हर पिछवाड़े कार और हर हाथ में मोबाइल

मंगलवार, 24 मार्च 2009

भड़ासियों टाटा अंकल ने देश के संसाधनों को निचोड़ कर आप सब गरीबों के लिये मात्र १.७ लाख में नैनो कार बना दी है ताकि आपके पिछवाड़े के नीचे भी एक चार चक्का वाहन होने का आपको गर्व हो सके और आप देश के हर उस गरीब को अपनी कार में बैठ कर मुंह चिढ़ा सकें जो पैदल जा रहा है। एक बात और कि इस कार का वजन इतना तो है ही कि आप फुटपाथ के किनारे सोए गरीबों को कुचल कर मार सकते हैं, कार का एक ये बड़ा इस्तेमाल है। गरीब आदमी "सस्ती" कार से भी दब जाता है। हर पिछवाड़े कार और हर हाथ में मोबाइल(अब तो दांए और बांए दोनो हाथों में लोग मोबाइल रखने लगे हैं एक में रिलायन्स का दूसरे में टाटा का) का सपना जो हमारे महान उद्योगपति देखते हैं हमारी पूंजीपति भक्त सरकारें पूरी ताकत से इनके सपनो को पूरा करने में जुट जाती हैं गरीबों को मार-वार भी डालती हैं। धिक्कार है आजादी के इतने साल बाद भी हर बच्चे के हाथ में पुस्तक, हर युवा को रोजगार, हर भूखे को रोटी, हर बीमार को इलाज, देश में विधि का शासन, सभी को न्याय वगैरह जैसे बुरे सपने हमारे उद्योगपति नहीं देखते और न ही हमारी सरकारें इन सपनो को पूरा करती हैं क्योंकि ये तो भड़ासियों का सपना है।
जय जय भड़ास

6 टिप्पणियाँ:

Manoj dwivedi ने कहा…

Guruji! Maza aa gaya apka lekh padhkar..sahi chot mari hai apne. Bhadasiyon ke is sapne se karodon log vasta rakhate hain. apki lekhani ki dhar ka asar jarur hoga..aj subah-subah apka lekh padhakar man me naya josh paida ho gaya hai...

दीनबन्धु ने कहा…

गुरूदेव,एक बात तो आप जानते ही हैं कि अब मुंबई-पुणे हाई-वे पर बायोडीजल के वितरण स्टेशन बनने वाले हैं तो जब टाटा और अंबानी ससुरे हम गरीब किसानो के खेत में सरकार की अंग्रेजी नीति "सेज़" से हमारे खेत में नैनो की फैक्टरी लगा चुके हैं तो क्या बायोडीजल के लिये ’जैट्रोफ़ा’ क्या ये भड़वे किचन गार्डन में उगायेंगे या संसद में उगायेंगे या फिर विदेशों से आयात करेंगे? साली गरीब,अनपढ़ लेकिन चूतिया जनता ही हर हाल में चूसी जाती हैं लेकिन क्या करें सुधरते भी तो नहीं हैं और जो इस कमीनेपन को समझते हैं वो हम सबकी तरह मार खाने को आगे नहीं आते..... हम सपना लिये मर गये तो भूत बन कर इनको डंडा करे रहेंगे सालों को चैन से न रहने देंगे
जय जय भड़ास

mark rai ने कहा…

aajadi ..... ek naam hi rah gaya hai . garibon ko maarane ke liye car hi kaaphi nahi hai we to gaali se bhi mar jaate hai ...nano jarur gaali dene walo ki jamaat badha degi .

गुफरान सिद्दीकी ने कहा…

डॉक्टर साहब नानो कभी भी एक आम भारतीय का सपना नहीं रहा है हाँ ये ज़रूर है की रतन टाटा या इनके जैसे व्यावसायिक घरानों के लोगों की नज़र में एक आम भारतीय की परिभाषा क्या है शायद ये सिर्फ अपने सपने बेचना जानते हैं और इनको वो भारत नहीं दिखी देता जहाँ आज भी भूक से लोग मर जाते हैं या क़र्ज़ न चूका पाने वाले किसान आत्महत्या कर लेते हैं ...........आपके लेख के लिए बधाई ......

आपका हमवतन भाई ....गुफरान.....अवध पीपुल्स फोरम फैजाबाद.

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

भाई कस कस कर जुतिया रहे हैं लेकिन जिन्हें जुतिया रहे हैं उनकी खाल तो अफ़ीकन गैंडों से भी ज्यादा मोटी है और आपके जूते हैं कपड़े के(चमड़े के तो आप पहनते नहीं हैं)तो बेकार ही गालियां मत दीजिये लेकिन भड़ास तो निकलना जरूरी है।
@गुफ़रान भाई ऐसी स्थिति आती ही क्यों है कि अन्न उपजाने वाले किसान को कर्ज़ लेना पड़े और न चुका पाने की स्थिति में आत्महत्या करनी पड़े...
जब तक जनता लोकतंत्र के सही स्वरूप को नहीं समझती और जाति धर्म के नाम पर हरामी हलकट और कमीनों को अपना नेता मानती रहेगी तब तक ऐसी स्थिति रहेगी।
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

डॉ साहब क्या इस परकार की कार की हमे जरूरत है ,
मेरा मानना है की सरकार को वाहन संख्य नियंत्रण करना होगा ,
वर्ना एक दिन सिर्फ वाहन होगा सड़क नहीं ,
पेट्रोल या डीजल को छोड़ कर बेट्री चालित वाहन ही हमारी जनता के लिए सही होगे

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