ब्लॉगिंग कौन करेगा और कौन नहीं ये बस कुछ लोग निर्णय करेंगे जो आपकी परिभाषा में स्वयंभू सभ्य और सुसंस्कृत हैं?

बुधवार, 28 जुलाई 2010


आत्मन तिवारी जी आपने लिखा है कि हमें सिविलाइज्ड(सभ्य) तरीके को अपनाते हुए कन्सट्रक्टिव(रचनात्मक) यानि कि हम जो तरीका अपना रहे हैं वह असभ्य और ध्वंसात्मक है। ब्लॉगर किन लोगों का प्लेटफ़ार्म है क्या ये भी बस कुछ लोग निर्णय करेंगे जो आपकी परिभाषा में स्वयंभू सभ्य और सुसंस्कृत हैं? प्रभु श्री! कम से कम कोई तो ऐसी जगह छोड़ दीजिये जहाँ खेत की मेड़ पर बैठा पसीने से भीगी बनियान निचोड़ कर बीड़ी पीता हुआ किसान हजारों टन अनाज को सड़ा देने वाली कमीनी सरकारी मशीनरी को गाली दे सके। क्या आप इसे बुरा मानते हैं कि जिस मजदूर के पसीने का ईंधन बड़ी बड़ी फैक्ट्रियों में लग कर मशीनें चल रही हों वो मजदूर अपने हक़ के लिये पूंजीपति मालिक के आगे आजीवन गिड़गिड़ाता ही रहे? अगर गाली दे देगा तो आप उसे असभ्य, गँवार,अनपढ़ और जाहिल मान लेंगे पर भ इया राजा उस किसान या मजदूर को आपके दिये टाइटिल की परवाह नहीं है। भड़ास आधे खाली पेट लोगों का मंच है जिन्हें फिर भी उल्टियाँ होती हैं आप इस स्थिति को समझ नहीं पाएंगे क्योंकि आप शायद अंग्रेजी दिमाग से सोचते हैं कभी गाँव की मिट्टी को चेहरे पर लगा कर आइना देखिए और बाजरे की रोटी के साथ प्याज नमक खा कर दिन भर खेत की निराई गुड़ाई करिये तब सिविलाइजेशन की बात शाम को बताइयेगा। हम सब भड़ासी आपसे जरूर चर्चा करना चाहेंगे। वातानुकूलित कमरों में बैठ कर प्रवचन देना बच्चे पैदा करने जैसा सरल काम ही है। आपका स्वागत है महानुभाव प्रतीक्षा रहेगी।
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

पंडित जी लिख तो गये मगर ये खुद बड़े भारी के लाल झंडाबरदार हैं और ब्लॉग के माध्यम से कम्युनिष्टों का घोषणा पत्र जाहिर करते हैं तो निसंदेह लोकतंत्र की भड़ास इनकी भाषा को नहीं सुहाएगी, इनको तो बस लाल झंडा को बेच कर दलालों के साथ जहाँ मिले दलाली में संलिप्त होना ही सुहाएगा.
पंडित जी और इन जैसे मुखौटाधारी की ऎसी की तैसी और इन जैसी सीवीलाइज्ड की ऎसी की तैसी.
विचार क्रांती आमलोग और भूख के बीच में ऐसे लोग टपक कर अपने दलाली का रास्ता ढूँढने की कोशिश करते हैं.
जय जय भड़ास

आयशा धनानी ने कहा…

लाल झंडा खुद ही पच्चीसों तरह के शेड्स में मौजूद है,कम्युनिज्म एक सुन्दर छलावे से ज्यादा कुछ नहीं है जो गरीबों के हक़ की बात करते हुए छलता है
जय जय भड़ास

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