कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

ये समय नहीं हैं आँख बंद कर सोने का
ये समय नहीं हैं वक्त को ऐसे खोने का
चलो बदल दो देश की हालत आगे आओ
ये समय नहीं हैं नेताओं को ढ़ोने का
वरना तुम घनघोर निराशा देखोगे ?...

कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

कह विकास का सर्वनाश यह करते आए
भारत माँ का मान सदा यह हरते आए
खाद, हवाला हो या हो चारा घोटाला
जेबें अपनी नोटों से यह भरते आए
क्या विकास की यह परिभाषा देखोगे ?...

कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

अपने स्वार्थ के खातिर जो विस्फोट कराते
मन्दिर, मस्जिद धर्म के नाम पर चोट कराते
चोर लुटेरे थे कल तक जो अपने देश में
नेता बनकर कितने जाली वोट कराते
इनकी ओर तुम किस आशा से देखोगे ?...

कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

अब तो जरूरी है संभल जाना तुम्हारा
अब तो जरूरी है मचल जाना तुम्हारा
अब तो तुम्हारी आंखों से अंगार बरसें
अब तो जरूरी है उबल जाना तुम्हारा
दुष्टों को क्या खून का प्यासा देखोगे ?...

कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

राम राज्य सी हो जाए तस्वीर देश की
स्वर्ग से सुंदर हो जाए तस्वीर देश की
मूक बना यह देश तुम्हारी ओर देखता
नौजवान ही बदल सका तकदीर देश की
कब तक तुम और दीप बुझा सा देखोगे ?...

कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

4 टिप्पणियाँ:

दीनबन्धु ने कहा…

अखिलेश भाई कविता सुंदर है भाव प्रखर हैं संदेश दे रहा है हर श्ब्द लेकिन अगर सक्सेस मंत्रा जैसे भाई इस कविता को पढ़ कर समझ सकें तो देश का भला होगा
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

अखिलेश भाई,
आपका स्वागत है भड़ास परिवार में.
अपनी धारदार छंदों से सामजिक सरोकार का भड़ास भड़ास करते रहिये.
शुभकामना.
जय जय भड़ास

अग्नि बाण ने कहा…

कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...
स्वागत है वीरू वो बोलते हैं न वेलकम.
बहुत खूब बिरादर, खूब जम कर लगी है, आप तो आते ही छा गए.
ऐसेहिच अपनी लेखनी से तमाशा दिखाने का भाई.
जय जय भड़ास

अजय मोहन ने कहा…

बहुत सुंदर भाव हैं इसे कोरी प्रशंसा मत मानियेगा ये तो दिल की बात है
@भाई दीनबंधु ने सही कहा है।
जय जय भड़ास

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