ये जूता! जो घूम रहा है, किसको-किसको चूम रहा है!

बुधवार, 8 अप्रैल 2009

हमारा देश भारत वैदिक काल से ही विश्व बंधुत्व की भावना से लबरेज रहा है। दुनिया भर के लोगों को अपना भाई और पुरी दुनिया को अपना घर समझना हमारे खून में है। लेकिन इधर कुछ दिनों से एक जूता पुरी दुनिया की सैर पर निकल चुका है। अब इस जूते को सैर कराने का जिम्मा किसका है, यह तो अभी तक पता नही चल पाया है। पर इस जूते का स्वागत पत्रकार विरादरी कर रही है। पिछले साल से विश्व बंधुत्व की भावना लिए विश्व भ्रमण पर निकला यह जूता सबसे पहले बगदाद में अवतरित हुआ। स्थानीय पत्रकार मुन्तज़र जैदी ने इस जूते की भावना का सम्मान किया और फेंक दिया किसी अगले देश की यात्रा पर। सच पूछा जाए तो यह जूता एशियाई देशों में खाशी दिलचस्पी ले रहा है। जूता सीधे पहुँचा चीन, अबकी जर्मन स्टुडेंट ने चीनी प्रधानमंत्री पर जूते के जज्बात को हवा दी। वैसे इरान के राष्ट्रपति पर भी ये जूता चलने वाला था, लेकिन एँ मौके पर पकड़ में आ गया। मगर जूते की हिम्मत तो देखिये वह बाकायदा अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। अभी हाल ही मुंबई पहुँचा तो वहा एक सभा में इसकी मुलाकात एक संडल से हुई। ये सैंडल भी कुछ इसके जैसा ही कारनामा कर रही थी, सो दोनों ने आपसी रजामंदी से साथ निभाने का वादा कर लिया। इनकी गृहस्थी चल निकली, जो जूता अकेले मिशन पर निकला था, अब उसे जीवन साथी मिल गया। पर ये बात शायद किसी को अच्छी नही लगी, जूते को भी लगा की ये इसके रास्ते की रुकावट बन सकती है। सो उसने सीधे गृह मंत्रालय पर ही धावा बोल दिया। यहाँ चुमते- चुमते बचा लेकिन खाकसार ने अपना काम तो कर ही दिया। लोगों ने जूते की साइज़ देखी और बोले जूता ८ नम्बर का था। १० नम्बर का जूता अब ८ नम्बर का हो गया है। होगा भी क्यों नही जो चलेगा वही घिसेगा और जो घिसेगा उसकी साइज़ तो छोटी होगी ही। खैर अब ये देखना है की इसका अगला पड़ाव क्या है? लेकिन हमारा तो येही मानना है की अब इस जूते को तडीपार यानि देश निकला दे ही देना चाहिए । क्यूंकि इसका चरित्र बड़ा भयानक और सनसनीखेज हो चला है। कहते हैं की जूते का चरित्र साम्यवादी होता है। वह सिर्फ़ साइज़ देखता है औकात नही लेकिन ये तो औकात देख रहा है साइज़ को पीछे छोड़ चुका है। इसलिए साहेबानो अपने-अपने जूते पर गौर फरमाइए और इसकी साइज़ देखकर ही पहनिए ताकि ये आपके पैरों में फिट बैठ सके। ऐसा न हो की गाहे-बगाहे, वक्त-बेवक्त आपके पैरों से निकलने लगे।
जय भड़ास जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

mark rai ने कहा…

juta culture se mujhe dar lagne laga hai...kahi ye hamaari pahchaan n ban jaye...

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

मनोज भाई आपने जूते के विषय में जितनी गहराई से लिखा वो तो बाटा भी नहीं लिख सकते आप जूते की आत्मा तक की गहराइयों तक उतर चुके हैं
जय जय भड़ास

फ़रहीन नाज़ ने कहा…

मनोज भाईसाहब देखियेगा कि जल्द ही इन जूताफेंक लोगों की फ़ेहरिस्त में नाम शामिल कराने के लिये कोई महिला आगे आएगी और फिर उसके बाद राष्ट्रीय जूता दल यानि कि एक और आर.जे.डी. की स्थापना होगी और फिर हो सकता है ये लोग सरकार चलाएं
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

मनोज भाई जल्द ही मानव समाज में दो मुख्य वर्ग बन जाएंगे एक वो जो जूता चलाएगा दूसरा वो जो जूता खाएगा
जय जय भड़ास

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