सलीम खान ! नशे में हो? बौरा गये हो या लखनऊ के मिलावटी खाने का असर दिमाग पर हो गया है?

सोमवार, 26 जुलाई 2010


दुष्ट बालक सलीम खान को शब्दशः उत्तर दे रहा हूँ, मैं डॉ.रूपेश श्रीवास्तव हूँ तुम्हारी ही पोस्ट लेकर लिखा है ईमान बचा हो तो जरूर आगे लिखना-----
एक मोहल्ले में एक परिवार ऐसा था (था नहीं है) जिससे सभी लोग(सिर्फ़ हरामी,मुखौटेधारी और धूर्त,बेईमान) त्रस्त थे क्यूंकि वह परिवार ऐसा था कि आपस में खूब लड़ता झगड़ता था(लेकिन हर दर्द में एक दूसरे के साथ हैं चाहे घर का हो या बाहर का) और अगर ग़लती से कहीं कोई दुसरे(दूसरे) घर का व्य्ज्ती(गुस्से में शायद हिंदी लिखने तक में गलती करने लगे हो व्यक्ति लिखना चाहते होगे) टकरा गया तो उसकी शामत(ग़लत शब्द प्रयोग करा है) नहीं थी. उस परिवार के हर सदस्यों को फर्राटेदार गलायें(गालियाँ लिखो प्यारे) देनी आतीं थी जैसे लगता था कि गली देने(गाली देने) में पीएचडी कर रखी हो. लोग उस परिवार और उसके सदस्यों से बात करने में क़तराता था. लोग तो उनकी तरफ़ देखते भी नहीं थे, न ही उसका ज़िक्र ही कहीं करते थे(तो तुम क्या हगने के लिये आए थे इस परिवार के आँगन में)... इस तरह से उस परिवार के किसी भी सदस्यों को मोहल्ले के लोग लड़ाए हेतु उपलब्ध होना ख़त्म होते गए तो उन्होंने एक नयी तरकीब सोची और उसके घर से गुजरने वालों से वह ऐड(छेड़ लिखते तो सही रहता) कर कर के झगड़ते... कभी कहते उसने मुझे घूरा था तो कभी कहते उसने मुझे देख कर मुहँ चिढ़ाया था... वगैरह वगैरह !(दुष्ट बालक! भड़ास पर किन मुद्दों पर किस किस स्वयंभू शरीफ की चम्पी करी गयी है ये फेहरिस्त प्रकाशित करने में तो तुम्हारी भी हवा तंग है)
ब्लॉग जगत में भी एक ब्लॉग ऐसा है जिसके कुछ लोग उसी परिवार की मानसिकता वाले हैं. भले ही कोई उनके मुहँ लगे या न लगे वह ज़बरदस्ती चर्चा में रहने के कारण किसी न किसी सम्मानित ब्लॉगर का नाम ले लेकर उनके ख़िलाफ़ अपशब्द कहते है (किन किन महान और सम्मानित ब्लॉगरों के खिलाफ़ किन मुद्दों पर अपशब्द लिखे गये हैं ये लिखने का साहस तुममें नहीं है वो तो सिर्फ़ हम घोषित तौर पर बुरे लोगों में ही है) आपने कहावत तो सुनी ही होगी... 'बेगानी शादी में अब्दुल्लाह दीवाना'(शादी जब अब्बाजान की थी तो वलीमे में टपके थे लेकिन जब भड़ासियों ने तुम्हारे नपुंसकता वाले कमेंट पर तुम्हें रगेद लिया तो कुत्ते के पिल्ले की तरह कुंकुआते हुए भाग कर अपनी गली में भौंक रहे हो) कुछ इसी तरह के हैं वो लोग जिनसे मेरा राबता हुआ पिछले हफ्ते! अब आप समझ गए होंगे मैं बात कर रहा हूँ इस ब्लॉग की!

वैसे उक्त लिंक किये गए ब्लॉग के लोगों ख़ास कर उसके का डरना लाज़िमी ही है(अरे बालक डर....??? भड़ासियों को?? तुम पक्का बेटा गाँजा या चरस पीने लगे हो वरना ऐसी बात तो लिखते ही नहीं डॉ.रूपेश श्रीवास्तव और बाकी भड़ासियों को डर लगता है ये तो तुम नशे या बेहोशी की हालत में ही कह सकते हो), क्यूंकि जिस मंच पर आप यह पोस्ट पढ़ रहे हैं वह देश को सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला सामुदायिक चिट्ठा है !(बालक जैसे ही सौ सदस्य होंगे न वैसे ही ब्लॉगर आगे सदस्य लेना बंद कर देगा भड़ास पर ये अनुभव करा जा चुका है पहले जरुर कोई सीमा नहीं थी लेकिन अब है तुम्हारा जल्द ही पोपट होने वाला है) और मैं एक बात और स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे और समर्थकों साथियों ब्लॉगरों ने अगर किसी को कुछ भी कहना भी होता है तो सभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं, और न ही भ. ( ड़) लिख देते तो आप भी असभ्य हो जाते हमारी तरह,गाली देना तो चाहते हो लेकिन कुंठा है कि कहीं बुरे न कहलाने लगो..वों की तरह अपने ब्लॉग की नीलामी नहीं करते हैं !(तुम जैसे ही लोग हैं जो मादर...द और बहन...द जैसी गालियाँ देते होंगे हमें जबकि हम ऐसा नहीं करते हम ...... नहीं लगाते साथ ही माँ बहनों को गाली नहीं देते क्योंकि जिससे झगड़ा या विवाद है उसकी माँ बहन हमारे लिये हमारी माँ बहन बेटी की ही तरह हैं हम सीधे उसे ही गरियाते हैं दुष्ट और धूर्त बालक)

अब आता हूँ असली मुद्दे पर ! मुझे मालूम है कि जब बिना मुहँ लगे उन लोगों को एक-तरफ़ा नफ़रत हो गयी तो इस पोस्ट को को लिखने के बाद उनका क्या हाल होगा. मैं सलाह और चेतावनी दोनों एकसाथ देते हुए यह कहना चाहता हूँ कि "यदि तुम फ़ैसला चाहते हो तो फ़ैसला तुम्हारे सामने आ जाएगा और यदि बाज़ आ जाओ तो यह तुम्हारे ही लिए अच्छा है, वरना हमाम में सब नंगे ही होते हैं!" बाद में जब मैंने उस ब्लॉग पर लिखे गए एक सदस्य से बात करने की कोशिश की तो उसने बात करने से इन्कार कर कर दिया. (मुझसे बात करनी होती तो भाई गुफ़रान सिद्दिकी और वकील साहब भाई रणधीर सिंह सुमन के पास भी मेरा मोबाइल नंबर है जरा साहस करके मुझसे बात कर लेते तो पता चलता कि कितने निडर हो, गुफ़रान भाई तो मेरे घर आ चुके हैं जरा उन्हें बोलिये अपने संसार के सबसे बड़े सामुदायिक चिट्ठे पर मेरे बारे में लिखने के लिये कि मैं कितना बुरा और डरपोक आदमी हूं)

मैं ब्लॉग जगत के सामने अति-विनम्रता के साथ उनके द्वारा लिखी गयी अपशब्द भाषा की प्रचुर मात्रा से लबरेज़ पोस्ट्स का ज़िक्र कर रहा हूँ और यह अपील कर रहा हूँ कि आप अवलोकन करके फ़ैसला लें... !

लिंक्स:::
अपशब्द संख्या एक- लखनऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन, सुमन जी और गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.
अपशब्द संख्या दो- मुझको दिया गया.
अपशब्द संख्या तीन- गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.
अपशब्द संख्या चार- मुझको दिया गया.
अपशब्द संख्या पांच- डॉ अनवर जमाल साहब को दिया गया.
अपशब्द संख्या छः- सुमन जी, गुफ़रान सिद्दीक़ी और डॉ अनवर जमाल को दिया गया.
अपशब्द संख्या सात- डॉ अनवर जमाल साहब को दिया गया.
अपशब्द संख्या आठ- डॉ अनवर जमाल साहब को दिया गया.
अपशब्द संख्या नौ- सुमन जी को दिया गया.
अपशब्द संख्या दस- सुमन जी को दिया गया.
अपशब्द संख्या ग्यारह- गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.
अपशब्द संख्या बारह- सुमन जी को दिया गया.
अपशब्द संख्या तेरह- गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.
अपशब्द संख्या चौदह- सुमन जी और गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.
अपशब्द संख्या पन्द्रह- सुमन जी और गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.
अपशब्द संख्या सोलह- सुमन जी और गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.
अपशब्द संख्या सत्रह- गुफ़रान सिद्दीक़ी को दिया गया.

उक्त सभी ब्लॉगर्स जिनके ख़िलाफ़ उस ब्लॉग पर अपशब्द कहे गए हैं, लखनऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन के सम्मानित सदस्य व पदाधिकारीगण हैं. (तुम सचमुच कितने बड़े धूर्त हो कि पाठकों की आँखों में धूल झोकने की कोशिश कर रहे हो लेकिन साथ ही गधे भी हो; लोगों को ये बताने का साहस है कि तुम्हारे पदाधिकारी भाई गुफ़रान सिद्दिकी और वकील साहब भाई रणधीर सिंह सुमन जी भड़ास के भी सदस्य हैं और खुद दो चार नहीं कई सौ पोस्ट लिख चुके हैं, निरे गधे हो तुम लेकिन कोशिश कर रहे हो कि मुखौटा लगा कर अक्लमंद दिखने लगो। अरे जो हो उसे स्वीकार लेना चाहिये जैसे भड़ासियों ने सहजता से खुद की स्वीकृति करी है)
आपका फ़ैसला सर-आँखों पर...!!!

सलीम ख़ान
संयोजक
लखनऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन
प्रस्तुतकर्ता: सलीम ख़ान
जय जय भड़ास

5 टिप्पणियाँ:

दीनबन्धु ने कहा…

अरे भाईसाहब कितनी बार गधा लिख दिया है अब ये इस बात की लिंक लगा कर नयी पोस्ट लिखेगा। दूसरी बात कि सुमन जी से सलाह लेकर आपके ऊपर मुकदमा करेगा। तीसरी बात मेनका बाई गांधी से बात करेगा कि आप इसे पशु कह कर पशुओं पर अत्याचार कर रहे हैं वो भी गधे जैसे निरीह और मासूम पशु पर :)
ये चिरकुट है आप खामखां इसे भाव दे रहे हैं ये लिख रहा है कि भड़ासी डर रहे हैं तो आप जान लीजिये कि ये कितना बड़ा बुड़बक है। जो भड़ासी मुंबई में रह कर ठाकरे लोगों की ऐसीतैसी करने से नहीं डरता वो इससे डरेगा। हमाम में नंगे होने की धमकी दे रहा है। अरे सलीम दुर्गुणों की खान तुम तो नंगे होगे हम तो पैदा ही नंगे हुए थे और अब तक हैं मरेंगे भी नंगे, नंगई से हमें कभी परहेज़ नहीं रहा।
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

गुरुदेव,
छील कर रख दिया, वैसे छिला क्या चड्ढी उतार दी इन नकाबपोशों की साले धूर्त सम्राट हैं.
इन क्षद्म्वेशी को नंगई का अभी तक पता नहीं चला है.
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

अपने पुराने और बेहद खास अंदाज़ में एक बार फिर डॉ.साहब ने शब्दशः उत्तर दिया है जो प्रश्न के मुकाबले ऐसा है जैसे कि मिलीग्राम के प्रश्न को मीट्रिक टन का उत्तर मिल गया हो। देखियेगा कि सलीम खान ब्लागिंग छोड़ कर सन्यास न धारण कर लें वैसे बात ईमान की है तो उसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिये इनके लेखन से दिख रहा है कि कितने ईमानदार हैं। भड़ासी तो बुरे हैं ही लेकिन ये अच्छे दिखने के ढोंग में सब करने पर अमादा हैं
जय जय भड़ास

आयशा धनानी ने कहा…

चूं तक नहीं कर रहे क्या साँप सूंघ गया????
सलीम खान तुम भड़ासियों के बारे में लिख रहे थे भूल गए कि हम सब बिना मुखौटों के जीते हैं
जय जय भड़ास

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