जैन राक्षसों ने भड़ास पर भी पुरानी चाल अपनाना शुरू कर दी है भ्रमित न हों....

गुरुवार, 25 जून 2009

अमित की इस पोस्ट में भाई रजनीश झा की एक टिप्पणी चिपकाई गयी है जिस पर डा।रूपेश श्रीवास्तव ने कमेंट करके जानना चाहा कि भाई रजनीश ने ये कमेंट कब और किस प्रसंग में दिया है। देखिये खुल गई इनकी पोल कि ये भड़ा़स के माडरेटर्स को भी चूतिया बनाना चाहते हैं शब्दों में उलझा कर।

अब जब पोल खुल गयी डा. साहब के सामने तो गोबर की लीपापोती कर रहा है ये पट्ठा
अरे अमित!ये जो कमेंट के विषय में बात लिख रहे हो कि कहीं का कमेंट कहीं लग गया है तुम जिन,भूत,पिशाच,राक्षसों के भक्त मिल कर ये झांसा किसी भी मासूम और तुम्हारी राक्षसी साजिशों से अन्जान अभिषेक मिश्रा,पूर्णिमा वर्मन,सतीश कुंदन या जयश्री वर्मा को दे सकते हो हमें तो हरगिज नहीं। यही तो तुम्हारी वो साजिश है जिसका हम पर्दाफाश कर रहे है तुम राक्षसों ने अपने छापेखानों में हिंदुओं के धर्मग्रन्थों में ऐसे ही थोड़े-थोड़े बदलाव हर पांच दस साल में करते करते आज ये स्थिति ला दी है कि पच्चीसों रामायण हैं सब अलग-अलग बातें कहती हैं और एक सामान्य भक्त यही सोचता भ्रमित होता रहता है कि वो तो मूरख है और ये ग्रन्थ तो विद्वानों के लिखे हैं तो शायद यही सत्य होगा लेकिन बेचारा नहीं जानता कि ये कितनी बड़ी साजिश है। जो भी लोग इस बात का प्रमाण चाहते थे कि ये जैन राक्षस शब्दों में हेराफेरी करते हैं वो अक्ल के अंधे देख सकते हैं कि ये कुटिल राक्षस भड़ास पर भी ये काम करने में जुटा है ताकि भ्रम पैदा कर सके और इसका सरपरस्त वो पाखंडी महावीर सेमलानी अब सामने न आएगा इस बात के स्पष्टीकरण के लिये। पूर्णिमा वर्मन जी चूंकि सत्य से अपरिचित हैं जो ये मानती हैं कि हम अनूप मंडल वाले अमेरिका पर लादेन द्वारा कराये गए हमले के लिये भी जैनों को दोषी ठहराएंगे तो जरा इस हमले की हकीकत हमारे एक खोजी पत्रकार भाई श्री प्रवीण जाखड़ के ब्लाग की पोस्ट पर श्रंखलाबद्ध लेख पढ़ें http://praveenjakhar.blogspot.com/2009/06/911.html फिर उसके बाद यदि सत्य स्वीकारने का साहस है तो अवश्य चर्चा करें वरना शान्ति से हमारे प्रयास को सहयोग करें यदि सहयोग न कर सकें तो तटस्थ रहें और ध्यान रखिए कि भाई प्रवीण जाखड का अनूप मंडल से अब तक कोई संबंध नहीं है। लोक संघर्ष के भाई सुमन जी ने जो भी लिखा है क्या आप सबको लगता है कि वह किसी स्वार्थ,लालच या दबाव में लिखवाया गया है? अरे मेरे मासूम भाई-बहनों ! सुमन जी कोई बच्चे नहीं है कि उन्हें हमने लालीपाप या चाकलेट देकर बहका लिया है। भाई सुमन जी ने जो लिखा है पूरे विवेक से लिखा है। अनूप मंडल सत्य स्वीकारने और सत्य के साथ खड़े होने के इस साहस के लिये भाई सुमन जी को सादर नमन करता है। जिस राक्षसी कुकर्म का हम खुलासा कर रहे हैं वो दो चार दिन का नहीं है हजारों सालों से दैत्य,दानव,राक्षसों द्वारा बड़े ही छिपे तरीके से करा जा रहा है इसलिये आप लोग अधीर न हों हर चाल खोली जाएगी इन दुष्टों की फिर देखना आप ही इन्हें जूते मारेंगे जब आप इनकी अहिंसा के ढकोसले को जान जाएंगे।
जय जय भड़ास
जय लोकसंघर्ष
जय नकलंक

2 टिप्पणियाँ:

दीनबन्धु ने कहा…

पकड़ में आया झूठ..... अब महावीर सेमलानी मुंह काला करके न आएगा वकालत करने कि ये तो हम जैन लोग गलती से ऐसा कर देते हैं फिर हगा हुआ गोबर लीपते हैं अहिंसक और विनम्र बन कर
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

बहुत ही उचे दर्जे के कलाकार हो अनूप जो की हर बात को अपना नजरिया दे कर पेश करते हो , जो बात पकड़ कर तुम दुनिया का चूतिया बना चाहते हो वो मै अपनी अगली पोस्ट मे तुम्हारी सोच को नंगा करते हुए दे चूका हु / उस का जवाब देना

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