विवेक चौधरी जी से संवाद जो अब निजी नहीं रहेगा....... ( अतीत के पन्ने से......)

बुधवार, 6 मई 2009

प्रिय विवेक भाई

प्रणाम

अचरज है कि आप भड़ास के पन्ने से उतर कर निजी उत्तर दे रहे हैं भला ये कैसी कुंठा है?मैं मानती हूं कि यदि बात भड़ास से जुड़ी है तो हमें उसी पन्ने पर करनी चाहिये न कि निजी स्तर पर। आपके भगत सिंह के माध्यम से ही आपको जानती हूं तो जो जाना उनके ही नजरिये से जाना है ,इसमें कुछ निजी नहीं है आप अन्यथा न लें। आपका भगत सिंह आराम करे ये उसकी और उसके परिवार की किस्मत में नहीं है ये तो मैंने खुद ही दिल्ली तक देख लिया है कि वे लोग कितने सुकून और आराम में हैं। आप अपने जीवन के निजी आर्थिक पक्ष को शेष लोगों के साथ जोड़ कर दर्शाना चाहते हैं कि ये आपके जीवन का सामाजिक संदर्भ है तो विचित्र लग रहा है। मेहरबानी करके पुनः विचार करें। मैं भी निजी मान्यताएं रखती हूं जैसी कि आप रखते हैं तो उन्हीं मान्यताओं के कारण मैं आपके विचारों से असहमत हूं लेकिन मैंने आप पर कोई प्रहार तो किया नहीं जिसका आप स्पष्टीकरण आप मुझे मेल करके दे रहे हैं। बस एक टिप्पणी करी थी तो आप तिलमिला गये और यहां तक आ गये तो अब शायद हो सकता है कि आप अब मेरे घर तक उत्तर देने आ जाएं। आपका स्वागत रहेगा,मेरे भाइयों में एक भाई और जुड़ जाएगा जैसे भूषण भाई,रजनीश झा और डा।रूपेश श्रीवास्तव जुड़े हैं। आपको दीवाली की हार्दिक शुभकामना सहित प्रणाम

मनीषा नारायण



On 28/10/2008, vivek choudhary wrote:Accha laga tumhara jawab. Main uski tulna bhagat singh se karta nahi tha aaj bhi karta hoon utni hi. lekin ye fark aazadi ka hai. aazadi apne aapko bhagatsingh ghoshit karne ki. aur durbhagya se mere is bhagat sing bhai ne jung mein thoda aaram karne ka man bana liya hai. koi baat nahi .lekin mujhe khushi hui aap jaisa ek dost phir bhi uske saath hai aap dono khush naseeb hain. lekin jahan tak dhandhe ke promotion ki baat hai to ye mein un logon ke liye kar raha hoon jinke paas aap jaise hamdard nahin hain.aur wo bechare sirf paisa kamane ke liye pitaai khate hain ,goli bhi khate hain. mein sirf un logon ko ek raasta dikhana chahta hoon ki bhai paisa bihar mein rah ke bhi kamaya jaa sakta hai. wo baat bhagat singh ki samjh mein to nahi aayegi lekin haan ek aam insaan ko samjhane ki koshish to kar hi sakta hoon . ek dhanda immandaari se kar raha hoon aur usi imaandari se uska promotion bhi. aur phir bhi agar aapko aitraaz hai to mein dua karoonga ki aapko ye dhandha samajh mein aa jaaye. aapko to shayad zaroorat na ho par aapke zariye kisi aur bhagat singh ki zaroorat poori ho sakti hai . any way thanks fot your comment positively expecting comments from you in future.-- "Your perception of me is more important than my perception of me." " RegardsVivek



विवेक भाई भड़ास क्या है उसे जरा जानिये समझिये,नाराज मत होइये।

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