स्त्री जाति का सम्मान
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जंग सीमाओं पर नहीं, औरतों के शरीरों पर भी लड़ी जाती है ताकि मर्द अपनी हार का
गुस्सा या जीत का जश्न मना सकें! --मृदुलिका झा -
"13 साल की थी, जब खेत पर जाते हु...
3 घंटे पहले
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तृष्णा विराट आनंदित,
है नील व्योम सी फैली।
मादक मोहक चिर संगिनी,
ज्यों तामस वृत्ति विषैली॥
वह जननि पाप पुञ्जों की,
फेनिल मणियों की माला ।
उन्मत भ्रमित औ चंचल,
पाकर अंचल की हाला॥
छवि मधुर करे उन्मादित ,
सम्हालूँगा कहता जाए।
तम के अनंत सागर में,
मन डूबा सा उतराए॥
डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल "राही"
© भड़ास भड़ासीजन के द्वारा जय जय भड़ास२००८
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