लोकतंत्र की सुरक्षा जनता के हाथ

गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

आजादी के ६० बर्ष होने को है। फिर भी हमारे देश की लोकतान्त्रिक ब्यवस्था में अभी तक कोई सुधार नही हुआ। हर बार चुनाव होता है। जनता के द्वारा चुने गये महानुभाव (सफेदपोश) कुर्सी सम्हालते ही भूल जाते है की हमारे देश की असल लोकतांत्रिक ब्यवस्था क्या है। लोकतंत्र का इतिहास को रचने वाली जनता को इश बात पर विशेष ध्यान देना होगा की देश चलाने वाला असल नेता कौन है। अपराधिक व भ्रष्ट नेता जो साम, दंड, भेद की आड़ में संसद में पहुच जाते है, उन्हें रोकना होगा। जनमत का एक वर्ग जो " कोऊ नृप हमें को हानि" की अवधारणा रखता है, उसे भी इश विचार से ऊपर उठना होगा। और जनता का एक वर्ग जो उदासीनता का लबादा ओढे हुए, मतदान में रूचि नही लेना चाहता है, उसे भी अपनी भागीदारी निभानी होगी। हमें सही चुनाव करना होगा। क्युकी जनता ही लोकतंत्र का आधार अस्तंभ है। मतदान हमारा अधिकार है नही रास्ट्रीय कर्तब्य भी है।
एशे में लोकतंत्र की सुरक्षा जनता के हाथ में है................... जय जय ॥ भड़ास॥

2 टिप्पणियाँ:

गुफरान सिद्दीकी ने कहा…

मिलन भाई जनता अगर अपने वोट को लेकर जागरूक ओ भी गयी तो इससे फायदा क्या होगा आप किस दल या प्रत्याशी को वोट देना पसंद करोगे या अपने मताधिकार का उपयोग करे हुए किसे चुनाव जिताना पसंद करोगे किसी भ्रष्टाचारी को किसी गुंडे को या फिर किसी घोटालेबाज को क्यूंकि आपके सामने इन प्रत्याशियों के आलावा कोई और विकल्प ही नहीं होता की आप किसी सभ्य समाजसेवी को वोट करें...............,

आपका हमवतन भाई ...गुफरान.....अवध पीपुल्स फोरम ...फैजाबाद

Badshah Basit ने कहा…

गुफ़रान जी ने सही कहा कि कोई विकल्प नही होता एक चोर है दूसरा घोटालेबाज है तीसरा डाकू है चौथा बलात्कारी है पांचवा इलाके का दबंग है...... ऐसे में आप सबसे कम कमीने को चुन लेते हैं और जब वह सत्ता की ताकत पा जाता है तो सबसे ज्यादा हरामी हो जाता है। पढ़े-लिखे सभ्य लोग जब तक राजनीति में नहीं आएंगे ऐसे ही हरामी सत्ता पर काबिज रहेंगे हम सबको आगे आना होगा अपने देश को संवारने के लिये, समाजसेवियों का ही तो मुखौटा लगा कर आए कितने हरामी नेता आज हमारी नजरों के सामने हैं लोग भोले हैं मुखौटे से भरमा जाते हैं
जय जय भड़ास

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