यसवंत ने अपने साईट की टी आर पी के लिए भाषागत सीमा तोड़ी,.

मंगलवार, 5 अक्तूबर 2010



क्या व्यवसायिक होने के बाद राष्ट्र के लिए हम इतने संवेदनहीन हो जाते हैं ?
अयोध्या एक एक सुनहरा अतीत है हिन्दुस्तान का मगर छ: दिसंबर काला अध्याय. सुनहरा अतीत या काला अध्याय सब इतिहास में दफ़न है, आज का हिन्दुस्तान अपने इतिहास के बूते नहीं अपितु अपने एकता और सौहार्द के बूते आगे बढ़ रहा है और कामनवेल्थ खेल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि राष्ट्र के लिए हम कैसे एक हो जाते हैं.
यसवंत का डूबता वेब साईट का खिसियानापन इस कदर कि जिसे राष्ट्र ने तवज्जो नहीं दी, मीडिया के चिल्ल पों करने के बावजूद मामला दफ़न हो गया उस मुद्दे पर गैर जिम्मेदारी बयान की सारी हदें तोड़ते हुए जो लिख वो नितांत शर्मनाक है.
क्या अपने व्यवसाय के लिए हमारे देश के बनिए कुछ भी कर सकते हैं ??

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

घोड़े की लीद को धनिया कह कर बेचने वाला बनिया खुद लिख रहा है कि बदले दौर में उस संपादक ने सोच-विचार दुरुस्त किए हैं लेकिन जो गलती उस संपादक ने करी थी उसे इसने अपनी दुकान चलाने के लिये दोहरा कर अपनी सही औकात बता दी है।
धिक्कार है ऐसे समाचार वणिकों की ऐसी प्रवृत्ति पर...
जय जय भड़ास

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