लो क सं घ र्ष !: संसद में महंगाई पर चर्चा का रहस्य

रविवार, 20 दिसंबर 2009

संसद के अन्दर सांसदों ने महंगाई पर जोर-शोर से चर्चा की उनकी चिंता जनता के प्रति नहीं थी अपितु अपनी सुविधाओं को महंगाई की चर्चा के बहाने बढ़ाना चाहते थे महंगाई पर चर्चा की और अपनी सुविधाओं में बढ़ोत्तरी कीमंत्री 'वेतन एवं सुविधाएं ( संशोधन ) विधेयक 2009' पास कर लियाइस विधेयक के अनुसार मंत्री उनके निकट सम्बन्धी वर्ष भर में 48 मुफ्त हवाई यात्राएं करने का प्राविधान हैएक यात्रा में कितने लोग शामिल हो सकते हैं उसका कोई उल्लेख नहीं किया गया हैयह विधेयक बिना किसी चर्चा के कुछ ही मिनटों में पारित हो गया हैडॉक्टर मनमोहन सिंह के गरीबी हटाओ कार्यक्रम के तहत मंत्रियों को महंगाई से थोड़ी सी राहत प्रदान की गयी हैइससे लगता है कि संसद के सत्रावसान तक सभी सदस्यों को महंगाई से राहत दे दी जाएगीदेश का मजदूर किसान मेहनतकश तबका महंगाई से भूखो मर जाये, हमारे राजनेता सुखी रहे उनसे यह उम्मीद करना कि वह जनमुखी कोई कार्य करेंगे ? देशी कहावत है कि ' अँधा बाँटें रेवड़ी, घरो घराना खाए ' । केन्द्रीय मंत्री मंडल के काफी सदस्य विभिन्न राजा महाराजों के पोते परपोते हैं उनके बाप दादा ब्रिटिश साम्राज्यवाद के प्रतिनिधि थे और भारत को गुलाम बनाये रखना चाहते थे जब वह ब्रिटिश साम्राज्यवाद की तरफ से शासन करते थे तो जनता से टैक्स वसूलने के मद इस प्रकार थे कि आज राजा के लड़का हुआ रुपया दो , आज राजा के कुत्ते की शादी है उसके खर्चे के लिए टैक्स दो , राजा कार खरीद लाए हैं उसके लिए पैसा दोकुल मिलाकर ये पुराने राजे-रजवाड़े मेहनतकश जनता की कमाई को किसी किसी प्रकार, किसी किसी तरीके से हड़प लेते थे। आज स्वरूप बदला है चरित्र वही है

सुमन
loksangharsha.blogspot.com

1 टिप्पणियाँ:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

संसद में सब कुछ इनकू मुफ्त में मिल जाता है,
हमारे खों को चूसने वाले ये नेता इन्हें महगाई की क्यूँकर फिकर हो.
हम मारें तो मरे, साले ये हमारे बचे हुए रक्त भी बेशर्मो की तरह चूस लें
जय जय भड़ास

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