बुधवार, 27 मई 2009

आदमी क्यों होता जा रहा नर पिशाच
महिलाओं पर हो रहे जुल्म हम आखं खोल कर देख रहे
विजय शंकर चतुर्वेदी /विजय विनीत
अमर उजाला २० मई
भदोही में दलित महिला के साथ सामूहिक दुराचार
हिंदुस्तान 7 मई (joanpur)
दुराचार कर दो सगी मासूम बहनो की हत्या
हिंदुस्तान २० मई
भदोही में कार में विबाहिता के साथ दुष्कर्म
दैनिक जागरण २० मई
नाबालिक के साथ दुष्कर्म यस पी के निद्रेस पर मामला दर्ज
दैनिक जागरण २२ मई
हत्या कर लटका दिया विबाहिता का शव
हिंदुस्तान २४ मई
जौनपुर में महिला को दबंगों ने जिन्दा फूंका
हिंदुस्तान २१ मई
तंत्र बिद्या की सिद्दी के लिए बेटी की दी बलि
यह कुछ समाचार पत्रों में छपे समाचारों के सीर्सक है । यह सीर्सक ही सम्पूर्ण घटनाओ का एहसास करा रहें है .यह सम्पूर्ण घटनाएँ हल के दिनों मेंउत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के जिलों में हुयी हैं इस तरह की घटनाये सिर्फ़ इसी तरफ़ हो रहीं हो बल्कि कुछ इसी तरह की तस्वीर पुरे देस की है .जमीं से चाँद तक पहुचनें और तमाम विकास हासिल करने के बाद भी बदलाव दिखाई नही दे रहा , आदमी को जहाँ भी मौका मिल रहा है वह अपनी शारीरिक हवश मिटाने के लिए सम्पुरण मानवीय संवेदनाये व् मरियादाओ को भूल जा रहा है । उसकी आँखे इस तरह अंधी हो जा रही है की वह बहन बेटी और माँ को भी नही पहचान पा रही है । उत्तर प्रदेश में तेज तरार महिला मुख्यमंत्री के रूप में मायावती सासन कर रही है । इनके निद्रेश को फरमान के रूप में देखा जाता है । हर रोज अपराधो पर अंकुश लगाने व् अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा देने का हुकुम आला अधिकारियों को दिया जाता है । बावजूद इसके उसका कोई असर दिखाई नही पड़ रहा है ।उत्तर प्रदेश में एक जनवरी से १५ मार्च तक कुल ७४ दिन की समीक्षा की जाए तो महिलाओ पर हो रहे जुल्म समाज को सर्मसार करने के लिए काफी है । उत्तर प्रदेश में ढाई माह के बीच २९८ महिलाये दुराचार की शिकार हुई है । ३०४ महिलाओ की दहेज़ के लिए हत्या की गई ।
प्रदेश की मुख्यमंत्री की कितनी हनक है इसको अकेले लखनऊ पुलिस जोन की घटनाओ से जाना जा सकता है। इस जोन में ५६ दुराचार व् ४० दहेज़ हत्या हुई ,सन २००८ में दुराचार की १५३२ व दहेज़ हत्या की २०६६ घटनाये पुलिस रजिस्टर में दर्ज है । तमाम ऐसे भी पीड़ित परिवार रहे होंगे जिनके मामले दर्ज नही हुए होंगे ।
इन घटनाओ से अंदाजा लगाया जा सकता है की इस २१वी सदी में हम अभी कहाँ है । तालिबानियो को जी भर कर गरियाने वाले हम लोग क्या किसी तालिबानी से कम नजर आ रहे है प्रदेश अगर मायावती चला रही है तो देश भी एक महिला के द्वारा ही संचालित हो रहा है आजादी के बाद पहली बार संसद में सर्वाधिक ५१ महिलाए चुनकर गई है । इसमे भी सबसे अधिक ११ उत्तर प्रदेश से है हमारी महामहिम भी प्रतिभा देवी सिंह पाटिल महिला ही है लेकिन क्या यह महिलाएं इस तरह के अत्याचारों के खिलाफ कोई इतिहास बना पाएँगी ।
विजय विनीत
सोनभद्र

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

कामरेड! माया मेमसाब या प्रतिभा माई का महिला होना संदिग्ध है वरना उन्हें ये बातें अवश्य उद्वेलित कर पातीं जितना कि आप और हम को कर देती हैं
जय जय भड़ास

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