ये जख्म गहरा है ........

शुक्रवार, 6 मार्च 2009

ये जख्म गहरा है
कोई मरहम दे दे ।
मेरी प्यास है बड़ी
कोई सागर दे दे ।
तिल तिल कर मर रहा
कोई एक उमर दे दे ।
अँधेरा गहरा रहा
कोई चाँद की नजर दे दे ।
ये जख्म गहरा है
कोई मरहम दे दे ।

4 टिप्पणियाँ:

ज़ैनब शेख ने कहा…

चलो ले लो भाई जो कुछ मांग रहे हो पर रोजगार मत मांगना,उधार मत मांगना और मुफ़्त में रहने के लिये मुंबई में घर मत मांगना....
जय जय भड़ास

MARKANDEY RAI ने कहा…

rojgaar ham batate hai aur agar aapako jarurat hai toaap boliye. waise mai mumbai me nahi delhi me hoon.

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अरे भाई ज़ैनब आपा और मार्कण्डेय भइया ये आप लोग आपस में क्या चुटकियां ले रहे हैं। ज़ैनब आपा देखिये मार्कण्डेय भाई शायद आपके मज़ाक से नाराज़ हो गये हैं चलिये कान पकड़िये कवियों का मजाक बनाना अच्छी बात नहीं है....।
जय जय भड़ास

MARKANDEY RAI ने कहा…

Rupesh jee aisi baat nahi hai mai bhi majaak me hi kaha hai.

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