कल्याण सिंह सपा में ?
मंगलवार, 20 जनवरी 2009
कल समाचार पत्र की मुख्य खबर थी - सपा में जायेंगे कल्याण! पढ़ कर आश्चर्य हुआ। क्या स्वार्थ के लिये कोई इस हद तक भी गिर सकता है? जब पिछली बार कल्याण भाजपा नेतृत्व से झगड़ कर अलग हुए थे लगता था कि शायद विचारधारा का टकराव है। इसमें कोई बुराई मुझे नज़र नहीं आई। पर इस बार तो साफ दिख रहा है कि मामला कुर्सी का है, बेटे का कैरियर बनाना है। भाजपा बना नहीं रही तो कुछ और जुगाड़ देखा जा रहा है। एक आदर्शवादी जननेता नहीं एक बच्चे का बाप खफा है अपने नेतृत्व से।पर इस बात के लिये अपना आत्मसम्मान, अपना ज़मीर (अगर ये चीज़ राजनीतिज्ञों में होती है तो) सब गवां कर सपा में जाना ? जापानी भाषा में एक शब्द बहुत प्रसिद्ध है - हाराकिरी ! यह जापान में आत्महत्या करने का एक विशेष ढंग है। आत्महत्या करने वाला एक विशेष औज़ार अपने पेट में घुसा कर अपनी अंतड़ियां बाहर निकाल लेता है। जबसे ये खबर पढ़ी है, मुझे न जाने क्यों बार बार हाराकिरी की ही याद आ रही है। यदि कल्याण वास्तव में सपा में जा रहे हैं तो मुलायम सिंह को चाहिये कि कल्याण सिंह को बड़ा स्वागत समारोह कर के अपनी प्रायव्हेट लिमिटेड कंपनी में शामिल कर लें और दो चार दिन बाद उनके ******* पे दो लातलगा कर बाहर फेंक दें। इस प्रकार वह अपने बहुत ताकतवर माने जाने वाले प्रतिद्वन्द्वी का राजनैतिक कैरियर सदा सर्वदा के लिये समाप्त कर सकेंगे।
