सरोकार नहीं था। इसकी धूर्तता देखकर , मैंने इससे पूछा , moderation क्यूँ नहीं लगाया, महफूज़ जैसे आवारा गली के कुत्ते भूंक रहे हैं और आपको कोई फरक नहीं पड़ता ? तो फिर भी इसने नहीं सुना। साफ़ कह दिया की मोडरेशन नहीं लगेगा। क्यूंकि इसकी पोस्ट पर गन्दी टिप्पणियों की बारिश जो बंद हो जाती।

Continued....

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ZEAL ने कहा…

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Continued....

फिर मैंने सोचा इस लातों के गधे को ठीक कैसे किया जाए ?...तो इसे " बास्टर्ड " कहा। तब जाकर इस खुशबूदार बदबू को समझ आया की मोडरेशन न होने से कितनी गालियाँ मिलती हैं। उसके बाद इस बेचारे ने टिप्पणियां डिलीट करनी शुरू कर दीं। इसने -

डॉ अमर ,
डॉ रुपेश ,
आशीष,
अर्थ देसाई
और मेरी टिप्पणियां डिलीट कर दी,

इसने ये पोस्ट अरविन्द मिश्र [ जिन्होंने इसे गधा कहा था ] से खुंदक निकालने के लिए , मेरे मना करने के बावजूद जबरदस्ती लगाई थी।

महक कभी किसी का भाई नहीं हो सकता, ये तो सरे-आम बहेन की इज्ज़त नीलाम करता है।

मनीषा दीदी , मेरा प्रणाम स्वीकार कीजिये।

आपकी दिव्या।

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मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

मनीषा दीदी ने जो लिखा है उसके बारे में महक खूब महके,चहके,बहके और जब मैं डॉ.रूपेश के घर एक प्रोड्यूसर अजीत जी के साथ पहुंची तो ये महाशय फोन पर ही सफ़ाई दिये पड़े थे। भड़ासी डॉ.साहब की विचित्र आदत से परिचित है कि वे अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन करके बात करते हैं क्योंकि यदि हम सबके बीच मे भी इस तरह की बातों की गोपनीयता हो तो फिर भड़ास के दर्शन की सार्थकता क्या??? दिव्या बहन जी आपने देखा कि मनीषा दीदी ने जो लिखा है प्रमाणों के साथ लिखा है। हम आपको प्रेम करते हैं भले आपमें लाख बुराइयाँ हों हम आपको स्वीकार लेंगे और फिर आप हमारे साथ हमारे जैसी ही बन जाएंगी। आपने इन महाशय को बास्टर्ड कह कर भड़ास ही निकाली क्योंकि आप जानती थीं कि और कोई मार्ग नहीं है। जुड़ी रहिए उगलती रहिये ताकि निर्मल बनी रहें...
जय जय भड़ास

ZEAL ने कहा…

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मुनव्वर सुल्ताना दीदी

नमस्ते !

मुझे बहुत ख़ुशी है , आपने मुझे मेरी अच्छाइयों और बुराइयों सहित स्वीकार किया। हजारों मील दूर हूँ आपसे लेकिन आपके शब्दों में अपनेपन के एहसास को महसूस कर रही हूँ। इश्वर ने चाह तो आपसे जरूर मिलूंगी।

आपको बहुत सारे प्यार एवं सितम्बर माह के के सभी सुन्दर पर्वों -
ईद एवं गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें।

आपकी दिव्या

...

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

वाह क्या खूब भड़ास दर्शन है,
वैसे हमारी मनीषा दीदी पर ऊँगली उठाने से पहले चेत जाओ बच्चे क्यूंकि दीदी से शास्त्रार्थ कर सके तो ही इस तरह के उल जुलूल बातें लिखे और दीदी से पराजित होने की कल्पना कर खुद अपनी स्थिति भी ज्ञात कर ले.
जय जय भड़ास

upasanaa ने कहा…

क्या घटिया बाते हो रही है????? आखिर जिसने जो कहा वो अपनी बात पर अड़े तो...यहाँ तो सब एक नंबर के धूर्त दिखाई दे रहे है..कोई किसी क ऊपर बोल रहा है तो कोई किसी के ऊपर..मुझे पता है यह टिप्पणी नहीं प्रकाशित होगी.लेकिन फिर भी बता रही हू कि यह मंच पूरी तरह से बेहूदा और सिर्फ अपने दुस्मनो से दुश्मनी निकलने के लिए है...

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

@upasanaa
मुझे एक बात पता है कि तुम एक फ़र्जी आई.डी.से अधिक कुछ नहीं हो इसलिये ये निर्णय कर पाना कठिन है कि तुम्हें गधा कहूं या गधी?? मंच बेहूदा है,दुश्मनों से दुश्मनी निकालने के लिये है,कमेंट प्रकाशित नहीं होगा.....जब इतना सब तुम्हें पता है तो इधर क्या करने आयी हो??? बस इतना ही वरना हम भड़ासी तो बेहूदे और बुरे लोग हैं ये भी लिख सकते हैं कि क्या इधर मराने आयी हो लेकिन ऐसा नहीं लिखा। यदि आगे भी तुम्हारा ये बिना पहचान का हमसे खेल खेला न तो तुम्हारी जात और औकात दोनो इसी मंच पर शोध का विषय बनेगी
जय जय भड़ास

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