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अमित जैन तुम सच्चे राक्षस हो

सोमवार, 15 अगस्त 2011

हम अमित जैन को उनके समुदाय की सही पहचान का प्रतिनिधित्व करने के लिये हृदय से धन्यवाद करते हैं। आप सब देख रहे हैं कि वो अपने पुराने ढर्रे पर वापिस आ गये हैं। आप पूरी दुनिया में बैठे भड़ासे के विद्वान पाठकों ने देखा कि जब अमित जैन अपने राक्षसपन की चरम सीमा पर आकर संचालक आदरणीय डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी को ही भलाबुरा कहने लगा और अति कर दी कि बेटियों-माँओं पर भी आपत्तिजनक बातें लिखने लगा। इस पर डॉ.साहब ने लिखा कि शायद तुम हमारे स्वभाव को कमज़ोरी या मजबूरी समझ रहे हो कि हम सह रहे हैं और तुम अति करे जा रहे हो below the belt वार करना हमारे स्वभाव में नहीं है और न ही सहना लेकिन लड़ना आता है और बचाव करना तो बचाव कर रहे हैं लेकिन तुम्हें रोकना होगा। इस संदर्भ में रामचरित मानस(गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित राक्षस कपटमुनि हेमचंद्र रचित "जैन रामायण" नहीं) की बात याद आती है जिसमें बताया गया है कि इस तरह के दुष्ट किस आचरण से सही होते हैं

"विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत
बोले राम सकोप तब भय बिन होय न प्रीत"
बहन आयशा जी के लगातार इन राक्षसों द्वारा अपमान के कारण कोप-क्रोध का आचरण जो कि डॉ.साहब ने अपनाया था वह उनके व्यक्तित्व को पूरा दर्शाता है कि वे अवतारी पुरुष हैं उसके बाद उन्होंने अपने आचरण से इस दुष्ट को क्षमा कर सहज स्वीकार भी लिया। रही बात राक्षसों की तो जब जब देवताओं ने उन पर दबाव बना दिया है वे विनम्रता का नाटक करने लगे हैं ये हम इतिहास से देख सकते हैं।
अनूप मंडल इसी तरह इन राक्षसों की सही पहचान आप सब मानव बंधुओं के सामने लाने के लिये कटिबद्ध है।
अमित जैन तुम यदि हमारा कमेंट हटा दोगे तो भी क्या होने वाला है जैसा कि तुमने अपनी पिछली पोस्ट में करा है उससे पता चल गया कि तुम इससे अधिक क्या कर सकते हो।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी की माँ की हत्या के पीछे के लोग क्यों चाहेंगे कि रहस्य खुले?

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

आदरणीय डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी की माताजी की काले जादू के कुप्रयोग से अत्यंत क्रूरतापूर्ण तरीके से हत्या कर दी गयी। इस विषय पर काले जादू के अस्तित्व को झुठलाने के लिये जैन लोग जिस तरह से आगे आए उससे पता चलता है कि सचमुच ये जिनों (पैशाचिक शक्तियों) के उपासक नहीं चाहते हैं कि काले जादू के ऊपर जिस तरह से इन लोगों ने हजारों बरसों में आधुनिकता के नाम पर पर्दा डाल दिया है वह उठे और इनका खूनी चेहरा सामने मनुष्यों के सामने आए। दानव देववंशी मानवों में जिस तरह से घुसे हुए हैं वह यदि सामने आ गया तो इनके काले जादू का भी रहस्य खुल जाएगा। चाहे इस्लाम को मानने वाले मुसलमान भाई-बहन हों, हिंदू भाई-बहन हों या फिर ईसाई भाई-बहन या अन्यान्य धर्मों को मानने वाले लेकिन इनमें से एक भी ऐसा नहीं है जो कि श्रम के महत्त्व को नकारता हो लेकिन नग्न जिनों, पिशाचों और बुरी मानवेतर शक्तियों के अस्तित्व के होने से कभी इन्कार नहीं करते। मुस्लिमों के पवित्र ग्रन्थ कुरान शरीफ़ में तो जिनों के बारे में बहुत विस्तार से लिखा है।


काले जादू में ये राक्षस पैशाचिक शक्तियों को गन्दे तरीकों से प्रसन्न करके अपने काम करवाते हैं। आप देखिये कि विज्ञान की आधुनिकता की आड़ में भ्रम फैलाने वाले यही जैन भाग्य बदलने वाले रत्नों, कंकड़ों- पत्थरों के व्यवसाय में जुड़े मिलेंगे। ये तात्कालिक तौर पर आपके काम बनाने के लिये राक्षसी अनुष्ठान कर के आपको प्रभाव में ले लेते हैं आप सोचते हैं कि इस कीमती कंकड़ से भाग्य बदल रहा है लेकिन कुछ समय बाद सब फ़ुस्स हो जाता है और आपके कर्म आपके साथ रहते हैं।


लोगों की काले जादू के प्रयोग से हत्या तक करा देना इनके लिये आसान काम है लेकिन ये इस पर चर्चा हो तो भी बीच में आधुनिकता लेकर कुद पड़ते हैं और विषयान्तर कर देते हैं कि कहीं देववंशी मानव इस रहस्यमय विषय पर शोध करके कुछ जान गए तो हमारी स्वर्ग रूपी धरती से इन्हें मार कर भगा दिया जाएगा इसलिये चाहे अमित जैन हों या प्रवीण शाह ये कभी नहीं चाहेंगे कि इस विषय पर विचार-विमर्श हो।


भड़ास के दुनिया भर में फैले पाठकों ने पिछले आलेखों में देखा है कि ये दोनो राक्षस किस तरह भड़ास के मंच पर घुसे हैं और तमाम बातें करके कभी अमित की पत्नी का विषय, कभी ब्लॉगर के मेन्टेनेन्स के दौरान दो आलेख गायब होने की बात, कभी प्रवीण शाह का शैतान बन जाना, कभी प्रवीण शाह द्वारा आदरणीय डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी के कमेंट के बारे में झूठ लिख कर सबको भ्रमित करने का प्रयास करना, कभी भाई शम्स तबरेज़ और भाई मुनेन्द्र सोनी जी को अपशब्द लिखना, कभी बहन आयशा के बारे में गन्दी बातें लिखना आदि आदि.... लेकिन कभी इन दुष्टों ने न तो डॉ.साहब की बातों का जवाब दिया और न ही हमें माताजी की दुःखद मृत्यु के रहस्य पर चर्चा करने दी। इन दोनो से जब भी पूछा गया कि ये आदरणीय डॉ.रूपेश जी द्वारा बनाए वीडियो की जाँच कैसे करेंगे तो ये मक्कारी से चुप्पी साध जाते हैं। सभी अनूप मंडल के भाविकों द्वारा भड़ास के मंच को प्रणाम है कि हमें हमारी बात को स्पष्टतः रखने का अवसर दिया है। हम अपनी बातें रखते हैं यदि किसी को आपत्ति हो तो इस देश के कानून के अनुसार हमारे ऊपर मुकदमा करे लेकिन प्रवीण शाह नहीं चाहता कि ये बातें जनता के सामने आएं वरना इनका रहस्य खुल जाएगा इसलिये ये हमें पीछे दबाए रखना चाहते हैं।


जय नकलंक देव


जय जय भड़ास

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अनूप मंडल और शम्स के मिलन की ख़ुफ़िया तस्वीर आपने देखी है ?

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011


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काले जादू के विमर्श को तुम सोच रहे हो कि भटका लिया तो तुम्हारी गलतफ़हमी है

गुरुवार, 19 मई 2011

प्रवीण शाह तुम्हें लगता है कि तुम अपना मुंह छिपा कर अपनी धूर्तता भी छिपा लोगे तो तुम अव्वल दर्जे के जड़बुद्धि हो। तुम्हारे कपट का रोज ही भड़ास पर खुलासा होता है लेकिन तुम इतने निर्लज्ज हो कि हर संभव कोशिश में लगे हो कि अपना मायावी पाप छिपा सको।
आदरणीया बहन मुनव्वर सुल्ताना जी ने मुलाकात का जो स्नेह पूर्ण समय दिया उसके लिये हम सभी अनूप मंडल के भाविक उनके आभार को व्यक्त करने के लिये शब्द नहीं जुटा पा रहे हैं।
काले जादू के विमर्श को तुम सोच रहे हो कि भटका लिया तो तुम्हारी गलतफ़हमी है विमर्श समयानुसार जारी रहेगा। भड़ास ही वो वैश्विक माध्यम है जिस पर हम बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकते है जिधर तुम्हारा कपटजाल कामयाब नहीं है। अंग्रेज के समय जो गुहार तुम्हारे मायाजाल से छुटकारा दिलाने की लगाई गयी थी वह अब कहीं जाकर रंग ला रही है, अवतार स्वरूप संचालक आदरणीय़ डा.रूपेश श्रीवास्तव जी ने हमें अपनी बात रखने का एक विश्वस्त मंच प्रदान करा है जिस पर हम दानवीय सोच का पर्दाफ़ाश कर रहे है और लोगों में इस बात की चेतना लाने का जो मिशन लगभग सवा सौ साल पहले शुरू हुआ था अब धीरे-धीरे रंग पकड़ रहा है। तुम्हारी बौखलाहट दिख रही है राक्षसी चेहरे से मुखौटा हट रहा है, तुम्हारी झूठी और मक्कारी से भरे अहिंसा के दिखावे की चमड़ी उधड़ रही है। तुम कितने हिंसक और भयानक हो ये सत्य तथ्यात्मक रूप में दुनिया के सामने लाए जाने के लिये हम भड़ास के मंच को बारंबार नमन करते हैं। हम प्राणप्रण से से तुम्हारे दानवीय स्वप्न "जयति जिन शासनम" को पूरा होने से रोकने में अवश्य सफल होंगे। धरती माता कभी भी जिनों,रक्तपिपासु नंगे पिशाचों, दानवों, असुरों, राक्षसों के कब्जे में नहीं आने देंगे।
जय जय भड़ास
जय नकलंक देव

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ज्यादा मक्कार कौन है ये उर्दू वाला रेहान अंसारी या फिर अमित जैन और प्रवीण शाह?

सोमवार, 16 मई 2011

ये समझ में नहीं आ रहा है कि ज्यादा मक्कार कौन है ये उर्दू वाला रेहान अंसारी या फिर अमित जैन और प्रवीण शाह?
जैसे अमित जैन को कई बार कहा कि तुम अपनी कथित तौर पर हटा दी गयी पोस्ट और अनूप मंडल के कमेंट के लिये गए स्क्रीन शॉट को दोबारा पोस्ट करे और अपनी बीवी के साथ वाली प्रोफ़ाइल तस्वीर भी भेजे लेकिन जब उसे खुद डा.रूपेश साहब ने कस कर खींचा तब जाकर उसने वह बात पोस्ट करी। तस्वीर अब तक नहीं दिखाई दुनिया को कि बीवी के साथ गलबहियाँ डाल कर पहले खुद फ़ोटो लगाएगा लेकिन जब पकड़ा जाए तो बीवी के अपमान का रोना रोने लगा और प्रवीण शाह ने भी उसके खूब आँसू पोंछे।
प्रवीण शाह डा.रूपेश तो लिख चुके हैं कि जो पोस्ट हटाने का आरोप तुम लगा रहे हो उन्हें पचासों बार क्यों नहीं पोस्ट करते। लज्जा आनी चाहिए जो कि डा.रूपेश जी पर स्मृतिलोप का आरोप लगा रहे हो लेकिन तुम ठहरे निरे बेशर्म....
जय जय भड़ास

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सच्चे का बोलबाला झूठे का मुंह काला

शनिवार, 14 मई 2011

अमित जैन और प्रवीण शाह ने भड़ास पर आकर जिस तरह से दिल और दिमाग में अटकी बातों को निकाल कर मन हल्का कर लेने वाले मंच पर अपनी मक्कारियों के दस्त करे हैं उसे देख कर मन करा कि थोड़ा अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दूं। झाड़ू उठा कर मंच को साफ़ करना जरूरी था तो मैं बिना देर करे आ गया। प्रवीण शाह बौखला कर भड़ास पर सबको अनूप मंडल कह कर अपना मन हल्का कर रहा है और अमित जैन है कि अनूप मंडल और संजय कटारनवरे को भठियारिनों की तरह पानी पी-पी कर कोसने में लगा है। अब तो दोनो पर तरस आने लगा है। बेचारा प्रवीण शाह जितना हो सकता है अपनी तर्कशक्ति का प्रयोग करके संचालकों को ही अनूप मंडल का भाविक सिद्ध करने पर तुला है क्या करे और कुछ मार्ग ही नहीं दिख रहा है उसे। बड़े भइया डा.साहब ने इसके "शैतान", भूत, पिशाच बनने के सारे मुखौटे उतार कर असल चेहरा दिखा दिया कि सचमुच महागधे हो जैसा को संजय कटारनवरे ने बताया है। मुझे तो ये अनूप मंडल का भाविक कह चुका है अब संजय कटारनवरे को इसके बाद एक-एक करके बस खुद और अमित जैन को छोड़ कर सब भड़ासियों को अनूप मंडल का भाविक कह देगा, मजा आ रहा है इसकी छटपटाहट देख कर। तर्क की बात करने वाला ईश्वर विरोधी है यानि कि अगर ये जैन है तो मैं अनूप मंडल का भाविक.... है न मजेदार समीकरण।
बेचारा अमित अपनी हालत के लिये कार्टून इंटरनेट पर तलाश रहा होगा। जल्द ही अपनी सुलगती हुई पिछाड़ी लेकर टपकेगा। हम सब काले जादू और उसमें जैनों के योगदान पर चर्चा करें तो अच्छा रहेगा प्रवीण शाह और अमित जैन उस चर्चा में सक्रिय भाग ले सकेंगे सुबह से शाम और रात से सुबह तक "अंधविश्वास-अंधविश्वास" की माला का जाप करते हुए ;)
जय जय भड़ास

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मंगलवार, 10 मई 2011

प्रवीण शाह के बारे में खुद उसकी बात जो उसने अपने प्रोफ़ाइल पर लिख रखा है:-
मेरे कुछ मित्र मुझे ईश्वर द्रोही, धर्म विरोधी, इस्लाम विरोधी, हिन्दू विरोधी, ईसाई विरोधी आदि आदि न जाने क्या क्या कहते हैं, जबकि असलियत में मैं केवल कुतर्क,अतार्किकता व अवैज्ञानिकता का विरोधी हूँ...जब तक आप कोई तार्किक या समझ आने वाली बात कह रहे हैं...मैं भी आपके साथ हूँ...पर, यदि आप कोई अतार्किक बात कह रहे हैं या ऐसा कुछ कह रहे हैं जिसका हकीकत में कोई अर्थ ही नहीं निकलता...(जब आप कुतर्क कर रहे हों, अवैज्ञानिक या अतार्किक बातें कह रहे हों तो आपकी बातों से कोई भी अर्थ नहीं निकलेगा, यह निश्चित है!)...तो जहाँ तक मुझसे बन पढ़ेगा मैं आपका विरोध करूँगा...और मेरे इस कृत्य के लिये आप मुझे कुछ भी कह सकते हैं ! एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ और एक मध्यवर्गीय जीवन जी रहा हूँ...काम लायक शिक्षा भी ली ही है... बाकी कुछ खास नहीं है मेरे पास अपने बारे में लिखने को ...
१.क्या जैन विरोधी भी कहते हैं तुम्हारे मित्र?२.तर्क और वैज्ञानिकता की सीमा का निर्धारण कैसे करते हो, जो तुम्हें पचे वह तर्क और वैज्ञानिकतापूर्ण बाकी सब बकवास??३.तुम अपने प्रोफ़ाइल में लिखने में हिचकिचाते हो कि तुम सेना(कौन सी???) में मेजर थे ग्यारह साल पहले यानि कि तीस साल की उम्र में मेजर बन कर रिटायर हो गये थे तो फिर आई.डी. क्यों छिपाते हो क्या सेना से भगोड़े हो??४.किस बटालियन में थे ये भी बताने में तर्क या कुतर्क महसूस होता है?५.जनगणना में अपने आप को किस धर्म से संबद्ध बताया हमने तो खुद को हिंदू बताया था और जो भाविक मुस्लिम हैं उन्होंने मुस्लिम लिखाया है।
जय जय भड़ास
जय नकलंक देव

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बस यही देखना था अमित जैन कि तुम किस हद तक गिर सकते हो

डा.रूपेश श्रीवास्तव जी की माताजी की मृत्यु के विषय में मैंने कभी ये नहीं कहा कि उनके द्वारा बनाया गया वीडियो सत्य हो सकता है लेकिन मैंने ये जरूर कहा है कि डा.रूपेश जी की चौकस नज़र को धोखा नहीं दिया जा सकता है। जो शख्स खुद ही उस तांत्रिक पर भरोसा न करके वीडियो कैमरा लेकर बैठा है और फिर बने हुए वीडियो पर भी यथासंभव प्रयास कर रहा है कि इस मामले को सुलझा सके तो प्रवीण शाह, प्रकाश गोविन्द और अमित जैन एक ही रट लगाए पड़े हैं कि ये सारे के सारे लोग अंधविश्वासी हैं और प्रवीण शाह ने तो तर्क की हद कर दी ये लिख कर कि सारा का सारा भड़ास ही अनूप मंडल के कब्जे में है। अमित जैन और प्रवीण शाह ने पूरा जोर लगा दिया है कि विचार-विमर्श की दिशा को येन-केन-प्रकारेण मोड़ दिया जाए। प्रवीण शाह लिखते हैं कि सत्य सांई बाबा के वीडिओज़ में उनकी हाथचालाकी पकड़ में नहीं आती लेकिन जब उन्हें रगेदा तो पल्टी मार गए और दूसरा राग अलापने लगे कि अमित की बीवी की बेइज़्ज़ती कर दी गयी और संचालक कुछ नहीं बोले। ये सब पमाड़ा इस लिये करा जा रहा था कि विचार विमर्श की दिशा मोड़ी जा सके जबकि ऐसा कुछ था ही नहीं, अमित ने मेरी माताजी के लिये जो लिखा उस पर मुझसे पहले भड़ास के सजग और निष्पक्ष संचालक डा.रूपेश श्रीवास्तव जी ने आपत्ति जता दी।
डा.रूपेश श्रीवास्तव जी की माताजी की तंत्र-मंत्र द्वारा रहस्यमय तरीके से कर दी गयी नृशंस हत्या से संबंधित पोस्ट इन कड़ियों पर पढ़ें ताकि अमित जैन जैसे लोग इस विषय को भटका न सकें।

इस रहस्यमय नृशंस हत्या के खुलासे की पहली कड़ी- भाग १

जिन्हें ये हत्या मात्र मनगढंत कहानी लग रही है वे इस दूसरी कड़ी को भी पढ़ें- भाग-२

डा.रूपेश जी की माता जी की मृत्यु नैसर्गिक नहीं बल्कि अत्यंत क्रूर हत्या थी- भाग 3
डा.रूपेश जी की माता जी की मृत्यु नैसर्गिक नहीं बल्कि अत्यंत क्रूर हत्या थी- भाग 4

डा.रूपेश जी की माता जी की मृत्यु नैसर्गिक नहीं बल्कि अत्यंत क्रूर हत्या थी- भाग 5

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी की माता जी की रहस्यमय हत्या पर एक बुजुर्ग भड़ासी का शक-शुबहा भाग -6


अब यही अमित जैन भागने से पहले उन्हें बदनाम करने की कुत्सित योजना बना कर चल रहा है लेकिन याद रख धूर्त कि तू और तेरे मक्कार वकील के षडयंत्रों को यहां सब समझ रहे हैं। अपनी बीवी के साथ गलबहियों वाली तस्वीर प्रकाशित करने की बात से अब तेरी सच्चाई की हवा निकल रही है क्या बात है अब अपनी पोस्ट के साथ कार्टून नहीं लगा रहा या दस्त लगने लगे?
जय जय भड़ास

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प्रवीण शाह और अमित जैन मुद्दे को भटका कर खुश हो रहे हैं कि चलो काले जादू की बात खत्म हुई

डॉ।रूपेश श्रीवास्तव जी ने जब अमित जैन द्वारा संजय कटारनवरे की माताजी के बारे में बेहूदा तरीके उनकी पैदाइश के बारे में इंटरव्यू लेने की बात पर आपत्ति करी तो तुरंत इस कुटिल ने अपना पैतरा दिखाया कि अनूप मंडल ने भी तो लिखा था कि ये अपनी पत्नी के साथ गलबहियों में व्यस्त है जबकि इसने खुद ही अपनी पत्नी के साथ गलबहियां डाल कर फोटो अपने प्रोफ़ाइल पर लगा रखी थी अब बार बार कहने पर भी कि उस फोटो को दिखाओ कि अनूप मंडल ने क्या गलत लिखा था तो डॉ।साहब के साथ ही सबको भाड़ में जाने की बात लिख रहा है।
इसे लगता है कि इस मुद्दे को तूल देकर यह और वकील बना प्रवीण शाह जो कि बड़ा तार्किक है काले जादू के विचार विमर्श से भटका लेंगे। प्रवीण शाह क्यों नहीं अमित को कहता कि अपनी पत्नी के साथ वाली वह फोटो प्रकाशित करके चर्चा करवा लो ताकि अनूप मंडल के लोगों से नाक रगड़वा कर माफ़ी मंगवाई जा सके?प्रवीण शाह तो त्रिकालदर्शी भी है वो तो ये भी जानने का दावा कर रहा था कि संजय कटारनवरे की आड़ में कोई दूसरा है तो जरा वैसे ही ये भेद भी खोले न जैसे कि मुझे जबरन अनूप मंडल का भाविक होने का दावा करा है इसने। यदि मैं अनूप मंडल का भाविक हूं इसके अनुसार तो इसकी हरकतों और सोच से तो मुझे भी ये अनूप मंडल वाला "जैन" ही लगता है प्रवीण शाह तुम जैन हो।
जय जय भड़ास

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अमित जैन विषय भटका कर किधर ले आया यानि काले जादू की बात अभी भी पीछे रह गयी

सोमवार, 9 मई 2011

हमेशा की तरह से जो हम सब कहते आए हैं कि राक्षस हमारे समाज में ही हमारे जैसे ही दिखते हुए रहते हैं और खुद को छिपाए रहते हैं। सब जानते हैं कि जब भी कोई ऐसी बात निकलेगी कि इनकी दानवता के असल परिचय से पर्दा हटाने का प्रयास करा जाएगा ये विषय को भटकाने का पूरी ताकत से प्रयास करेंगे। इसमें कुछ सामने आकर जैसे प्रवीण शाह और कुछ छिपे दानव जैसे कि कुमारी शालू जैन और सुरेश वर्मा जैसे छद्म नामों से इन्हें सहयोग करेंगे।
विषय था आदरणीय डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी की स्वर्गीय माताजी की तंत्र-मंत्र के प्रयोग से कर दी गयी क्रूर हत्या का लेकिन जब इस गम्भीर विषय पर हम सब शोध की बात करते हुए विमर्श को आगे बढ़ा रहे थे तो ये अपनी कुटिलता अपनाते हुए कभी चुटकुले लिखता था कभी कार्टून बनाता था और एक ही रट लगाए रहता था कि ये सब अंधविश्वास है। इसकी इस कुटिलता में इसके साथ प्रवीण शाह खड़ा है जिसने अब तक शोध की बात में कोई ऐसी बात प्रस्तुत नहीं करी जो कि ये सिद्ध कर दे कि ये सब अंधविश्वास है, इसने उस हत्या को बड़ी ही कुटिलता से "पपीता प्रकरण" नाम दे दिया ताकि कोई नया पाठक इस विषय को समझ ही न सके कि यह मुद्दा एक क्रूर हत्या से जुड़ा था। अभी तो भड़ास के मंच पर इन राक्षसो की तमाम करतूतें उजागर होनी बाकी हैं लेकिन आप सब जान गए हैं कि इनकी कार्यपद्धति क्या है। प्रवीण शाह नहीं चाहता कि अनूप मंडल के खिलाफ़ कोई कानूनी कार्यवाही करी जाए क्योंकि इससे इनकी करतूतें जनता के सामने आने लगेंगी हम तो सीना ठोंक कर कहते हैं कि यदि हम गलत हैं कि ये राक्षस लोग हैं तो हमें फाँसी दे दी जाए।
जय जय भड़ास
जय नकलंक देव

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प्रवीण शाह जी विमर्श आगे बढाइये और पिछली बातों पर गौर करें

बुधवार, 16 मार्च 2011

प्रवीण जी निवेदन करना चाहता हूं कि मैं स्वयं एम.डी., पी.एच.डी. हूं और अंधश्रद्धा निर्मूलन के तमाम कार्यक्रमों में डेमोन्सट्रेटर रह चुका हूं अपने कालेज के दौरान और इन कार्यक्रमों में हम सबके संरक्षक जिले के कलेक्टर हुआ करते थे। हाथ की सफ़ाई या इस तरह की ट्रिक्स में तो हमारे सारे ग्रुप को महारत हासिल थी। ये बात अलग है कि अब सब अपने अपने रोजी रोजगार परिवार में उलझ गए हैं।
एक विनती और है कि यदि अनूप मंडल ने एक भी बात असत्य लिखी होती तो मैं स्वयं उसका तत्काल खंडन कर देता। मैं संभावनाओं पर नहीं ठोस परिणामों के आधार पर जीवन को देखता हूं। मेरी निजी प्रयोगशाला रही है। यदि मुझे इस पूरे प्रकरण में तनिक भी श्रद्धा रही होती तो मैं हाथ जोड़ कर पूजा में बैठा होता न कि मूवी कैमरा लेकर वीडियो बना रहा होता।
अंतिम बात कि आप स्वयं पपीते पर ऐसा प्रयोग करके देख लीजिये या आपकी नजरों में कोई illusion artist हो जो कि मेरे ग्रुप के सामने ऐसा कर सके तो मैं इस वैश्विक मंच से उसे या आपको एक लाख रुपए का नगद प्रोत्साहन पुरस्कार देने की घोषणा करता हूं बस सारी परिस्थितियां पूर्ववत रहेंगी ये बात दीगर होगी कि इस बार कोई मरेगा नहीं, है न? मेरा ये पुरस्कार साइंस की तरक्की के लिये होगा न कि अंधश्रद्धा के पोषण के लिये।
जब तक कोई रहस्य नहीं खुलता वह जादू है जब खुल गया तो तर्कबद्ध तरीके से साइंस मे दर्ज़ हो जाता है। मैं प्रयोगवादी प्रकृति का हूं और इसके लिये साइंस के मौजूदा तरीकों को आजमाता हूं आपके पास यदि कुछ अधिक उन्नत तरीका हो तो अवश्य सूचित करें।
श्मशान में कौन क्या कर रहा है ये विमर्श का विषय होगा लेकिन फिलहाल नहीं। आशा है कि आप विषय को परिहास में न उड़ाएंगे।
सादर
जय जय भड़ास

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रणधीर सिंह सुमन क्या अब nice लिखना भी भूल गये खटीमा सम्मेलन के बाद???

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

सबको याद होगा कि जब जब भड़ास पर मुद्दों को किसी परिणाम कारक स्थिति में लाने तक का मौका लगा है वो लोग मुँह काला करके भाग जाते है जो विचार-वेश्याएं पहले भड़ास को अपना कोठा समझ कर लाली पाउडर लगा कर यहाँ से अपने लंपट ठरकी दुराचारी शोषक ग्राहकों को आवाज दिया करती थीं चाहे वो गुफ़रान सिद्दिकी हों,अमित जैन हों या रणधीर सिंह सुम न। ये वो लोग रहे जो कि भड़ास पर आकर राजनीति की कबड्डी खेल रहे थे

लेकिन जब इन्हें पटका रगेदा गया तो थोड़ी चूँ-चाँ करी और फिर अपना मुंह काला करके भाग गए। गुफ़रान सिद्दिकी इस्लाम की कट्टरता का गाना गाता था और रणधीर सिंह सुमन साम्यवाद की पिपिहरी फूंकता था अब तो ये गोंद खाकर मुंह चिपका कर बैठ गए हैं। रणधीर सिंह सुमन ने तो मुझे अपने किसी ऐसे प्रतिद्वन्दी की पहचान से जोड़ दिया था जिसने कभी इसको घसीटा होगा लेकिन अब तो ये उसकी पहचान बता कर nice लिखने भी नहीं आ पाता। अमित जैन भी अनूप मंडल के सामने आकर सीधी बात करने से कतरा कर भाग ही जाते हैं और महीनों गायब रहते हैं। ऐसे लोगों के साथ अन्य जगहों पर भी क्या होता है एक उदाहरण सामने पेश कर रहा हूं।
जय जय भड़ास
संजय कटारनवरे
मुंबई

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जैन अल्पसंख्यक हैं या राक्षस ये मुद्दा सामाजिक है या न्यायायिक???

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

प्रवीण शाह जी पधारे इसके लिये आश्चर्य सहित आभार लेकिन क्या आप स्वामी असीमानंद या अजमल कसाबों के दिमागों में चलते अनर्गल विचारों को विमर्श का मुद्दा बना कर मात्र बहस करना चाहेंगे? विधि सम्मत नियम किसलिये बनाए जाते हैं ताकि जनसामान्य को ये समझ आ सके कि देश किस व्यवस्था के अंतर्गत चलता है और नागरिक हित क्या हैं न कि बस ब्लाग पर एक दूसरे के विचार जान लेने से और उसे उचित या अनर्गल ठहरा देने से बात साफ हो जाएगी। आज तक अनूप मंडल के लोगों ने जैनों पर जो भी आरोप(प्रमाण सहित सत्य/असत्य) लगाए हैं तब आप नहीं पधारे क्या इसके पीछे भी कोई रहस्य है? क्या आपकी नजरों में वे लोग मूर्ख हैं जो को राम या मोहम्मद को गाली देने या कार्टून बना देने पर रोक लगाने के लिये न्यायालय से गुहार करते हैं? क्या आपकी निजी राय में इस तरह के धार्मिक विवादों में न्यायपालिका की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिये??जैनों को अल्पसंख्यक मान कर उनके हितों पर न्यायापालिका की क्या भूमिका होनी चाहिये या उन्हें राक्षस कह कर मानव समाज से बाहर खदेड़ देना चाहिये?????
ऐसे सैकड़ों सवाल हैं जिनका उत्तर देने के लिये शायद अब आप दोबारा इस मंच पर नहीं पधारेंगे जैसे अमित जैन चुप्पी साध गए हैं।

जय जय भड़ास

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अमित जैन तुमने भी दस दिन से सांस नहीं ली लेकिन हम तुम्हें गाली नहीं देंगे

सोमवार, 17 जनवरी 2011

अमित जैन तुम एक प्रणाम करने योग्य जैन हो जो कि भले ही गाली-गलौज करते हुए विचार-विमर्श में इतने दिन तक मौजूद रहा, अपने हथकंडे अपनाता रहा लेकिन रहा तो पूरी दुनिया पर कई बार अधिकार कर लेने का दावा करने वाले जैनों में से कोई भी इतना बहादुर नहीं निकला कि हमारे विमर्श में टिक पाता। तुम गाहे-बेगाहे मंदिरों मस्जिदों की बातें करते हो या फिर हिंदू धर्म और इस्लाम की बातें करने लगते हो, चुटकुले लिखने लगते हो लेकिन जब भी हमने जैनों के बारे में अपने विचार लिखे तो तुम सामने आए साथ ही कई छद्मरूपों में भी आए। तुम हरबार मुंह की खाते हो तिलमिलाते हो लेकिन डट कर मुकाबला करते हो। हमने भड़ास के इतिहास में तमाम लोगों को इस मंच से भागते हुए देखा है क्योंकि जो लोग चेहरे पर मुखौटा लगा कर खुद को कुछ अलग जताने के लिये लिखते हैं वे भड़ास से भाग ही जाते हैं जो सच्चे हैं वे डटे रहते हैं तुम एक सच्चे व्यक्ति हो।
तुम भी लगभग दस दिनों से सन्नाटे में हो लेकिन हम तुम्हें गालियां नहीं देंगे क्योंकि हम समझते हैं कि तुम्हारा परिवार है जिसमें कि पत्नी बच्चे होंगे माता-पिता भाई बहन होंगे, समाज होगा, व्यवसाय होगा जिसके चलते व्यस्तता हो जाती है कि हम इंटरनेट पर नहीं आ पाते। ये भी संभव है कि तुम्हारी चुप्पी किसी राक्षसी कपटनीति का हिस्सा हो और तुम कुछ हमारे खिलाफ़ जुटा रहे हो तो भी हमें तुम्हारी प्रतीक्षा रहेगी हम तुम्हें गाली नहीं देंगे जैसे कि हम लोगों के दस दिन तक इंटरनेट पर न आने पर तुमने हमें गाली देना शुरू कर दिया था।
ये रही तुम्हारे लेख की कड़ी जिस पर पढ़ा जा सकता है कि तुम किस कदर बौखला कर गालियां देते हो
एक बात तुम्हारे लिये कि हाल ही में भड़ास के निष्पक्ष, निष्ठावान, वीर संचालकों ने भड़ास की साइडबार से ब्लागों से कड़ीबद्ध चित्र हटा कर ब्लागरोल लगा दिया है जिसमें इस्लाम की भयंकर निंदा करने वाले ब्लाग "भंडाफोडू" की कड़ी है साथ ही इस्लाम के प्रति पूर्ण समर्पित ब्लाग "हमारी अंजुमन" की भी कड़ी है। ये दोनो कड़ियां तुम्हें सहायता करेंगी कि तुम इस्लाम को धर्म समझते हो या अधर्म....... हमें तुम्हारे विद्वतापूर्ण वक्तव्य की प्रतीक्षा है।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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धन्यवाद अमित जैन मानव-दानव विमर्श में तुम सही रास्ते पर आ रहे हो

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

हम सभी अनूप मंडल के सदस्य हृदय से भड़ास के मंच की पवित्रता और संचालकों को प्रणाम करते है। हम सब इतने समय से सतत प्रयास रत थे लेकिन कोई मार्ग नहीं बन रहा था कि हम किसी जैन को सीधे विमर्श में आमने सामने ला सकें। भड़ास ने वो मार्ग खोल दिया और अमित जैन के रूप में एक विचारवान जैन सामने आ गया। अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के अनुसार उन्होंने पहले तो चिढ़ कर गाली-गलौज करी हमें तमाम उपमाओं से संबोधित करके अपनी कुंठा निकाली और फिर वही करा जो कि ये लोग सदियों से करते आ रहे हैं लेकिन सामने नहीं आ रहा था। इससे पहले तुमने अपनी राक्षसी प्रवृत्ति के चलते इस्लाम पर भी कीचड़ उछालने की कुचेष्टा करी है।
आप सब ने देखा कि जब हमने सत्यार्थ प्रकाश (स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित आर्य समाज का एक आदरणीय गृन्थ) का जिक्र करा तो अमित बौखला गये क्योंकि इससे पहले वे जानना चाहते थे कि किस जगह उन्हें सीधे "राक्षस" सिद्ध करा गया है। जब सत्यार्थ प्रकाश सामने लाकर उन्हें बताया कि आप साहस करके स्वामी दयानंद सरस्वती जी को भी चूतिया, गधा और कुत्ते का पिल्ला आदि कहने की हिम्मत करो तो उन्होंने तत्काल हिंदुओं की नस को पकड़ कर संग लेने की पलटी मार ली कि देखो देखो भाइयों स्वामी दयानंद ने तो पुराणों को भी गलत और बकवास बताया है। वेदों के बाद जब राक्षसों ने जान लिया कि मनुष्य अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिये अपने धर्मगृन्थों को ही आधार बनाते हैं तो ये राक्षस इस क्षेत्र में ऋषियों के वेष में भी घुस गए और मनुष्यों के आदरणीय देवी-देवताओं,पूर्वजों आदि के नाम पर ऐसे ऐसे मनगढ़ंत किस्से लिख कर प्रचारित कर दिये कि खुद देवताओं के वंशज मनुष्य भ्रमित होकर रह गए । अमित जैन ने तो मात्र एक ही पुराण की बात का जिक्र करा है हम कहते हैं कि आप शिवपुराण से लेकर विष्णुपुराण तक और लिंग पुराण से लेकर देवी पुराण तक उठा लीजिए सभी में ऐसी बेसिर-पैर की बातें मिलेंगी कि आप असहज हो जाएंगे लेकिन चूंकि आपके देवी-देवताओं के नाम से लिखी बातें हैं तो आप उन्हें तार्किक तौर पर स्वीकार न कर पाने पर भी श्रद्धावश माने रहते हैं लेकिन इसके चलते धर्म का स्वरूप विकृत होता चला गया।
सोचने की बात है कि वेदों को मानने वाले आर्यों में से विष्णु,शिव,राम,कृष्ण आदि की मूर्तियां पूजने वाले हिंदू कैसे उपज गये?? अवतारवाद का सिद्धांत कैसे समाज में प्रक्षेपित कर दिया गया?? निराकार प्रकाशस्वरूप बृह्म को मानने वाले(मुस्लिम भी नूररूपी एक अल्लाह को ही मानता है ये ध्यान दें जो कि क्रिस्तान भी मानते हैं यानि शुरूआती दौर में ये एक मत ही रहे हैं किन्तु बाद में इनमें भेद उपजाए गये हैं जो कि सप्रयास करे गए) थे।राक्षस सदा से ही स्वर्गरूपी धरती माता पर कब्जा करने को लालायित रहे हैं जिसके लिये ये इस तरह के जतन करते रहे हैं। इनकी माया समझ पाना इतना आसान होता तो आज हमें इतनी जद्दोजहद न करनी पड़ती।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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जैन धर्म को मानने वाले सचमुच ही पैशाचिक शक्तियों के उपासक हैं

सोमवार, 3 जनवरी 2011

भड़ास के ही मंच पर एक बार लिखा था कि "जिन" और पैशाचिक शक्तियाँ "जिन्न" अलग-अलग हैं और इस बात को शब्दों के खिलवाड़ से किसी जैन ने ही सिद्ध करने की कोशिश करी थी। आजकल अमित जैन को इस्लाम में खामियाँ इस लिये दिखने लगी हैं क्योंकि इस्लाम के जानने वालों ने इनकी राक्षसी शक्तियों को पहचान लिया इस्लामिक किताबों में "जिन"(जिसकी वर्तनी यानि स्पेलिंग होती है जीम के नीचे ज़ेर लगा कर नून, उर्दू जानने वाले इस बात को समझ सकते हैं) कहा गया है। यदि जिन्न लिखना होता है तो नून अक्षर के ऊपर तश्दीद लगाया जाता है। दर असल ये राक्षसों का खिलवाड़ ही है कि वे शब्दों में उलझा कर मानवता को भ्रमित करे रहें। ये जिनदेवताओं की उपासना करने वाले हमेशा से सपना देखते हैं कि दुनिया में जिन शासन हो जाए इसलिये ये हमेशा "जयति जिन शासनम" का नारा लगाते रहते हैं। इनकी धार्मिक सोच में ईश्वर, अल्लाह या गॉड जो कि सर्वशक्तिमान है उसको स्वीकारने की जगह जिनों को धर्म का आधार बनाया गया है। ये है बिना ईश्वर का धर्म........ अब ये धर्म है या अधर्म ये आप सब निश्चित करें।
भारत में जैन के रूप में पहचान लिये जाने वाले असल में राक्षसी और पैशाचिक शक्तियों की उपासना करते हैं। ये चाहते हैं कि संसार में पैशाचिक शक्तियों का राज्य हो जाए। सभी देववंशज मानवों से हाथ जोड़ कर अर्ज है कि ऐसे राक्षसों को पहचान कर इनकी हरकतों से सावधान हो जाएं।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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डा.रूपेश जी की माता जी की मृत्यु नैसर्गिक नहीं बल्कि अत्यंत क्रूर हत्या थी- भाग 5

इस रहस्यमय नृशंस हत्या के खुलासे की पहली कड़ी- भाग १

जिन्हें ये हत्या मात्र मनगढंत कहानी लग रही है वे इस दूसरी कड़ी को भी पढ़ें- भाग-२

डा.रूपेश जी की माता जी की मृत्यु नैसर्गिक नहीं बल्कि अत्यंत क्रूर हत्या थी- भाग 3
डा.रूपेश जी की माता जी की मृत्यु नैसर्गिक नहीं बल्कि अत्यंत क्रूर हत्या थी- भाग 4


अब तक आप विद्वानों ने हमारे अवतार स्वरूपी तारणहार डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी की माता जी की तंत्र-मंत्र के द्वारा अत्यंत क्रूरतापूर्ण तरीके से कर दी गयी हत्या के बारे में पढ़ रहे थे कि किस प्रकार उस तांत्रिक ने पपीतों में से कैसी-कैसी चीजें निकालीं। तंत्र-मंत्र को दकियानूसी और बेवकूफ़ाना सोच से जोड़ने वाले विद्वानों का अब तक साहस न हुआ कि इस विषय पर अपना मुंह स्पष्ट तौर पर खोलते। अब हम बताते हैं कि तांत्रिक के चले जाने के बाद क्या हुआ क्योंकि ये मामला सीधे ही भड़ास के संचालक से जुड़ा हुआ था जो कि स्वयं तमामोतमाम अंधविश्वासों के खिलाफ़ सीना तान कर खड़े रहते हैं। डॉ.साहब ने बाल्टी में भरे हुए सारे तांत्रिक सामान हड्डियां वगैरह एक एक करके बाहर निकाल कर कैमरे के सामने रखना शुरू कर दिया। जबकि उस तांत्रिक ने हिदायत करी थी कि उस सामान को हाथ न लगाया जाए। खुद उसने उस सारे सामान हड्डियों, बकरे के कटे हुए पैर आदि को पपीतों में से खुले हाथों से न पकड़ कर आक के पत्तों से पकड़ कर निकाला था। लेकिन हमारे भड़ासियों के सिरमौर डॉ.साहब को तो डराया ही नहीं जा सकता तो उन्होंने जिस तरह एक एक सामान बाहर निकाल कर दोबारा रखा उसका भी वीडियो उन्होंने आदरणीय बहन मुनव्वर सुल्ताना आपा को कैमरा पकड़ा कर बनवाया। इस पूरी सामग्री से दिमाग फाड़ देने वाली दुर्गंध उठ रही थी। मुनव्वर सुल्ताना आपा ने कैमरा सम्हाल रखा था और डॉ.साहब ने हर सामग्री का गहराई से निरीक्षण करा। जब कटे हुए पपीतों को बड़ी बारीकी से देखने पर भी ये न समझ आ पाया कि ये सामग्री उनके भीतर किस तरह रखी गयी है क्योंकि नंगी आँखों से तो वो जोड़ दिख नहीं रहा था जिसका संदेह करा जा रहा था कि इन पपीतों को किसी खास ट्रिक से काटा गया है और उनमें सामग्री भर कर चिपका दिया गया है।
इसके बाद अब जरूरत पड़ी आधुनिक तकनीक की सहायता की कि इस मामले को कैसे सिद्ध करा जाए कि ये तांत्रिक की चालाकी है कि हो सकता है उसने पूजा का नाटक करते हुए डॉ.साहब और उनके बड़े भाई की आँखों में धूल झोंक कर किसी तरह ये कारगुजारी कर दी हो। तकनीकी निरीक्षण के लिये डॉ.साहब के एक मित्र ने जो तरीका अपनाया वो ऐसा था जिसे कोई माई का लाल चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने MPEG फ़ॉर्मेट पर बने वीडियो चलचित्र को JPEG फ़ॉर्मेट में बदल कर कई लाख स्थिर चित्रों में तोड़ लिया। अब इन स्थिर चित्रों में से वे कई हजार चित्र छाँटं कर अलग कर लिये जिनमें कि पपीते दिख रहे थे। इन स्थिर चित्रों को विशेष सॉफ़्टवेयर की सहायता से करीब पचास गुणा बड़ा करके स्क्रीन पर देखा गया जिससे कि यदि कितनी भी बारीकी से इन फलों को काटा गया होता वह कटी हुई रेखा अपने मूल आकार से पचास गुणा बड़ी दिख कर उस तांत्रिक की पोल खोल देती लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। तस्वीरों का आकार सौ गुना तक बढ़ा कर देखने पर भी कुछ हाथ न आया। इस तकनीकी निरीक्षण के बाद तो बिना किसी हिचकिचाहट के कहा जा सकता था कि जो भी सामग्री उन पपीतों के भीतर से निकली थी वह उन्हें काट कर अंदर नहीं घुसाई गयी थी।
बड़े भाईसाहब श्री भूपेश जी इस सामग्री को जल्द से जल्द घर से बाहर फेंक देना चाहते थे क्योंकि एक तो वे यह सब देख कर कुछ बौखला से गये थे साथ ही इससे उठने वाली असहनीय दुर्गंध भी परेशान कर रही थी।
आगे जारी रहेगा तंत्र-मंत्र के रहस्य में उलझा ये विचार विमर्श जिसे कि कुछ दुष्ट और चालाक लोग जाहिलपन कह कर दबाना चाह रहे हैं क्योंकि इससे उनके खूंख्वार इरादे पता चलते हैं जिनपर अब तक पर्दा डाल रखा है............
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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विचार विमर्श की आवश्यकता क्या है? मुँहचोरी की जय हो !!

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

आजकल भड़ास पर एक बात देखने में आ रही है कि सामान्यतः जो समसामयिक विचार रहते हैं उन पर तो वैसे भी दूसरे ब्लागर मुंह मारते है लेकिन भड़ासी तो ऐसे मुद्दों पर झांकते तक नहीं है। ओबामा से सरकोज़ी तक और जूलियन असांजे से लेकर अमित जैन तक किसी पर कोई भड़ासी पता नहीं क्यों नहीं लिखता। विचार विमर्श करने की जरूरत क्या है सबसे अच्छा तरीका है कि जब कोई बात सवाल के रूप में सामने आ जाए तो कुछ दिन या सप्ताह मुंह छिपाए रहो बस लोग भूल जाते हैं उसके बाद फिर उल्टी-दस्त शुरू कर दो। विकीलीक्स तो बहुत दूर का विषय है हमारे डा.रूपेश श्रीवास्तव जी की माताजी के निधन के बाद अनूप मंडल ने अपने चश्मे से जो देख कर लिखना शुरू कर दिया उस पर भी ब्ला-ब्ला करने वाले किसी ब्लागर की हिम्मत नहीं हुई कि कुछ प्रतिवाद दर्ज कराए। हां ऐसा जरूर हुआ कि कोई अनूप मंडल का बाप आ गया कोई यमराज आ गया लेकिन सच्चे और ईमानदार विमर्श के लिये कोई सामने आने का साहस न जुटा सका। आजकल तो शायद यमराज को भी सर्दी लग गयी है और अनूप मंडल के बाप न जाने क्या कर रहे हैं बस एक अमित जैन भाई ही हैं जो अनूप मंडल की कस कर लेने में ताकत लगा रहे हैं वो भी बिना वैचारिक वायग्रा का सेवन करे। अनूप मंडल के लोग भी जब कुछ दिन तक लोगों का फ़ीडबैक देख लेते हैं तो नयी कड़ी लेकर अमित को दुखी करने आ जाते हैं। अच्छा है पेले रहो एक दूसरे को बाकी मुद्दे तो मुख्यधारा के ब्लागर चूस-चबा ही रहे हैं।
जय जय भड़ास

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अमित जैन अब कुछ चिरकुट सा चुटकुला या पाकिस्तान या ताजमहल के बारे में क्यों नहीं लिख रहे???

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

जैसे ही हमारे परम आदरणीय डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी की माताजी की दैहिक मृत्यु के सत्य को उजागर करने के लिये लिखना शुरू होता है कि वह एक नैसर्गिक मृत्यु नहीं बल्कि एक क्रूर हत्या थी जो कि काले जादू दे द्वारा करी गयी है तब तब अमित जैन उछल कर सामने आ जाता है और कुछ ऐसा करता है कि विषय भटक जाए। अभी देखियेगा कि हमें गालियाँ देने के साथ ही चुटकुला लिखेगा और कुछ पाकिस्तान या ताजमहल आदि के बारे में बकवास लिखेगा इधर उधर से चुरा कर। इसे लगता है कि इसकी इस कोशिश से हम लोग भटक जाएंगे तो ये महामूर्ख है लेकिन फिर भी ये प्रयास करना बंद नहीं करेगा जैसे आजकल इसने "ताऊ" नाम से छिछोरपन शुरू करा है। हम सब समझते हैं इसका पाखंड।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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अनूप मंडल जी डॉ.रूपेश श्रीवास्तव की स्वर्गीय माताजी की हत्या के प्रकरण को आगे बढ़ाएं

गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

आप सब जब इस बात को जानते हैं कि आपके विरोधी किस तरह की चालाकियाँ करके आपके सच और ईमान से डिगाने की कोशिश करते हैं तो फ़िर आप उनकी बातों में क्यों उलझ पड़े? आप सब लोग इतनी रहस्यमय बात को सामने ला रहे हैं इस के लिये मैं निजी तौर पर आपका आभारी हूँ। माताजी की मृत्यु नैसर्गिक न होकर एक रहस्यमय तरीके से करी गयी हत्या है इस राज़ को पूरी तरह से सामने लाइये किसी की बात में मत फंसिये। मैं चाहता हूँ कि डॉ.साहब मेहरबानी करके इस प्रकरण से संबंधित फोटोग्राफ़्स और वीडियोज़ को मुझे भी भेज दें। डॉ.रूपेश के भड़ासी व्यक्तित्व का मैं कायल हूँ वे ही ऐसा कर सकते हैं।
अनूप मंडल की जय
जय जय भड़ास

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