संजय क्टेहुए आप अपने तने हुए (विचारों ) को अपनी फटी हुई (मनोदशा ) में आराम से डाले ,और इस डालन पर्क्रिया का कार्टून हम बना देगे

सोमवार, 2 मई 2011

10 टिप्पणियाँ:

मोहम्मद उमर रफ़ाई ने कहा…

कुछ तो जरूर बात है कि कुमारी शालू जैन ने दीनबंधु को तो कोस दिया था लेकिन संजय कटारनवरे से सामने खड़े होने के लिये अमित बाबू आप ही खड़े हैं? जैन समाज और हिंदू समाज से संबंधित जो अखबार की खबर का चित्र लगा है उसपर कोई कार्टून नहीं बनाओगे??

kumari shalu jain ने कहा…

@ mohamad umar rafai
हिंदू समाज से संबंधित जो अखबार की खबर का चित्र लगा है उसपर कोई कार्टून नहीं बनाओगे??

denmark me bane tumhare paigamber par bane kartoon ke bare me tumhare kya vichar hai janab mohamad
aap to dharm ka dhandha karte hai na , essa maine isi blog par padha tha , or aap hindu dharm ka cartoon banvana chahte ho ,
thu hai tum par , or ye comment kab parkashit hoga , is baat ko is blog ke modretors se pata kar lena

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अनोप मंडल ने कहा…

जनाब रफ़ाई साहब, नीचे दिये चित्र पर अमित जैन क्या किसी जैन का मुंह नहीं खुलेगा कि ये लोग हिंदू संगठनों में क्या करते रहते हैं। शालू जैन या ऐसे ही कल्पित नामो से ये अपनी कुटिलता दिखाता रहता है। अभी भी बेशर्म की तरह डा.साहब की बातों पर आगे न आकर जोकरगिरी ही करके भ्रमित करने की कोशिश में लगा है।
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

पहली बात तो यहाँ आती है की सिर्फ जैन मंदिरों को ही shops and establishment act के अन्दर क्यों लिया गया , इस में मुंबई महानगर पालिका और श्रमिकआयुक्तलय की किसी गडबड झाले की पूरी आशंका है , क्या कभी किसी मस्जिद को उनकी आय बताने के लिए कहा गया है ?
सिर्फ जैन मंदिर को ही क्यों ?
मोहमद उम्र रफ़ाई साहब आप तो धर्म का ही धंधा करते है , आप के dhande की आय के बारे में क्यों नहीं नगर पालिका सामान जारी करतीआप हिंदू धर्म पर कार्त्तों न बनवा अपने धर्म का कार्टून क्यों नही बनवा लेते जनाब
उस कार्टून के बनते ही आप लोगो के पिछवाड़े में वो आग लगती है की सारी दुनिया जला देना चाहते हो ((कुछ याद आया )
ये तुम्हारी कुटिलता है की अपने कुत्सित इरादों को अनूप बण्डल जैसे लोगो के पीछे खड़े हो कर
पुरे करते है है ,

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

बहन मुनवर सुल्ताना आप अपने विचार लिख कर मिटा क्यों देती है , आपको अपने भाई के बारे में को विचार है उन्हें बताने का पूरा हक है , विचार जों भी हो आप जरुर लिखिए

अजय मोहन ने कहा…

अमित भाई आपकी कार्टून बनाने की लगन से तमाम लोगों को अगन लगती है ये मजेदार बात है। एक बात कि मुनव्वर आपा अपने विचार लिख कर मिटा देती हैं ये भी एक तरह की प्रतिक्रिया ही है कि जाओ नहीं बोलती :)
जनाब रफ़ाई साहब को आप नहीं लेकिन मैं निजी तौर पर जानता हूं अक्सर मस्जिदों के बाहर मौलानाओं को डंडा करते मिल जाते हैं, ये हजरत उस तरह के धर्म का धंधा नहीं करते जो एक कार्टून से चौपट हो जाए। जवानी के दिनों में इन जनाब चेम्बूर में आर.के.स्टूडियो के पास भाई-भाई नगर नाम से एक बस्ती ही बसा डाली थी जो कि अभी तक है हाजी मस्तान के साथ काम करा करते थे फिर गुनाहों से तौबा करके "धर्म" के धंधे में आकर क्या कर रहे हैं आप तो देख रहे हैं:)
ये शालू जैन नाम की लौंडिया तो थूका थाकी कर रही है इसे पता नहीं है कि भड़ास उल्टी करने की जगह है थूकने की नहीं अगर उल्टी आ रही है तो ब्वाक-ब्वाक कर डाले,ये भी बेचारी सोचती है कि किसी कार्टून से जनाब रफ़ाई साहब की सेहत पर फ़र्क पड़ेगा तो ये निपट मूर्खा है। शालू जैन के नाम से अब कौन भड़ासी कमेंट कर रहा है ये कौन पता करेगा???
जय जय भड़ास

sanjay ने कहा…

अमित जैन एक बात बताना कि जब (कुमारी)शालू जैन के नाम से तुम क्यों इस्लामिक कट्टरपंथ को उकसाने की कोशिश कर रहे हो? भड़ासी इस बात को जानते हैं कि तुम अपना राक्षसपन छिपाने के लिये विषय बदलना चाहते हो।
जय जय भड़ास
संजय कटारनवरे
मुंबई

sanjay ने कहा…

अजय जी शालू जैन नाम की लौंडिया की तरफ़ से कौन कमेंट कर रहा है ये तो अनूप मंडल ने बता ही दिया है लेकिन अमित जैन अपनी कुटिलता के चलते बाज नहीं आ रहे।
जय जय भड़ास
संजय कटारनवरे
मुंबई

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

श्रीमान खुजलाये हुए ,खिजयाए हुए , टांगउठाऊ मूत्र विसर्जनकर्ता संजय जी जनाब ,
जब आप के पास कोई ठोश सबूत इस बात का हो की मैंने कोई कुटिलता की है तो आप अपना मूत्र विसर्जन कार्य अपनी टाग उठा कर भडास के मंच पर मेरी टांगपर करने की चेष्टा कर सकते है , वर्ना पिछवाड़े पर डंडा पड़ेगा तो इसी तरह किकयाते घूमते रहोगे ....:)

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