मै उसकी हिम्मत और खुद्दारी को सलाम करता हूँ ........

बुधवार, 25 फ़रवरी 2009

कुछ दिन पहले मैंने एक रिक्शेवाले को देखा ....मेरा मन दहल गया । उसका एक हाथ कटा हुआ था । एक ही हाथ से रिक्शा चला रहा था । उसके हिम्मत को देखकर मै चकीत रह गया .....सोच रहा हूँ एक हाथ से रिक्शा चलाना कितना मुश्किल होगा । उसने बताया की शुरू में तो यह संभल ही नही रहा था लेकिन धीरे धीरे आदत हो गई और अब चला लेता हूँ ।
सोचता हूँ उसने बहुत हिम्मत का परीचय देते हुए यह रास्ता चुना है ...... वह चाहता तो भिखमंगों की कतार में शामिल हो सकता था लेकिन उसने ऐसा नही किया । मैंने कुछ अधिक पैसे देने की कोशिश की पर असफल रहा ।
इस घटना ने मुझे झकझोर कर रख दिया है ...... शायद भविष्य में कभी निराश हो जाऊं तो उसका चेहरा जरुर याद करूँगा । उसके हिम्मत और खुद्दारी को सलाम करता हूँ । हमें ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए और ख़ुद उनलोगों से सीखना चाहिए जो विपरीत परिस्थितिओं में भी हौसला नाही खोते है ।
मुझे वैसे लोग काफी पसंद आते है जो शून्य से शुरुआत कर आगे बढ़ते जाते है भले ही वे शिखर को नही छू पाते पर निराश कभी नही होते । चलते रहते है ।

3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

मार्कण्डेय भाई प्रेरणास्पद घटना का जिक्र करा है साधुवाद स्वीकारिये
जय जय भड़ास

सिटिजन ने कहा…

प्रेरणास्पद घटना है...

Manoj dwivedi ने कहा…

himmate marda to madad de khuda..

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