सोनल रस्तोगी को आपत्ति है शायद कि शोएब को बहनचो** क्यों लिखा आएशा ने....

मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

सोनल बहन जी कोई कमीना, नीच, वासना का भूखा इंसान नुमा दिखने वाला दरिंदा और तो और धर्म की आड़ में स्त्री की देह को रौंद कर उसे गर्भवती कर देता है औरफिर उस स्त्री को दुर्दैववश गर्भपात हो जाता है ऐसे में वो पति कहलाने वाला गलीज़ आदमी दूसरी औरत पर लार टपका रहा है और पहली पत्नी को दुनिया के सामने चीख चीख कर बड़ी बहन(आपा) बता रहा है । इसके बाद वही आदमी निकाह को होने को स्वीकारता है पंद्रह हज़ार रुपये कीमत देने की बात होती है उस बेचारी की देह रौंदे जाने की फिर तलाक की धार्मिक जायज नाजायज की कबड्डी खेली जाती है और दूसरी लड़की से शादी कर ली जाती है फ़िर जब मन भर जाएगा इस दूसरी से तो तीसरी से शादी कर ली जाएगी इसे बहन बता कर।
अब ऐसे में अगर आएशा बहन ने इस दरिंदे को बहनचो** लिख दिया तो आप भाषा पर प्रश्नचिन्ह लगाने लगीं। आप तो आक्रोश का समर्थन कर रही हैं लेकिन निःशब्द क्यों हैं खामोशी इस बात के लिये कि कहीं आँख में आँसू लाकर चीख कर गाली देने से बौद्धिक लोगों की कतार से बेदखल न कर दी जाएं? क्या जरा सी भी लज्जा है इस चुप्पी पर या लज्जा का समीकरण भी निःशब्द ही है। भड़ास पर स्त्रियों को देख कर कई बार लोग हिकारत से देखते हैं लेकिन सच तो ये है कि यही वह मंच है जहाँ हम अन्याय के विरोध में मुट्ठियाँ भींच कर जी भर कर गालियाँ दे लेते हैं अपने आक्रांता को जिसे हम लतिया-जुतिया नहीं सकते। आप वो शब्दकोश ले आइये जिसमें इस तरह के आक्रोश को व्यक्त करने के लिये बिल्कुल सही शब्द हों लेकिन आपकी भाषा में सभ्यता के दायरे में आते हों ताकि हम गंवार भड़ासिन बहनें खुद को रौंदे जाने पर आपकी तरह निःशब्द न रह जाएं। आपको साधुवाद पहुंचे।
जय जय भड़ास

7 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

दीदी आएशा ने जो भी लिखा है वह सही है और भाषा भी बिलकुल सही है ऐसे लोगों के लिये किसी भद्रता की आवश्यकता नहीं है और घटनाक्रम ने सिद्ध कर दिया है कि जो आएशा ने कहा है वह सचमुच वही है कि सुअर कहीं का जिसे भोग चुका है उसी को बड़ी बहन कह रहा है और धन्य है सानिया मिर्ज़ा जो उसका साथ दे रही है कल ये कमीना उसे भी अपनी माँ या बहन बताएगा तब सानिया इसे क्या कहेगी???
जय जय भड़ास

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

गालियाँ असहाय और कमजोरों का हथियार हैं। इनके माध्यम से वे आक्रोश व्यक्त करते है। अगर आप स्वयं को कमजोर मानती हैं तो मुझे कुछ नहीं कहना है। सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

Chhaya ने कहा…

Shoaib ne Ayesha ko apni Aapa (behen) bataya tha... baad mein unhein Talaq bhi diya. to obviously unke liye jo shabd prayog kiya gaya hai wo bilkul sahi hai...

Manisha didi, ek zamane ke baad apka lekh padha. plz aap likhti rahiye..

ankit ने कहा…

Danda ji, meri samajh se ye pragatisheel baudhdhik bhasha ka manch nahi hai,man me jo hai,wo agar aksharash bahar aayega to bilkul satik abhivyakti hogi vicharo ki.....

Amit ने कहा…

satya hai.. galiyan kayaron ka hathiyar hain...
galiyon se bhadas nikalkar samaj nahi badala jata...
rahi ankit ji ki baat...
vicharon ki aisi sagun abhivyakti ka bhi kya karna jo poori tarah nirarthak aur najayaj ke dayre mein aa jaati ho.
kutta kaat bhi le... to uske badle mein bhaunkna shuru kar dena...
baat kuchh ,,,

khair lage rahiye...
akhir kayrata ka bhi to koi manch hona hi chahiye naa...

बेनामी ने कहा…

तुम सबकी मां का भोसड़ा.

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