भड़ास को नाम बदल कर भड़ासblog क्यों करना पड़ा?

शुक्रवार, 20 मार्च 2009


आज बनियाराम भड़ास4मीडिया के सबसे बड़े मीडिया माफ़िया बन जाने के खुशी में गाल बजा रहे है और तेललगाऊ तोलूराम किस्म के लोग बधाई देते नहीं थकेंगे। मुखौटाधारियों का कुनबा कितना बड़ा है ये तो आप सब भड़ासी बांयी तरफ़ जो सचित्र लिंक लगा रखी है उस पर जाकर देख सकते हैं। आज मीडिया के माफ़ियाजन जश्न मना रहे हैं कि वो सबसे बड़े हो गये हैं और साथ में मेहनत, लगन, देसीपन, हिंदी वगैरह की भी चाट चटा रहे हैं। मुझे पता है कि इस मोटे हो गये लिजलिजे रीढ़विहीन बनिये ने आजतक इस बात का उत्तर नहीं दिया कि भड़ास को नाम बदल कर भड़ासblog क्यों करना पड़ा और न ही किसी चूतिया ने इससे पूछा और पूछा भी होगा तो इसने कुटिलता से उसका जवाब ही न दिया होगा। वैसे सिद्ध होता जा रहा है कि हिंदी के क्षेत्र में अभी भी तोलू और अकारण ही तलवे चाटने वालों की कमी नहीं है। इस बनिये का मुखौटा नोचने का मुहिम जारी रहेगा और ये भड़ासियों को बेनामी कमेंट्स के जरिये गालियां देता रहेगा। बनिया धनिया की जगह लीद बेचने का काम करता रहेगा और भड़ासी उन लीद के पैकेटों पर पैट्रोल मूतते रहेंगे।
जय जय भड़ास

3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

मुनेन्द्र भाई ऐसे लोगों की प्रसिद्धि और कामयाबी का टोटका एक बार भाई जे.पी. ने उत्कीलित करा था इन मीडिया माफ़ियाओं के चलते अपने दम तोड़ चुके ब्लाग "बेहया" में जो कि इस लालची बनिये ने भी अपनाया है....
चोंथो चोंथो चौथा खम्भा
इनकी कामयाबी हमें मकसद देती है

Manoj dwivedi ने कहा…

Apne muh miyan mitthu ban rahe hain. kaha bhi gaya hai..
BANIYA MITRAM KABHI NA MITRAM
JAB MITRAM TAB DAGI-DAGA..

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

भाई,
ना ही ये बनिया है और ना ही व्यवसायी, दलाल अपनी दलाली के लिए किसी को भी बदल सकता है और बेच सकता है, सो एक दलाल ने अपना मुखौटा बदल लिया, लोगों का सम्मान और भावना तो ये पहले ही बेच चूका है है,
जय जय भड़ास

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