भड़ास के माडरेटर भाई रजनीश झा किधर चले गये?????

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

बिलावजह अब तक एक भ्रम बना हुआ था कि चाहे कुछ भी हो भड़ास पर जीवंतता बनी रहेगी भले ही उतार - चढ़ाव आते रहें। डा।रूपेश श्रीवास्तव जी की माता जी के निधन के बाद जो चर्चा उठी है उसमें मुंबई के ही भयंकर भड़ासी जैसे मनीषा दीदी, भाई अजय मोहन, बहन फ़रहीन, बहन जैनब, भाई हरभूषण आदि तो नदारद हैं ही साथ में भाई रजनीश झा भी गायब हैं। कहीं ऐसा तो नहीं किसी ने उन पर भी निम्बू फिरा दिया कि भड़ास से उनका उच्चाटन हो गया हो? वैसे देख रहा हूं कि हमारे जैसे लोग तो यदा कदा ही मुंह मारते हैं लेकिन जो लोग अक्सर नेट पर डटे रहते हैं वे भी भड़ास पर अब उकता कर नहीं ही आना पसंद करते शायद क्योंकि जिस कदर वकील साहब रणधीर सिंह सुमन जी को संजय कटारनवरे ने दौड़ाया फिर उसके बाद उन्होंने गुफ़रान सिद्दीकी को भी रगेदा तो लोग आने से बचते हैं चुपचाप झांक कर पतली गली पकड़ लेते हैं लेकिन भाई रजनीश झा को क्या हो गया यारों????????????
जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

अन्तर सोहिल ने कहा…

ऐसा नहीं हैं जी
सभी कहीं ना कहीं व्यस्त होंगे
्जल्द आयेंगे फिर किसी की नकाब नोचने

प्रणाम

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

भाई अन्तर सोहिल जी ने सही फरमाया है दर असल हमारे लिये यही हमारी दुनिया और यही हमारा दीन है तो हम जैसे लोग किधर जाएंगे? भाई हो सकता है कि रजनीश जी इस समय ऐसे इलाके में भड़ास-भड़ास खेल रहे हों कि उधर इन्टरनेट जैसी उपलब्धि हो ही न...
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

किसी ने उन पर भी निम्बू फिरा दिया
वाह जी वाह , शायद मिर्ची भी टांग दी होगी ..............

अनोप मंडल ने कहा…

अमित जैन तुम सच कहते हो क्योंकि ये निम्बू मिर्ची का जादू तुम लोग बखूबी जानते हो। देखिये कितनी विचित्र बात है कि सर रजनीश झा जी सचमुच इतने दिनों से भड़ास पर नहीं हैं जबकि वे अपने निजी ब्लॉगों पर बराबर लिख रहे हैं। ये मन का उच्चाटन कर देने का जादू नहिं तो और क्या है??
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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