चित्रकार एम.एफ़.हुसैन का कमीनापन

शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

देवी दुर्गा अपने वाहन सिंह के साथ नग्नावस्था में लैंगिक जुड़ाव के साथ

हज़रत मोहम्मद पैगम्बर की बेटी बीबी फ़ातिमा पूरे वस्त्रों में सज्जित

देवी लक्ष्मी भगवान गणेश के सिर पर नग्नावस्था में पैर रखे हुए

खुद मक़बूल फिदा हुसैन द्वारा बना्या अपनी मां का चित्र

देवी सरस्वती का नग्न चित्रांकन

मदर टेरेसा पूरे कपड़ों में चित्रित


नग्नावस्था में श्री-पार्वती

स्वयं हुसैन की बेटी का चित्र जो कि पूरे कपड़ों में है

नग्न द्रौपदी

पूरे वस्त्रों में आधुनिक मुस्लिम महिला

नग्न हनुमान और निर्वस्त्र देवी सीता को रावण की जांघ पर बैठा चित्रित करा गया है

शायर ग़ालिब और फ़ैज पूरे कपड़ॊं में चित्रित करे गये है

पूरे कपड़ों में सज्जित मुस्लिम बादशाह और नग्न ब्राह्मण जो कि चित्रकार द्वारा हिंदुओं के नंगे चित्र बनाने की सोच को साफ़ बता रहा है

भारतमाता का नग्न चित्र जिनके अंगों पर राज्यों के नाम लिखे गये हैं साथ ही अशोक चक्र जैसे राष्ट्रीय सम्मानित प्रतीक का भी इस चित्र में समावेश करा गया है


Out of the four leaders M. Gandhi is decapitated and Hitler is naked. Hussein hates Hitler and has said in an interview 8 years ago that he has depicted Hitler naked to humiliate him and as he deserves it ! How come Hitler's nudity cause humiliation when in Hussein's own statement nudity in art depicts purity and is in fact an honor ! This shows Hussein's perversion and hypocrisy.

M F Hussein's Hypocrisy....Judge Yourself

And, of course, of all those who plead Hussein 'Not Guilty' in the name of Art & freedom of expression!
Be a judge yourself of Hussein's paintings below.

7 टिप्पणियाँ:

Unknown ने कहा…

is article par tamam bhadasi krantikari lekhakon kee bolti kyu band hai bhai...suman ji aap kuch kahenge yaa dr. sahab aap...intjaar hai aap krantikari lekhakon ke pratikriya ka

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है भाई सो वो अपने मन का कमीनापन उगलता है आपने भी जो मन में आया सो उसकी बात को जगजाहिर कर दिया। लेकिन इसमें एक बात हुई कि यदि आप उसका बहिष्कार कर दें तो एक कलाकार अपने आप ही मर जाता है आपने तो उसके विचारों की नुमाइश भड़ास के वैश्विक मंच पर लगा दी यानि उसके विचारों को और फैला दिया कि देखो ये मेरी मां का नग्न चित्र है। हो सकता है कि आप सहमत न हों पर मुझे यही लगा कि जब वो आए तो उसकी ली जाए न कि उसकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाई जाए। इस मुद्दे पर कोई कमेंट देने का भी साहस न करेगा
जय जय भड़ास

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

संजय बाबू,आप किस गलतफ़हमी में हैं भड़ास पर जिन क्रान्तिकारी लेखकों और भड़ासियों की बात आप कह रहे हैं कि बोलती बंद है तो आपकी जानकारी में इजाफ़ा कर दूं कि ये पोस्ट आपने तो बनाई नहीं है न ही आपने प्रकाशित करी है ये पोस्ट डा.साहब के दोस्त श्री मिलिंद कामत जी ने भेजी है चूंकि वे भड़ास के सदस्य(औपचारिक) नहीं हैं इसलिये ये पोस्ट किसी के नाम से प्रकाशित नहीं हुई है। यदि इसपर डा.साहब और भाई रजनीश झा की सहमति न हो तो इसका प्रकाशन ही न हो पाता। क्या आपने इस बात को लिखने का साहस कभी जुटाया या बस ऐसे ही भड़ासियों की हिम्मत को पैमाना लेकर नापने आ गये? जरा आप भी भड़ास पर सीधे मेल करके कुछ सार्थक क्रान्तिकारी विचार लिख कर भेजिये जिससे देश की सम्प्रभुता को बल मिले या आपकी नजरों में बस हिंदू-मुसलमान, ब्राह्मण-चमार या फिर हिंदी-मराठी जैसे चिरकुट मुद्दों पर नफ़रत भरी बातें लिख पाना ही क्रान्ति है? जरा आगे आइए आपका स्वागत है भड़ास पर.....
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना Munawwar Sultana منور سلطانہ ने कहा…

मनीषा दीदी,भड़ासियों की ताकत और क्रान्तिकारी विचारों को नापने वाले इस बन्दे में खुद इतना साहस नहीं है कि अपने बारे में लिख सके आप इससे क्या उम्मीद कर रही हैं। इस तरह के डरपोक कायर और मुंहचोर लोग जो कि अपना प्रोफ़ाइल तक बताने में डरते हैं क्या खाकर क्रान्ति की सोच रखेंगे। ये सिर्फ़ मुंह छिपाकर निंदा कर लेने वालों में से हैं आप इस तरह के लोगों की बातों पर प्रतिक्रिया करके ऊर्जा व्यय न करें। भाई मिलिंद कामत को मैं जानती पहचानती हूं वो एक बहादुर इंसान हैं जिन्होंने इस बात को खुल कर सामने लाया है मैं उनकी बहादुरी के जज़्बे को सलाम करती हूं और जूता रसीद करती हूं इस चित्रकारी के कलंक के नाम पर.... थू है इसके वजूद पर...
जय जय भड़ास

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

पहले भी इन चित्रों को देख चुकी हूं, लेकिन आज तुलनात्मक तरीके से देखे. शर्मनाक है ये. क्या इसी को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता कहते हैं?
वसन्तपन्चमी की शुभकामनायें

बेनामी ने कहा…

संजय जी,
भड़ास कि बोलती बंद और खुलती नहीं है,
हिन्दुस्तान के आम आदमी से जुड़े कोई भी सरोकार के लिए भड़ासी दहाड़ता है और भडासी की एक दहाड़ से कईयों कू मूत निकल जाता है,
रही बात इस तस्वीरों के बारे में तो डाक्टर साहब ने स्थिति स्पष्ट कर दी है.
जय जय भड़ास

दिलीप कवठेकर ने कहा…

आज ही खबर पढी़, कि माननीय हुस्सैन मियां कतर देश की नागरिकता ले रहें हैं, और भारतीय मीडीया घडियाली आंसू बहा रही थी.

वैय्यक्तिक स्वतंत्रता का मैं पक्षधर हूं. मगर हिंदु देवी देवताओं को नग्न बताने का कोई औचित्य नज़र नहीं आता. क्या अपनी मां का नग्न चित्र नही बनाया उन्होने?

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