छात्र-आत्महत्याओं के चलते महाराष्ट्र सरकार पाठ्यक्रम की समीक्षा करेगी

गुरुवार, 21 जनवरी 2010

शिरीष खरे।। मुंबई।। 22 जनवरी, 2009।।बालासाहब थोरात स्कूली शिक्षा मंत्री
महाराष्ट्र में छात्र-आत्महत्याओं की बढ़ती तादाद के मद्देनजर, राज्य सरकार ने समस्या के कारणों को समझने के लिए अब टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस से व्यापक अध्ययन करवाने की सोची है। इस मामले में स्कूली शिक्षा मंत्री बालासाहेब थोरात का मानना है कि सरकार प्राथमिक स्तर पर जांच कर चुकी है, मगर एक विस्तृत अध्ययन किए जाने की जरूरत है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित सेमीनार में उन्होंने माना कि इन दिनों छात्र-आत्महत्याएं जितनी तेजी से हो रही हैं, उतनी पहले कभी नहीं हुईं। इसे देखते हुए स्कूली शिक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि छात्रों को पढ़ाई से तनाव-मुक्त रखने के लिए राज्य स्कूल बोर्ड के पाठ्यक्रम की समीक्षा होगी। इस मौके पर राज्य स्कूल बोर्ड के अध्यक्ष विजयशीला सरदेसाई और स्कूल शिक्षा निदेशक बालचंद्र देसले के अलावा कई वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी भी उपस्थित थे।
बालासाहेब थोरात ने जानकारी देते हुए कहा कि ‘‘एक समीक्षा समिति गठित की जा चुकी है जो राज्य स्कूल बोर्ड में पहली लेकर से दसवीं तक के पाठ्यक्रमों की समीक्षा करेगी। इस सिलसिले में हम कुछ विशेषज्ञों से भी चर्चा कर रहे है।’’ उन्होंने आगे बताया कि ‘‘हम योग, ध्यान, कला और संगीत जैसी विधाओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की मंशा रखते हैं। हम स्कूलों और कालेजों में छात्रों के लिए कांऊस्लिंग की व्यवस्था को अनिवार्य तौर पर लागू करने के बारे में भी सोच रहे है।’’
राज्य स्कूल बोर्ड के अध्यक्ष विजयशीला सरदेसाई ने बताया कि ‘‘हमारे साथ 40 से 50 विशेषज्ञ हैं जो कि स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर काम करेंगे।’’ बोर्ड द्वारा इस विषय पर दो बैठक भी आयोजित की जा चुकी हैं।
टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस के प्रस्तावित अध्ययन के बारे में बालासाहेब थोरात ने कहा कि ‘‘हम प्राथमिक स्तर पर जांच कर चुके हैं और हमने पाया है कि केवल परीक्षा के तनाव के चलते ही सभी छात्र आत्महत्या नहीं करते हैं, मगर एक विस्तृत अध्ययन किए जाने की जरूरत है.... ’’
इस बारे में टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस के निदेशक एस परशुरमन ने कहा कि ‘‘अभी तक तो सरकार ने इंस्टीट्यूट से अधिकारिक तौर पर कोई संपर्क नहीं साधा है।’’ यह बात गौर करने लायक है कि टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस ऐसा पहला इंस्टीट्यूट है जिसने 2005 में किसानों की आत्महत्या पर अध्ययन किया।
इस बीच मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने शिक्षा मंत्री बालासाहेब थोरात को एक पत्र लिखकर कहा कि अग्रणी स्कूल प्रबंधकों के साथ दो दिनों के लिए एक बैठक रखी जाए। इस बैठक में छात्र-आत्महत्याओं के पीछे की मूल प्रवृतियों और उसके कारणों का पता लगाया जाए।

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शिरीष खरे ‘चाईल्ड राईटस एण्ड यू’ के ‘संचार-विभाग’ से जुड़े हैं।
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3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अरे यार कम से कम कोई नाइस तो लिख तो भाई उत्साह बढ़ता है लिखने का.... या कमेंट्स देने में भी पैसा खर्च हो रहा है
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अरे यार कम से कम कोई नाइस तो लिख तो भाई उत्साह बढ़ता है लिखने का.... या कमेंट्स देने में भी पैसा खर्च हो रहा है
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

कार्य परवान छाडे तो बेहतर,
जानकारी के लिए आभार.
जय जय भड़ास

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