अनूप पहले पुरा पढो फ़िर लिखो

रविवार, 30 अगस्त 2009

अनूप सत्य सिर्फ़ ये नही है की स्वामी द्यानानद ने सिर्फ़ जैन धर्म के ही बारे मे सब कुछ लिखा हो , उन्होंने जैन , बौध , इस्लाम , इसाई , सनातन धर्म और भी काफी धर्मो के बारे मे लिखा है / और वे जानते थे की आप जैसे मूढ़ मति लोग इन बातो को ले कर समाज मे विद्वेष फलने का कार्य अवश्य करे गए , इस लिए उन होने आप जैसे लोगो के विषय मे पर्थम प्रथ की भूमिका के पाचवे पेरा को आप जैसे लोगो को ध्यान मे रख कर ही लिखा है / सभी गुनी जन इस बात को पढ़ सकते है (सत्यार्थ परकाश - पेज नम्बर -१ भूमिका )

स्वामी जी नए अपने ग्रन्थ के १२ वे भाग मे जैनमत , बोध धर्म ,चार्वाक मत को ले कर लिखा है
स्वामी जी ने अपने ग्रन्थ के १३ वे भागः मे इसाई मत को ले कर लिखा है
स्वामी जी ने १४ वे भागः मे मुसलमान के बारे मे लिखा है और १४वे भागः के अंत मे उन्होंने आर्यों के वेदः के बारे मे लिखा है
सिर्फ़ कह देने से किसी ग्रन्थ का आध्याँ नही हो जाता , यदि तुम ने ये ग्रन्थ पढ़ा है तो तुम्हे न सिर्फ़ जैन मत , बल्कि इसाई धर्म , मुस्लिम धर्म , चार्वाक मत इत्यादि का भी उलख करना चाहए था
लेकिन तुम तो सावन के अंधे हो जिसे हर तरफ हरा ही हरा नजर आता है , सिर्फ़ पढने के सौक के बारे मे जवाब दिया बाकि की बात गुल कर गए , तुमसे जो सवाल किए गए उन का कोई जवाब ही नही दिया , तुम जो तकनिकी खेल खेल रहे हो अनूप उसे पुरी तरह से खेलो , ख़ुद ही टिपण्णी करते हो , ख़ुद ही फ़ोन करते हो , ख़ुद ही उस तकनीक का पर्दर्शन करते हो , सारा कुछ ख़ुद करते हो , और कोम्पुटर की इतना तकनीकी कोशल है तो ,अब तक टिपण्णी भेजने वाले का ip पता , अब तक क्यो छुपा रखा है , कही न कही दाल काली है बच्चो , जितना ग़लत तुम करते जाओगे उतना सब को पता चलता रहेगा

भगवान तुम्हे सध्बुधि दे ,

इसी प्राथना के साथ आपका मित्र
अमित जैन

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अरे भाई अप लोग एक काम करिये कि पोस्ट भेजना छोड़ कर आपस में पटका-पटकी वाली लड़ाई लड़ लीजिये जो जीत जाएगा उसकी बात हम मान लेंगे। बस करिये यार कितना एक दूसरे को पेलेंगे? देश की सोचो जो दिन ब दिन दरिद्र हुआ जा रहा है और आप लोग हैं कि देव-दानव में उलझे हैं। इतना तो है कि अगर कोई मुझे भी इस कदर पेले तो मैं मान लूंगा कि मैं राक्षस,दानव, असुर, जिन, भूत, पिशाच, सुअर, कुत्ता, कमीना और जो आप चाहो वो सब मैं हूं लेकिन बस करो यार......। मान गये अमित भाई को जो कि पहले तो खुद को विनम्रता में आकर राक्षस स्वीकार बैठे लेकिन अब मोर्चा सम्हाले बैठे हैं खुद को मानव सिद्ध करने के लिये। यार अमित भाई आपकी ही ऊर्जा अनूप मंडल को ताकत देती है कि वो आपको कसकर पेले रहें, जब वो शांत हो जाते हैं तो आप उन्हें उंगली कर देते हैं और वो फिर आपको रगड़ना शुरू कर देते हैं। इस महाबौद्धिक शास्त्रार्थ का फल क्या निकलने वाला है?
जय जय भड़ास

मनोज द्विवेदी ने कहा…

AAP LOG JIS MAHABAHAS KO LEKAR LADE BAITHE HAI, AKHIR USKA ANT KYA HAI? JIS ITIHAS KO BAR-BAR KUREDKAR AP APNI BAT SAHI SABIT KARNE PAR TULE HAI. USE BHI TO AAP JAISE MAHAN LOGO NE HI LIKHA HAI. APNE DEKHA HAI UNHE LIKHATE HUE? MERA TO BAS YAHI MANANA HAI KI. JHOOT BOLANE WALA HI SABASE BADA DANAV HAI. USSE BADA DANAV DUNIYA ME KOI NAHI. KYONKI JHOOTH BOLTE HI SARE KUKRMA KHUD CHALE AATE HAI..AAP LOG BEHATAR SAMJH SAKTE HAI KI VASTAV ME DANAV KOUN HAI?

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