गुरु मैं भोपाल पंहुच गया हूं

गुरुवार, 1 जनवरी 2009

डॉ साहेब पांय लागूं। गुरु मैं भोपाल पंहुच गया हूं । मेरा नम्बर हैं ०९०९८५८३४०६ है। गुरु आज बहुत थक गया हूं , सो आपकी महिमा का बखान नहीं कर पा रहा हूं। गुरु बस हमारे प्यारे सर सुंदर का ख्याल रखियेगा।

3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

गुरूभाई,सुंदर भाईसाहब से आज ही बात करी बड़े प्यारे हैं आप चिंता न करें मैं उनके/आपके संपर्क में बना रहूंगा। आपकी नई पारी आपके लिये संतोषप्रद हो ईश्वर से प्रार्थना है। हम सबकी शुभकामनाएं आपके साथ हैं लगे रहिए......
जय जय भड़ास

फ़रहीन नाज़ ने कहा…

गुरूभाई मैं भी आपसे मिलना चाहती थी लेकिन बात तक न हो पायी और आप भोपाल चले गये लेकिन मंच पर आ डटे हैं तो मुखौटों की सिलाई उधेड़ने में साथ रहेगा। आपका हिंदी के ठेकेदारों की औकात बताने का विचार शानदार है चलिये इस काम में हम जैसे महाफालतू लोग जुट जाते हैं और इन्हें इनकी सही औकात बताते हैं ताकि हम गंदे लोग समझ सकें कि हिंदी दर असल किसकी भाषा है उनकी या हमारी........
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

अरे गुरु, हो जाओ शुरू,
भाई बधाई हो आप पहुँच गए.
चलिए नयी परी और नया साल दोनों की बधाई लीजिये.
जय जय भड़ास

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