हिन्दुस्तान की एक झलक, झलक दिखला जा .......

मंगलवार, 16 जून 2009

एक मेल से ये तस्वीरें आयी, बयां कर गयी भारत की तस्वीर, ऐ सलाम डॉगको गाली देने वाले हकीकत को तो स्वीकारो, ना भी स्वीकार तो मेरा क्या हम भडासी भड़ास भड़ास करते रहेंगे।

नजरे इनायत......

क्या सवारी है, कहीं देखी है ?


भारतीय रेल की दूरदर्शिता .....


दूकान और मकान साथ साथ , देश की देशी क्यूँकी गांधी जी ने ही तो कहा था स्वदेशी बनो।


टी वी के लिए कुछ भी करेगा।


हम प्रेमी, प्रेम के या किसी और के नज़ारे छाता के सहारे......


बिजली हो या ना हो तारों का जंजाल ये ही तो है हमारा भारत महान।
जय हो
जय जय भड़ास






1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अरे भाई ये हुई न जरा कस के भड़ास-भड़ास, मजा आ गया; हर तस्वीर साक्षात भड़ास है
जय जय भड़ास

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