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गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009






एक दम्पति पर प्रसन्न हो भगवान ने वरदान माँगने को कहा।

पत्नी बोली- 'मेरी इच्छा है कि मुझे रोज नए-नए आभूषण पहनने को मिलें।'

यह सुनकर पति को लगा कि वह तो लुट गया।

उसने भगवान से कहा- 'हे प्रभु, मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मैं जौहरी की दुकान पर हाथ साफ कर सकूँ।'

भगवान बोले- 'तथास्तु, मैं अति प्रसन्न हूँ वत्स।

तुमने तो मेरी चिंता ही दूर कर दी।

मैं दुविधा में था कि रोज नए-नए आभूषण का इंतजाम कहाँ से करूँगा।'

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रशांत भाई सुंदर है लेकिन गूगल पेज क्रिएटर पर नए साइन अप नहीं स्वीकार रहा है। आप ने जो लिंक दिया था उसे देखा अच्छा है। आशा है कि अन्य लोग भी आपके प्रयोग को करना चाहेंगे लेकिन यदि आप स्वयं चरण बद्ध तरीके से ये काम करना बताएं तो जरा भड़ास पर चल रहे व्यर्थ के विवाद से अलग हट कर एक रचनात्मक दिशा मिलेगी आपका क्या विचार है?
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

डॉ साहब परसांत भाई का जादू चल गया है , अब आप को अमित भी परसांत लगने लगा है , ...........:)

आप के आदेशानुसार मै जल्दी ही easy poadcast को step by step post करने की कोशिश करूगा
फ़िर सभी अपनी अपनी आवाज मे यहाँ पर उपस्थिति देगे तो आपका और हमारा भड़ास ब्लॉग पहला इस परकार का ब्लॉग होगा ,

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