जैनब आपा

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

जैनब आपा आज आप का लिखा पढ़ा ,
मेरे समझ मे आज तक विवाह का मतलब ही नहीं आया है ,
कोई कहता है विवाह २ आत्माओ का मिलन है ,
कोई कहता है ,
२ जीवन एक दूजे के लिए बने होते है और वो एक हो जाते है ,
कोई धर्म इसे ७ जन्मो का रिश्ता बता ता है
और कोई इसे सिर्फ ऊपर वाले की किदमत मे गुलाम पैदा करने की बात कहता है ,
, शायद मे हो सकता हु कही गलत हु ,
पर इस रिश्ते मे ,
आज से १०० साल पहले बहुत ही कम चीजे घर से बहार जाती थी ,
शायद हो सकता है की किसी का कहना की हर १० साल मे ज़माने का दस्तूर बदल जाता है सही हो ।
पर क्या कभी इस बात का कोई अह्शाश किया है किसी ने की एक बंद कमरे के अंदर की अत्यंत ही निजी गोपनीयता मे एसा क्या हुआ की सरकार को इस पारकर का कानून बनाना पड़ा ,
इस का मतलब है की अब प्रकर्ती पर्दत इस मानवीय वह्व्हार को अदालत अपने सामने चार चार दिन के अन्तराल पर पूर्ण कर वे गी ,
क्या आप को हसी आ रही है ,
नहीं बहन ये अदालत या और कोई क्यों इस पारकर का कानून banatae है
इस की जड़ मे जाना होगा ,
जो रिश्ता प्यार और vishvash पर hona cahaye वो अदालत के adesh पर नहीं चल सकता
पत्नी से बलात्कार ,
क्या कोई बतायगा की इस सब्द का सर्जन करता कोन था ,
किस भाषा की दिच्शनारी मै इस परका सब्द आता है ,
विवाह संबंद एक पारकर से कानून पर्दत सम्भोघ अधिकार ही तो है ,
या आप बताय की ये और क्या है ,
पहली बात की इस निजी बातो मै सरकार का कोई धक्हल नही होना कहाए ,
२) महिला और पुरूष दोनों को अपनी मर्यादा मै रहना ही होगा ,
वरना आज नही तो कल सभी उरोपे , अमेरिका vasio की तरह अपने आप को भूल कर ekal vavysatha kay bhagi hogay , jha सिर्फ़ फायदा किसी न किसी कम्पनी को ही होगा , शायद मै भटक गया , अगर किसी को बुरा लगा हो तो ....................... तो जो आप की मर्जी
हिंदुस्तान मै गनीमत नही है ............................................................................................................. बाकि दिल का हाल अगली पोस्ट मै

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अमित भाई भड़ास निकालते समय विचारों की अभिव्यक्ति पर रोक बिलकुल न लगाया करें अन्यथा भड़ास का मूल उद्देश्य न सिद्ध होगा। आप जैसे उल्टी करते समय ऐसा नहीं करते कि जो शरीर से उबल कर बाहर आ रहा है आप वापस उसे मुंह में भरे रहें और सिर्फ़ इसलिये निगल लें कि उगलने पर लोगों को बदबू आएगी.... भाई निकाल दीजिये ताकि आप स्वस्थ हो सकें जिसे बदबू आए वो नाम बंद कर ले और ज्यादा ही कष्ट हो तो आपको दवा दे और करी हुई वमन पर मिट्टी डलवा दे और अपने पैसे से खुशबू छिड़क दे। बुरा लगने की परवाह करा तो भड़ास न सफ़ल हो पाएगी...
जय जय भड़ास

गुफरान सिद्दीकी ने कहा…

रुपेश भाई अनित जी के लिए बिलकुल सही दवा बताई आपने अमित जी जब तक आप पूरी तरह से भड़ास नहीं निकालेंगे तब तक भडासी आपकी बात पर गौर नहीं करेंगे.रुपेश जी सही मायने में आप डॉक्टर भड़ास बनाने के बाद हो गए ..............,
भड़ास के लिए आपको धन्यवाद...........,
आपका हमवतन भाई........गुफरान.....अवध प्पुल्स फोरम फैजाबाद...

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