जज साहब अगर सोनी सोरी आपकी अपनी बेटी होती तो क्या उसके गुप्तांगों में पत्थर डालने वालों को भी आप पैंतालीस दिनों का समय देते?

सोमवार, 5 दिसंबर 2011


जज साहब अगर सोनी सोरी आपकी अपनी बेटी होती तो क्या उसके गुप्तांगों में पत्थर डालने वालों को भी आप पैंतालीस दिनों का समय देते? और क्या उससे ये पूछते कि आपने मेरी बेटी के गुप्तांगों में पत्थर क्यों डाले...

हिमांशु कुमार
माननीय न्यायाधीश महोदय,
सर्वोच्च न्यायालय,
नईदिल्ली
यह पत्र मैं आपको सोनी सोरी नाम की आदिवासी लड़की के सम्बन्ध में लिख रहा हूँ, जिसके गुप्तांगो में दंतेवाडा के एस.पी. ने पत्थर भर दिये थे और जिसका मुकदमा आपकी अदालत में चल रहा हैІ उस लड़की की मेडिकल जाँच आपके आदेश से कराई गई और डाक्टरों ने उस आदिवासी लड़की के आरोपों को सही पाया और डाक्टरी रिपोर्ट के साथ उस लड़की के गुप्तांगो से निकले हुए तीन पत्थर भी आपको भेज दिये І
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कल दिनांक 02-12-2011 को अपने वो पत्थर देखने के बाद भी उस आदिवासी लड़की को छत्तीसगढ़ के जेल में ही रखने का आदेश दिया और छत्तीसगढ़ सरकार को डेढ़ महीने का समय जवाब देने के लिए दिया हैІ
जज साहब मेरी दो बेटियाँ हैं अगर किसी ने मेरी बेटियों के साथ ये सब किया होता तो मैं ऐसा करने वाले को डेढ़ महीना तो क्या डेढ़ मिनट की भी मोहलत न देता! और जज साहब अगर यह लड़की आपकी अपनी बेटी होती तो क्या उसके गुप्तांगों में पत्थर डालने वालों को भी आप पैंतालीस दिनों का समय देते? और क्या उससे ये पूछते कि आपने मेरी बेटी के गुप्तांगों में पत्थर क्यों डाले? पैंतालीस दिन के बाद आकर बता देना और तब तक तुम मेरी बेटी को अपने घर में बंद कर के रख सकते हो !
पत्थर डालने वाले उस बदमाश एस. पी. को पता है कि उसकी रक्षा करने के लिये आप यहाँ सुप्रीमकोर्ट में बैठे हुए हैं इसलिए वह बेफिक्र होकर खुलेआम इस तरह की हरकत करता है और आपके कल के आदेश ने इस बात को और पुख्ता कर दिया है, कि इस तरह से हरकत करने वालों की रक्षा सुप्रीमकोर्ट लगातार उसी तरह करता रहेगा जिस प्रकार वो अंग्रेजों के समय से सरकारी पुलिस की रक्षा के लिए करता रहा हैІ
जज साहब ये अदालत उस आदिवासी लड़की की रक्षा के लिए बनायी गयी थी उस बदमाश एस.पी. के लिए नहीं І ये इस लोकतांत्रिक देश की सर्वोच्च न्यायालय है और इसका पहला काम देश के सबसे कमजोर लोगों की रक्षा सबसे पहले करने का है !आपको याद रखना पड़ेगा कि इस देश के सबसे कमजोर लोग महिलायें, आदिवासी, दलित, भूख से मरते हुए करोडों लोग हैं और इस अदालत को हर फैसला इन लोगों के हालत को बेहतर बनाने के लिए देना पड़ेगाІ लेकिन आजादी के बाद से इन सभी लोगों को आपकी तरफ से उपेक्षा और इनकी दुर्गति के लिए जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया गया हैІ
मेरे पिताजी इस देश के आजादी के लिए लड़े थेІ उन सभी आजादी के दीवानों के क्या सपने थे? उन लोगों ने कभी कल्पना भी की होगी कि आज़ादी मिलने के बाद एक दिन इस देश की सर्वोच्च न्यायालय एक आदिवासी बच्ची के बजाय उसपर अत्याचार करनेवाले को संरक्षण प्रदान करेगीІ
हमें बचपन से बताया गया इस देश में लोकतंत्र है.इसका मतलब है करोडों आदिवासियों, करोडों दलितों, करोडों भूखों का तंत्र І लेकिन आपके सारे फैसले इन करोडों लोगों को बदहाली में धकेलने वाले लोगों के पक्ष में होते हैं І आपको जगतसिंहपुर उडीसा में अपनी जमीन बचाने के लिए गर्म रेत पर लेटे हुए औरतें व बच्चे दिखाई नहीं देते? उनके लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता अभय साहू को जमीन छीनने वाले कंपनी मालिकों के आदेश पर सरकार द्वारा गिरफ्तारी आपको दिखाई नहीं देती?
आपकी अदालत में गोम्पाड गांव में सरकारी सुरक्षाबलों द्वारा तलवारों से काट डाले गये सोलह आदिवासियों का मुकदमा पिछले दो साल से घिसट रहा हैІ इस अदालत में उन आदिवासियों को लाते समय मुझे एक नक्सलवादी नेता ने चुनौती दी थी और कहा था कि इन आदिवासियों की हत्या करने वाले पुलिसवालों को अगर तुम सजा दिलवा दोगे तो मैं बंदूक छोड़ दूँगाІ
लेकिन मैं हार गयाІ इस अदालत में आने के सजा के तौर पर पुलिस ने उन आदिवासियों के परिवारों का अपहरण कर लिया और वे लोग आज भी पुलिस की अवैध हिरासत में हैं І आपने दोषियों को अब तक सजा न देकर इस देश की सरकार को नहीं जिताया, आपने मुझे चुनौती देने वाले उस नक्सलवादी को जीता दियाІ अब मैं किस मुंह से उस नक्सलवादी के सामने इस देश के महान लोकतंत्र और निष्पक्ष न्यायतंत्र की डींगे हांक सकता हूँ? और उसके बन्दूक उठाने को गलत ठहरा पाऊँगा ?
अगर इस देश में तानाशाही होती तो हमें संतोष होता, हम उस तानाशाही के खिलाफ लड़ रहे होते, परन्तु हमसे कहा गया कि देश में लोकतंत्र है ! परन्तु इस तंत्र की प्रत्येक संस्था, विधायिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका मिलकर करोडों लोगों के विरुद्ध और कुछ धनपशुओं के पक्ष में पूरी बेशर्मी के साथ कार्य कर रहे हैंІ इसे हम लोकतंत्र नहीं लोकतंत्र का ढोंग कहेंगे और अब हम लोकतन्त्र के नाम पर इस ढोंगतंत्र को एक दिन के लिए भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं І
आज मैं प्रण करता हूँ कि आज के बाद किसी गरीब का मुकदमा लेकर आपकी अदालत नहीं आऊंगाІ अब मैं जनता के बीच जाऊंगा और जनता को भड़काऊगा कि वह इस ढोंगतंत्र पर हमला करके इसे नष्ट कर दें ताकि सच्चे लोकतन्त्र की ईमारत खड़ी करने के लिए स्थान बनाया जा सकेІ
अगर आप इस लड़की को इसलिए न्याय नहीं दे पा रहे हैं कि उससे सरकार नाराज हो जाएगी और उससे आपकी तरक्की रुक जायेगी І तो ज़रा इतिहास पर नजर डालिए ! इतिहास गलत फैसला देने वाले न्यायाधीशों को कोई स्थान नहीं देता І सुकरात को सत्य बोलने के अपराध की सजा देने वाले न्यायाधीश का नाम कितने लोगों को याद है?
जीसस को चोरों के साथ सूली पर कीलों के साथ ठोक देने वाले जज को आज कौन जानता है? आपके इस अन्याय के बाद सोनी सोरी इतिहास में अमर हो जायेगी और इतिहास आपको अपनी किताब में आपका नाम लिखने के लिए एक छोटा सा कोना भी प्रदान नहीं करेगा І
हाँ अगर आप संविधान की सच्ची भावना के अनुरूप इस कमजोर, अकेली आदिवासी महिला को न्याय देते हैं तो सत्ताधीश भले ही आपको तरक्की न दें लेकिन आप अपनी नजरों में, अपनी परिवार के नजरों में और इस देश के नजरों में बहुत तरक्की पा जायेंगेІ
अगर आप इस पत्र को लिखने के बाद मुझे गिरफ्तार करते हैं तो मुझे गिरफ्तार होने का जरा भी दुःख नहीं होगा क्योंकि उसके बाद मैं कम से कम अपनी दोनों बेटियों से आँख मिलाकर बात तो कर पाउँगा,और कह पाउँगा कि मैं सोनी सोरी दीदी के साथ होनेवाले अत्याचारों के समय डर के कारण चुप नहीं रहा, और मैंने वही किया जो एक पिता को अपनी बेटी के अपमान के बाद करना चाहिए थाІ
वेबसाइट "जनज्वार" से साभार(आलेख के लिये लिंक देखिये)

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

भाई,आजकल हमारे देश में क्रान्तिक परिवर्तन हो रहे हैं लेकिन यदि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार या पक्षपात है और आप उसके खिलाफ़ आवाज़ उठाते हैं तो आप अपराधी हैं और आपके विरुद्ध देशद्रोह से लेकर न जाने कौन से ऐसे आरोप इस तंत्र द्वारा थोप दिये जाएंगे कि आप जीवन भर उनसे उबर नहीं पाएंगे।
दुःख, पीड़ा, आक्रोश सब तो उबल रहा है हमारे भीतर लेकिन अब तक ये नहीं निर्धारित हो पाया है कि हमारे कथित सभ्य समाज में जिस "विधि के शासन" की बात करी जाती है वह विधि किस सीमा तक सक्षम है कि निर्बलतम व्यक्ति को न्याय और बली-महाबली को भी दंडित कर सके ये अबूझ है। हम सब रोज ही कोई न कोई न्यायिक चुटकुला सुनते तो हैं ही। बहन सोनी के साथ हो भी हुआ वह हमारे सभ्य समाज के लिये सचमुच डूब मरने की बात है लेकिन ये बातें भी बिके हुए/दबे हुए/तनखैय्या मीडिया द्वारा चुप्पी के पीछे दबा दी जाएगी वो तो आपको वीना मलिक के नंगे फोटो दिखा कर चर्चा करवाने में उलझाए रखेगा।
थू है इन परिस्थितियों पर...
जय जय भड़ास

मोहम्मद उमर रफ़ाई ने कहा…

बेशर्मी और कमीनेपन की हद हो गयी है। क्या हम सब वाकई सभ्य समाज में रह रहे हैं?
जय जय भड़ास

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