प्रवीण शाह जी और संजय कटारनवरे जी को भड़ास की सीधी सदस्यता

मंगलवार, 3 मई 2011

मैं पिछले कुछ दिनों से आप सबकी सक्रियता को देख रहा हूं । पाता हूं कि कई बार आप लोगों के लिखे हुए आलेख और टिप्पणी माडरेशन के कारण कुछ समय रुक जाते हैं। जो कि आपकी झल्लाहट का सबब बन जाता है। संजय कटारनवरे जी के छिपे हुए व्यक्तित्त्व से काफ़ी परिचित हैं कि ये सज्जन(?) किसी के भी पीछे तोप लेकर पड़ जाते हैं जैसे कि आजकल अमित जैन से जूझे पड़े हैं इससे पहले डा।दिव्या श्रीवास्तव को खदेड़े पड़े थे। इन्होंने सीधी सदस्यता की मांग भी करी है, प्रवीण शाह जी के पास समय नहीं रहता ऐसा वे शिकायत न करें इसलिये उन्हें भी भड़ास की लेखकीय सदस्यता दे रहा हूं स्वीकार लीजिये ताकि विलंब की शिकायत दूर हो जाए।
वैसे मैं कोई आशा नहीं पालता लेकिन फिर भी उम्मीद है कि कुमारी शालू जैन किस्म के कमेंट के स्थान पर कमेंट अपने नाम से ही आएंगे और अगर शालू या चालू के नाम से कमेंट आए भी तो भड़ास का क्या बिगड़ने वाला है। कोई शर्त नहीं है अब ये आपका मंच है जितना चाहे विचार वमन करिये लेकिन कोशिश ये करें कि जुलाब हो रहा हो तो दूसरी जगह जाएं लेकिन यदि कमजोरी के कारण न जा सकेंतो इधर भी छिछ्छी कर सकते हैं हम बाद में साफ कर लेंगे। भड़ास का उगालदान साफ कर कर के अब आदत हो गयी है उल्टी-टट्टी साफ़ कर देने की, अब घिन नहीं आती।
यदि आप लोग चाहें तो अपने फोन नंबर मुझे दे दीजिये और न दें तो भी कोई शिकायत नहीं रहेगी ई-मेल आईडी तो है ही भले ही फ़र्ज़ी हो या असली:)
हम बीमारी की तरफ इंगित नहीं करते साथ में इलाज भी बताते हैं
सप्रेम
जय जय भड़ास

6 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रवीण शाह जी आप अपना ई-मेल आई डी दे दीजिये ताकि सदस्यता की कड़ी आपको प्रेषित कर दी जाए फ़िर जी भर कर अतार्किक बातों का विरोध करिये और इंतजार न करना पड़ेगा कि माडरेटर प्रकाशित करेंगे या नहीं।
जय जय भड़ास

sanjay ने कहा…

हार्दिक आभार
जय जय भड़ास बारंबार
अब देखो मेरी धार
कैसे चलती है कटार

प्रवीण शाह ने कहा…

.
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.
आभार!

cpshah@indiatimes.com

कृपया सार्वजनिक प्रकाशन न करें ।


...

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

@अब देखो मेरी धार
कैसे चलती है कटार


विचारों का आदान प्रदान है ,
दोस्त कटार का क्या काम है ,
अगर खंजर मारना है ,
तो सीने पर मारना ,
पीठ पर उस का क्या काम है

मोहम्मद उमर रफ़ाई ने कहा…

अब बेचारे संजय कटारनवरे को अपना सरनेम बदलना पड़ेगा। "कटारनवरे" का अर्थ होता है कटार लिये हुए दूल्हा :)
हमें आपको वैचारिक कटार के इसी तरह चलते रहने की शुभेच्छा देते हैं खूब कटकटाओ कटार चलाओ...
जय जय भड़ास

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

भाई याद है न कि सौ से अधिक सदस्य नहीं हो सकते किसी भी सामुदायिक ब्लाग पर और क्या इन नये लोगों से आप परिचित हैं?
जय जय भड़ास

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