देश की अस्मत के साथ खिलवाड़ करती पत्रकारिता !!!

सोमवार, 20 सितंबर 2010

कल दिल्ली के जमा मस्जिद इलाके में गोलीबारी हुई, कुछ विदेशी मेहमानों को गोली लगी लेकिन सभी स्वस्थ और सुरक्षित है मगर ये गोलीबारी देश के मीडिया के लिए मानो एक खजाना लेकर आया क्यूंकि एक तो कॉमनवेल्थ गेम दूसरा अयोध्या पर आने वाला निर्णय और कांड का जमा मस्जिद के पास होना. इस सभी में कोई कड़ी हो या न हो मगर ख़बरों के लिए पिपली लाइव हमारे देश की मीडिया ने इस सबको जोड़ कर जो खबर देश के सामने रखी वो नि:संदेह डरावनी ही नहीं अपितु खौफनाक थी.
सभी खबरिया चैनल ने इस छोटे से घटना क्रम को न सिर्फ आतंकी हमला करार देने की कोशिश की अपितु अपने अपने चैनल के टी आर पी के लिए पुरे प्रकरण को जातीय उन्माद में बदलने वाली पत्रकारिता भी कर डाली वजह साफ़ जमा मस्जिद के पास गोलीबारी होना और 24 को अयोध्या बाबरी पर निर्णय आना. एक तरफ जब हम अपने देश की अस्मिता के लिए सब कुछ दरकिनार कर इस गेम के सफलतापूर्वक समपन्न होने के लिए एकजुट हैं और तमाम खामियों, घोटालों के बावजूद एकमत हैं तो सिर्फ देश की अस्मिता के लिए मगर ये खबरिया चैनल की कैसी पत्रकारिता है जो राष्ट्रद्रोह सरीखी रपट पेश करता है.

आज तक चैनल के अभिसार शर्मा ने इस बेहद ही धटिया चैनल के निकम्मे पत्रकारिता का सबूत दिया जब किरण बेदी से ही बदजुबानी करते हुए बेदी के बयान को बुखारी के आगे गलत तरीके से पेश कर मामले को जातीय रंग दे रहे थे, लानत है अभिसार.
वहीँ राजदीप का आई बी एन ने खबर को यूँ पेश किया की मानो मुंबई हमला के बाद दिल्ली पर आतंकियों ने कब्जा जमा लिया हो, क्या टी आर पी की होड़ में कभी बेहतरीन पत्रकारिता करने वाले राजदीप बाजार में आने के बाद लाला जी बन ख़बरों की होड़ में देश को हाशिये पर दाल रहे थे, शर्मनाक है राजदीप.
टी वी पत्रकारिता लगभग से बाहर हो चुके आई आई एम् सी के पसंदीदा दीपक चौरसिया की तो बात ही जुदा थी, अहले रात तक देश के दुश्मनों की तलाश मगर क्यूँ और किसके लिए ? जमा मस्जिद, अयोध्या और आने वाला फैसला सभी को मिला कर मजहबी रंग दे दो बस ये ही पत्रकारिता रह गया है वैसे इस से बेहतर पत्रकारिता की चौरसिया से उम्मीद भी नहीं की ज सकती.
न्यूज़ 24 इन सभी चैनलों की रह पर चल रहा था और सभी चैनलों को फोलो करते हुए बस ख़बरों की होड़ में था.
खबरिया चैनलों के इस होड़ को देखते हुए बस चिन्तनशील था की सभी न्यूज़ चैनल इंडिया टी वी के राह पर क्यूँ चल रहे हैं और पत्रकारिता के नाम पर देश को एक अनजाने खतरनाक राह पर मोड़ने का काम मीडिया क्यूँ कर रहा है.

थोड़ी सी रहत मिली जब चमचमाती दिल्ली और कॉमनवेल्थ गेम की तैयारी की रपट एन डी टी वी पर देखा.

घटना को इस तरह से विद्वेशिक और अपने मीडिया हॉउस के फायदे के लिए किसी भी रोप्प में बदल कर पेश करने वाली हमारी पीपली लाइव मीडिया पर अब तो नि:संदेह नकेल लगाने की जरुरत है अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब हमारा चौथा खम्भा हमरे देश की बोली लगता नजर आएगा.

5 टिप्पणियाँ:

inqlaab ने कहा…

watch it in inqlaab.com

अन्तर सोहिल ने कहा…

इन्हें खुद ही नहीं पता होता कि ये क्या बोल रहे हैं और दिखाते ऐसा हैं कि इन से ज्यादा किसी भी घटना पर किसी को कोई जानकारी नहीं है और हर केस को तुरन्त सॉल्व कर देते हैं।
आज तक चैनल पर कल एक महिला संवाददाता एक प्रत्यक्षदर्शी से इन्टरव्यू ले रही थी। प्रत्यक्षदर्शी बताता है कि वह चेहरा नहीं देखा पाया और उसने हमलावरों को भागते हुये देखा। उक्त संवाददाता का सवाल था - "उनकी मानसिकता क्या थी, क्या वो विक्षिप्त थे?"

प्रणाम
बेचारा प्रत्यक्षदर्शी क्या जवाब दे?

माधव ने कहा…

आपकी रिपोर्ट में मै कुछ जोड़ना चाहता हूँ . दीपक चौरसिया जो दूरदशन के प्रमुख थे जो आज कल स्टार न्यूज पर है , उन्होंने पिछले हफ्ते प्राइम टाइम पर राखी सावंत के साथ एक दो घंटे का प्रोग्राम किया शीर्षक था ," क्या राखी देश को बिगाड़ रही है ". प्रोग्राम का स्टार बेहद ही घटिया था , छिछोरी बाते शुरू से अंत तक होती रही .ऐसे प्रोग्राम पेश कर दीपक ने मीडिया का चेहरा बिगाड़ दिया है .

हमें आश्चर्या नहीं होना चाहिए जब कुछ दिन बाद लोग मीडिया को देखकर जुटे चप्पल चलाने लगे .

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

क्या कुपत्रकारिता के लिये अंग्रेजी में कोई विशेष शब्द है इन चोट्टों के लिये...... अंग्रेजी में गरियाने का दिल कर रहा है आज :)
जय जय भड़ास

ZEAL ने कहा…

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मीडिया भारी भूल कर रही है। खुले आम देश को बदनाम कर रही है। इनकी टी आर पि के चक्कर में देश को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। गोली चलने की घटना को बेवजह तूल देकर , खौफ और आतंक फैला रही है मीडिया।

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