नीतिश का मुखौटा, लोगों के साथ धोखा !

शनिवार, 30 मई 2009

कल लुधियाना में एनडीऐ का शक्ति प्रदर्शन था, घटक दलों के साथ राजनैतिक गलियारा हो या मीडिया की बैठकी, एक ही विषय एक ही चर्चा नीतिश और मोदी का मिलन कैसा, किस तरह और क्यूँकर होगा।

बहरहाल एनडीऐ के इस शक्ति प्रदर्शन में सभी शरीक थे और आम जनों की धारणा के विपरीत मोदी और नीतिश ने आलिंगन किया। नि:संदेह ये राजनीति के विपरीत नही था, राजनीति का तो ये पहला सिद्दांत है की विशवास जीतो और उसका घात करो, अपने फायदे के लिए किसी के साथ भी हाथ मिलाना हो तो जरूर मिलाओ आख़िर राजनीति ही तो है।

चोर चोर मौसेरे भाई, राजनीति है भाई!!!!


बिहार में सभी चरण का मतदान हो चुका है, नीतिश लोगों को ठग चुके हैं, अपनी क्षद्म चरित्र को दुहरा चुके हैं, राजनैतिक भ्रष्टता का नया उदाहरण पेश करते हुए, अपने सभी पुराने वायदे घोषणा और यहाँ तक की पार्टी के पदाधिकारी से लेकर कार्यकर्ता तक की मनोभावना के विपरीत मोदी से गल बहलिया की, अब चुनाव समाप्त है और बारी सरकार बनने की है, गद्दी तक पहुँचने के लिए लोगों को ग़लत आश्वासन और विचारधारा की मृत्यु कर चुके हैं।

नीतिश का ये कोई नया चेहरा नही है, जनता दल के विभाजन से लेकर लालू के साथ मन मुटाव हो या समता पार्टी का गठन और विघटन ये सारा कारनामा नीतिश की तानाशाही और निरंकुशता के कारण ही तो हुआ था। आज भी नीतिश की तानाशाही जारी है। जद एस में इसकी साफ़ झलक दिखती है जब शरद यादव नीतिश के छाँव तले चुनाव लड़ने से लेकर पार्टी के मुखिया बनने तक की राह में नीतिश के मोहताज नजर आते हैं, एनडीऐ का कर्णधार और संयोजक जार्ज फर्नांडीज का उदाहरण ज्यादा पुराना तो नही जो पार्टी से नही बल्कि स्वनंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। नीतिश की तानाशाही ही तो है।

बिहार विकास के नाम पर पहले तो नीतिश बिहारवाशी को विकाश का झुनझुना पकडाते रहे, अब विरोधी भी नीतिश के विकाश का गुणगान कर रहे हैं राजनीति ही तो है। मगर क्या विकाश है ?

मीडिया में विकाश, राजनीति में विकाश, सरकार में विकाश विरोधी में विकाश मगर आम आदमी का विकाश ?

नीतिश के विकाश का पोल गाँव में जाने पर खुलता है जहाँ नीतिश के जात पात की राजनीति ने विकाश की धारा को कुंद कर रखा है, मगर कागजी विकाश तो है भले ही आम को विकाश मिले।

राजनीति के सिद्दांतों का पालन करते हुए जिस तरह से नीतिश ने बिहार की जनता को छला है, आने वाले दिनों में नीतिश उत्तर देने की तैयारी कर लें।


1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

ये मौसेरे भाई नहीं है बल्कि अपनी रंडी राजनीति के पेट से पैदा सगे भाई है इन सबका डी.एन.ए. जांच करा कर देखा जा सकता है कि इनके सगेपन के जीन्स कितने स्पष्ट हैं
जय जय भड़ास

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