आयुर्वेदज्ञ / आयुर्वेद के चिकित्सक / आयुष चिकित्सक स्वयम नहीं चाह्ते कि आयुर्वेद में कुछ नया हो
मंगलवार, 27 जनवरी 2009
आयुर्वेद के क्षेत्र में गधे पंजीरी खा रहे हैं ये बात सत्य है और ये बात सिद्ध हो रही है आदरणीय डा.देशबंधु बाजपेयी के इस कथन से जो कि उनके ब्लाग पर चुभ रहा है कांटे की तरह आयुर्वेद के छद्मनेताओं को........
इसे पढ करके चौंकियेगा नहीं, सही बात और सत्य वचन यही हैं कि आयुर्वेद के नेता, आयुर्वेद के धुरन्धर विद्वान , आयुर्वेद के कर्ताधर्ता, आयुर्वेद के धाकड़ और जड़ीले भाई लोग, बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई नया आविष्कार आयुर्वेद जैसे विज्ञान के लिये किया जाय । Electro Tridosha Graphy, ETG जैसी तकनीक को सामन्य जन और आप लोग भले ही महान आविष्कार बता रहे है , इन आयुर्वेद के नेताओं को यह सब "कूड़ा" नजर आ रहा है, जिसका मूल्य "दो कौड़ी" भी नही है और यह तकनीक "कूड़े कचरे के डिब्बे मे फेकने लायक" है । और तो और यह कोई वैज्ञानिक तकनीक भी नहीं है तथा इसका कोई वैज्ञानिक महत्व भी नहीं है और इससे विज्ञान जगत को कोई फायदा भी नहीं होने वाला ।
गुरुदेव आप की जीवन शैली से प्रेरणा मिलती है संघर्ष को सतत जारी रखने की...
जय जय भड़ास
Read more...

