यतीम बच्चे और उन्हें जो संस्कार दिए जा रहे हैं.....

शनिवार, 17 जनवरी 2009

पुणे के एक अनाथाश्रम में रह रहे बच्चे तैयारियां कर रहे हैं मुंबई आतंकी हमले पर बनाए एक कार्यक्रम की जो उन्हें स्टेज पर करना है ये हैं तैयब्बिया ओर्फ़नेज के बच्चे ...... मेरे कैमरे से....
आप देख रहे हैं इन मस्ती करते बच्चों को.............

ये मस्ती नहीं कराई जा रही बल्कि उन्हें रिहर्सल कराया जा रहा है एक स्टेज शो की........
ताकि चैरिटी शो का टिकट खरीद कर आए रइसों के मन में २६ तारीख को हुए आतंकी हमले के प्रति भावनाएं जगायी जा सकें
घंटों का कड़ा अभ्यास करने के बाद भी अगर ये बच्चे अमीरो के मन में अपने प्रति प्रेम न उपजा सके तो क्या होगा????
फोटो खिंचवाने के लिये सहर्ष तैयार हो गये और अभ्यास की थकान गायब हो गयी
एक दो तीन...... सब तैयार हैं
इन्हें क्यों इस्तेमाल करा जाता है ऐसी बातों की अभिव्यक्ति के लिये जिसके बारे में ये कुछ नहीं समझते हैं???????
कुछ भी हो.... करना तो है ही वरना चंदा कहां से आएगा?







2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बच्चों को क्या पता कि उन्हें क्यों नचाया जा रहा है लेकिन आप वहां क्या कर रही थीं? सारे बच्चे सामान्य कपड़ों की जगह यतीम होने घोषणा अपने कपड़ो पर ही लिये घूम रहे हैं क्या ये बात उन्हें चुभा-चुभा कर एहसास दिलाने जैसी नहीं है?
जय जय भड़ास

दीनबन्धु ने कहा…

फरहीन जी अगर इस दुनिया में यतीम, गरीब, मजलूम न रहें तो इनके नाम पर अपनी दुमान चलाने वाले तो भूखे मर जाएंगे,मुद्दों की जुगाली करने वाले बैल होते हैं बौद्धिक किस्म मे बनिये हैं ये लोग जो बच्चों का यतीम होना कैश कराते हैं वरना कमीजों पर अपना प्रचार लगा कर बच्चों को यतीम होने का एहसास न कराते.....
जय जय भड़ास

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