सूफ़ियों पर सवाल आपसे .......

गुरुवार, 17 जून 2010

कृपा करके साफ़ कर दें कि आपने किधर पढ़ा है कि हदीसों की रचना किन्हीं सूफ़ी संतों ने अंतःप्रेरणा से करी हैं? मैं निःसंदेह अच्छा मुसलमान नहीं ही हूँ लेकिन जहाँ तक मुझे इस विषय पर जानकारी है कि हदीस दो हैं एक तो अल्लाह की हदीस दूसरी मोहम्मद साहब की हदीस। अल्लाह की हदीस के बारे में ये कि वह अल्लाह की कही हुई बात है जिसकी पुष्टि मोहम्मद ने करी है और मोहम्मद की कही हुई बात जिसकी पुष्टि उनके असाबियों ने अपने आने वाले लोगों के सामने करी है तब उन बातों ने हदीस की शक्ल ली है।
सूफ़ीवाद का जिस तरह से उदय हुआ वस्तुतः वह कोई प्रेम या करुणा के तल पर नहीं हुआ था वह शुद्धतः इस्लाम के प्रचार के लिये हुआ था। बस ये तलवार से थोड़ा भिन्न तरीका था जिसमें भारतीय दर्शन और यहाँ की सभ्यता-संस्कृति की चाशनी लपेटी गयी थी। ये मैं नहीं कह रहा बस आप लोगों को बता रहा हूं कि हिन्दू राइटर्स फ़ोरम की एक किताब क्या कह रही है जिसे कि एक जैन ने अपने ब्लॉग पर लिख रखा है(है न मजे की बात हिन्दी चीनी भाई भाई)
आप सिर्फ़ मेरे सवाल का जवाब दें कि आपने ये अंतःप्रेरणा वाला संदर्भ किधर से लिया है?
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

शम्स बाबू देखिये कि आपके सवाल का क्या जवाब आता है वैसे अब तो उनके लेख की अंतिक किश्त भी आ गयी है। कई बार लगता है कि लोग उत्तर देने में हिचकिचाते हैं लेकिन भड़ास पर कैसा हिचकिचाना ये तो घोषित गंवार,देहातियों का मंच है तो अगर कोई बुद्धिजीवी बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर देता है तो हम बौड़म उसे सिर झुका कर स्वीकार भी लेते हैं बस हमारे सहज भड़ासी स्वभाव को पटना चाहिये।
जय जय भड़ास

अजय मोहन ने कहा…

श्श्श्श्श्श्श..... कोई है
कोई है ये जो इतनी कस कर ले रहा है लेकिन...
इसके सवाल का जवाब नहीं है....
श्श्श्श्श्श चुप्पी की कुप्पी थूथुन पर रखी है महान लेखकों ने.....
जय जय भड़ास

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