वाह रे आदमी

रविवार, 4 अक्तूबर 2009

अमर उजाला २० मई
भदोही में दलित महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म
हिंदुस्तान ७ मई
दुराचार कर दो सगी मासूम बहनों की हत्या
हिंदुस्तान २० मई
भदोही में कार में विवाहिता के साथ दुष्कर्म
हिंदुस्तान २४ मई
जौनपुर में महिला को दबंगों ने जिंदा फूंका
हिंदुस्तान २१ मई
तंत्र विद्या के सिद्धि के लिए बेटी की दी बलि
दैनिक जागरण 22 मई
हत्या कर लटका दिया विवाहिता का शव
दैनिक जागरण २० मई
नाबालिक के साथ दुष्कर्म
हिंदुस्तान २७ जून
पिता पर दुराचार का आरोप
यह कुछ समाचारों के शीर्षक हैं । शीर्षक ही सभी घटनाओं का एहसास करा रहे हैं । यह सभी घटनाएँ हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के कुछ जिलो में घटित हुयी हैं । इसी तरह की घटनाएँ समूचे देश में घट रही हैं । जमीं से चाँद तक पहुचने और तमाम उपलब्धियां हासिल करने के बाद भी मनुष्य के नैतिक चरित्र में रंच मात्र भी बदलाव नही आया । उसे जब जहाँ भी मौका मिल रहा है वह अपनी शारीरिक हवस मिटाने के लिए सभी मानवीय संवेदनाएं व मर्यादाओं को तिलांजलि दे रहा है । उसकी आँखे माँ , बहनऔर बेटी का रिश्ता भी भूल जा रहीं हैं । उत्तर प्रदेश में तेज तर्रार महिला मुख्यमंत्री के रूप में मायावती शासन कर रही हैं । इनके निर्देश को फरमान के रूप में देखे जाने की चर्चाएँ होती हैं । हर रोज अपराधों पर अंकुश लगानें के लिए अधिकारियों को कड़े फरमान जारी किए जाते हैं । वावजूद इसके उसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा ।उत्तर प्रदेश में १ जनवरी से १५ मार्च तक कुल ७४ दिन में २९८ महिलायें बलात्कार और ३०४ महिलाओं की दहेज के लिए ह्त्या हुई । युपी के सीएम की कितनी हनक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है ।
यु पी १८ जोन में विभाजित है । इसमे सर्वाधिक घटनाएं लखनऊ जोन में हुईं । इस जोन में ५६ बलात्कार ४० दहेज हत्याएं हुईं । २००८ में बलात्कार की १५३२ व् २०६६ घटनाएं दहेज ह्त्या की हुईं । इसके अलावा ऐसे तमाम पीड़ित परिवार होंगे जिनके मामले दर्ज ही नही हुए होंगे । इन घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है की हम कितने बर्बर हैं । तालिबानिओं को जीभर कर गरियाने वाले हम लोग किस हैवान से कम हैं ।
शर्मनाक बात तो यह है की प्रदेश में मायावती का शासन है तो देश की राष्ट्रपति भी महिला के रूप में प्रतिभा देवी पाटिल हैं । इसके अलावा देश का संचालन जिस पार्टी के हाथ में है उसकी बागडोर भी सोनिया गांधी के हाथ में है । इतना ही नही लोकसभा की अध्यक्ष भी मीरा कुमार हैं । ऐसे में क्या इस देश की संसद में सांसद ऐसा कानून नहीं ला सकते जिससे यह दुराचारी सात जन्म तक ऐसी हिम्मत न जुटा सके । क्या ऐसा साहस यह महिला शासक कर सकती हैं ?
विजय विनीत 9415677513

2 टिप्पणियाँ:

Aftab ने कहा…

विनीत भाई अगर कड़ा कानून आ गया तो फिर जिन नेताओं की रंगरेलियां लचर-पचर कानूनों की आड़ में जीवन पर्यंत चलती रहती हैं वो क्या जेल में जेलर के साथ बलात्कार करेंगे....???
खुद महिलाएं ही अपने राजनैतिक हितों के लिये स्त्रीत्व को कार्ड की तरह से इस्तेमाल करती देखी जाती हैं, संभव है कि आप सहमत न हों लेकिन मेरी छोटी सोच तो यही बताती है।
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

आफ़ताब की बात से सहमति है...
जय जय भड़ास

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